ध्वजारोहण व शोभायात्रा ने देवघर को बनाया देवलोक, साधु-संतों व लोकनृत्यों ने मोहा मन

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देवघर ध्वजारोहण शोभायात्रा 2025

 

देवघर में ध्वजारोहण व भव्य शोभायात्रा के साथ अतिरुद्र महायज्ञ सह भागवत कथा की शुरुआत। साधु-संतों, लोकनृत्यों और झांकियों ने शहर को बना दिया देवलोक।

 

 

 

ध्वजारोहण व शोभायात्रा ने देवघर को बनाया देवलोक, साधु-संतों व लोकनृत्यों ने मोहा मन

 

देवघर। बाबा बैद्यनाथ धाम की पावन नगरी मंगलवार को अध्यात्म, संस्कृति और परंपरा के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। आगामी 26 नवंबर से 4 दिसंबर तक आरएल मैदान सर्राफ में आयोजित अतिरूद्र महायज्ञ सह भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के नगर निमंत्रण हेतु आज विशाल शोभायात्रा निकाली गई। ध्वजारोहण और शोभायात्रा का ऐसा भव्य नजारा देखने को मिला मानो स्वयं देवलोक देवघर की धरती पर उतर आया हो।

 

सुबह से ही शहर शंखध्वनि, मंत्रोच्चार और जयघोष से गुंजायमान रहा। हजारों श्रद्धालु, देशभर से आए संत-महात्मा, आकर्षक झांकियां और विभिन्न राज्यों की लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने देवघर को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।

 

 

 

 

कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच संपन्न हुआ ध्वजारोहण

 

प्रातःकाल ध्वजारोहण अनुष्ठान अत्यंत श्रद्धा व हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे मार्ग पर ड्रोन कैमरे लगाए गए थे। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी वॉकी-टॉकी के माध्यम से लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे।

 

भीड़ प्रबंधन, मार्ग-निर्देशन और यातायात व्यवस्था इतनी सुव्यवस्थित रही कि हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद किसी को असुविधा नहीं हुई। प्रशासन की तत्परता और अनुशासनात्मक व्यवस्था की हर ओर सराहना हुई।

 

 

 

 

संतों की दिव्य उपस्थिति—हर कदम पर श्रद्धा की ज्योति

 

शोभायात्रा की सबसे बड़ी विशेषता रही—देश-विदेश से पधारे संतों की भव्य उपस्थिति। शोभायात्रा के केंद्र में स्वयं स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज पैदल चलते नजर आए। मार्ग में श्रद्धालुओं ने फूलवर्षा, आरती और जयघोष से उनका स्वागत किया।

 

इस दिव्य यात्रा में शामिल प्रमुख संत-महात्मा—

 

महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद सरस्वती जी महाराज

 

स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती जी (गढ़मुक्तेश्वर)

 

स्वामी विवेकानंद सरस्वती जी (फिरोजाबाद)

 

प्रसिद्ध कथा व्यास पंडित रामाकांत मिश्र जी महाराज

 

दिल्ली के सरमन स्वामी

 

मैनपुरी के भाई दीक्षित

 

शोधकर्ता सूर्यकांत त्रिपाठी

 

अमेरिका से आए आध्यात्मिक शोधकर्ता संजीव चोपड़ा

 

 

संतों की यह विराट उपस्थिति शोभायात्रा को आध्यात्मिक महिमा से भरती रही। हर मोड़ पर संतों के दर्शन हेतु जनसैलाब उमड़ पड़ा।

 

 

 

लोकनृत्यों का अद्भुत संगम—पहली बार देवघर में मंचित हुआ अघोर नृत्य

 

शोभायात्रा की दूसरी विशेषता रही विविध लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियाँ।

 

प्रमुख प्रस्तुतियों में—

 

रावत यादव समाज का पारंपरिक अहीर नृत्य

 

छत्तीसगढ़ का ऊर्जा से भरपूर कर्मा नृत्य

 

उड़ीसा-बलांगीर के आदिवासी समुदाय की गंत पार्टी

 

बनारस का रहस्यमय अघोर नृत्य, जो पहली बार देवघर की धरती पर मंचित हुआ

 

 

अघोर नृत्य की प्रस्तुति शुरू होते ही हजारों की भीड़ मंत्रमुग्ध हो उठी। इन सभी प्रस्तुतियों ने शोभायात्रा को सांस्कृतिक भव्यता के शिखर पर पहुंचा दिया।

 

 

 

 

अद्भुत झांकियों ने किया देवत्व का साक्षात्कार

 

शोभायात्रा में निकली झांकियां इतनी जीवंत और भव्य थीं कि मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालु भाव-विभोर होते रहे। झांकियों में शामिल थीं—

 

नगर आमंत्रण की अग्रिम टीम

 

अनुशासित बुलेट सवार

 

महाराणा प्रताप के शौर्य का प्रतीक घुड़सवार दल

 

गणेश, ब्रह्मा, विष्णु, महादेव

 

इंद्र देव, राम दरबार, श्याम बाबा की जीवंत झांकियां

 

तांत्रिक स्वरूप और दिव्य प्रेत लीला की प्रस्तुतियाँ

 

 

झांकियों ने मानो मार्ग को देवलोक में परिवर्तित कर दिया।

 

 

 

गौशाला से यज्ञस्थल तक भव्य यात्रा—इतिहास में दर्ज होने वाला दिन

 

शोभायात्रा गौशाला से प्रारंभ होकर—

 

शिक्षा सभा चौक

 

मुख्य सड़क

 

आजाद चौक

 

टावर चौक

 

शिवलोक परिसर

 

बजरंगी चौक

 

 

से होते हुए सर्राफ स्कूल प्रांगण स्थित यज्ञस्थल पर पहुंची।

 

यहां गुरुजी हरिहरानंद सरस्वती जी का भव्य स्वागत किया गया। बाहर से आए कलाकारों ने यहां भी आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं।

 

कार्यक्रम के अंत में गुरुजी ने स्वयं प्रसाद वितरण किया, जिसे पाने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग गईं।

 

 

 

 

कल निकलेगी भव्य कलश यात्रा—1000 महिलाएं होंगी शामिल

 

26 नवंबर को सुबह 7:30 बजे गोपाल कृष्ण मंदिर (गीता देवी डीएवी स्कूल के पास) से भव्य कलश यात्रा निकलेगी। लगभग 1000 महिलाएं कलश लेकर यात्रा में शामिल होंगी।

 

मुख्य मार्गों से गुजरते हुए कलश यात्रा यज्ञस्थल पहुंचेगी, जहां—

 

पंचांग पूजन

 

देव आवाहन

 

अरणी मंथन द्वारा अग्नि प्रज्वलन

 

 

जैसी प्राचीन वैदिक परंपराएं निभाई जाएंगी।

 

दोपहर 3 बजे से भागवत कथा का शुभारंभ होगा।

 

 

 

 

सामाजिक संगठनों की रही महत्वपूर्ण भूमिका

 

शोभायात्रा की सफलता में अनेक सामाजिक संगठनों ने सक्रिय भूमिका निभाई। पूरे मार्ग में—

 

मार्कंडेय जज्वड़े उर्फ पुटरु जी,

 

सुनील अग्रवाल व उनकी टीम

 

 

लगातार सक्रिय रही।

 

मुख्य पदाधिकारियों में—

 

अध्यक्ष – विनोद कुमार सुल्तानिया

 

महामंत्री – रमेश कुमार बाजला

 

संयोजक – प्रेम कुमार सिंघानिया

 

मुख्य यजमान – राजेश सतनालीवाला

 

प्रचार-प्रसार प्रभारी – पंकज कुमार पचेरीवाला

 

गिरधारी अग्रवाल (बिलासपुर)

 

पवन गर्ग

 

अक्षत सिंघानिया

 

प्रत्युष सुल्तानिया

 

अभिषेक सिंघानिया

 

कृष्णा सुल्तानिया

 

 

सहित सैकड़ों सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। देश के कई राज्यों से आए हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक शोभायात्रा का हिस्सा बने।

 

 

 

 

जहां श्रद्धा होती है, वहां भव्यता स्वतः उतर आती है

 

देवघर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आस्था की भूमि पर भव्यता स्वयं अवतरित होती है। ध्वजारोहण और शोभायात्रा ने न केवल अध्यात्म का संदेश दिया, बल्कि देवघर की सांस्कृतिक विरासत को भी गौरवान्वित किया।

 

इस ऐतिहासिक आयोजन ने देवघर की पहचान—धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के मिलनबिंदु—को और अधिक उजागर कर दिया।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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