
हाईकोर्ट ने सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर लगाई रोक, राज्य सरकार पर जुर्माना
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सांसद निशिकांत दुबे हाईकोर्ट केस
झारखंड हाईकोर्ट ने मोहनपुर कांड संख्या 281/2024 में भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक लगा दी है। राज्य सरकार द्वारा बार-बार जवाब न देने पर अदालत ने 2000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
हाईकोर्ट ने सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर लगाई रोक, राज्य सरकार पर लगा 2000 रुपये का जुर्माना
रांची। भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे को बड़ी राहत देते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने मोहनपुर थाना कांड संख्या 281/2024 में उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की पीड़क कार्रवाई पर अंतरिम रोक जारी रखी है। मंगलवार को जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत में इस मामले पर सुनवाई हुई, जिसमें राज्य सरकार द्वारा दोबारा समय मांगने पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए 2000 रुपये का जुर्माना लगाया।
क्या है मामला?
देवघर जिले के मोहनपुर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति द्वारा दर्ज प्राथमिकी में यह आरोप लगाया गया था कि वह बाजार में बैल की खरीदी-बिक्री का काम करता है। आरोप के मुताबिक, सांसद निशिकांत दुबे ने उसे बांग्लादेशी घुसपैठिया बताते हुए मारपीट की, और उसका बैल भगा दिया। बाद में उस व्यक्ति को पकड़कर पुलिस के हवाले भी कर दिया गया था।
इस मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के साथ चार्जशीट भी दायर कर दी थी। इसी FIR और चार्जशीट को सांसद दुबे ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसे निरस्त करने की मांग करते हुए उन्होंने अदालत में याचिका दायर की थी।
सांसद दुबे का पक्ष
सांसद डॉ. निशिकांत दुबे का कहना है कि मोहनपुर और आसपास के इलाकों में बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा गाय-बैल की अवैध तस्करी लंबे समय से होती रही है। उन्होंने बताया कि संदिग्ध परिस्थितियों में गतिविधि देखने के बाद उन्होंने कार्रवाई की थी। दुबे के अनुसार, मामले को राजनीतिक द्वेषवश तूल दिया गया और उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया।
उनकी दलील है कि प्राथमिकी और चार्जशीट दोनों ही तथ्यहीन और मनगढंत हैं, जिन्हें अदालत द्वारा रद्द किया जाना चाहिए।
राज्य सरकार को नोटिस, जवाब में देरी पर नाराज़ कोर्ट
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है और जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। इसके बावजूद सरकार ने मंगलवार की सुनवाई में एक बार फिर समय बढ़ाने का निवेदन किया।
अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि—
यह मामला पहले से लंबित है
सरकार बिना कारण समय मांगकर न्यायिक प्रक्रिया में देरी कर रही है
अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया है
इसी आधार पर 2000 रुपये के जुर्माने के आदेश के साथ अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने को अंतिम अवसर दिया गया।
पीड़क कार्रवाई पर रोक से राहत
अदालत ने स्पष्ट कहा कि अगली सुनवाई तक सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ:
गिरफ्तारी
जबरन कार्रवाई
किसी भी दंडात्मक प्रक्रिया
पर रोक रहेगी। यह आदेश दुबे के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है, क्योंकि मामला गंभीर आरोपों से जुड़ा है।
अगली सुनवाई में होगी मामले की विस्तृत पड़ताल
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अगली तारीख तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद अदालत याचिका पर आगे की सुनवाई करेगी और यह तय होगा कि FIR व चार्जशीट को निरस्त किया जाए या मामला ट्रायल में आगे बढ़े।










