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देवघर सदर अस्पताल में दलालों पर बड़ी कार्रवाई, महिला दलाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज | डॉ. सुषमा वर्मा सख्त
देवघर सदर अस्पताल में दलालों की सक्रियता पर अस्पताल प्रशासन की बड़ी कार्रवाई। उपाधीक्षक डॉ. सुषमा वर्मा ने वीडियो और फोटो के आधार पर एक महिला दलाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। जानिए पूरा मामला।
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देवघर सदर अस्पताल में दलालों पर बड़ा शिकंजा, महिला दलाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज
‘डॉक्टर मस्त, अधिकारी बेखबर और मरीज बेहाल’ खबर के बाद हरकत में आया अस्पताल प्रशासन, वीडियो और फोटो के आधार पर हुई कार्रवाई

सुनील झा : देवघर : 10.07.2026
देवघर। देवघर सदर अस्पताल में लंबे समय से मरीजों और उनके परिजनों को परेशान करने वाले दलालों के खिलाफ आखिरकार अस्पताल प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और दलालों की सक्रियता को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. सुषमा वर्मा ने नगर थाना में आवेदन देकर एक महिला दलाल के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई है। अस्पताल प्रशासन की इस कार्रवाई को व्यवस्था सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उपाधीक्षक द्वारा दिए गए आवेदन में कहा गया है कि सदर अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर, महिला ओपीडी और लेबर रूम के आसपास एक महिला मरीजों और उनके परिजनों को गुमराह करते हुए दलाली का कार्य कर रही थी। उपलब्ध वीडियो और फोटोग्राफ के आधार पर उसकी पहचान की गई, जिसके बाद नगर थाना पुलिस से उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के साथ किसी भी प्रकार की दलाली या अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों के खिलाफ आगे भी इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी।
मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद सक्रिय हुआ अस्पताल प्रशासन
शुक्रवार को “डॉक्टर मस्त, अधिकारी बेखबर और मरीज बेहाल” शीर्षक से प्रकाशित समाचार में सदर अस्पताल की कई गंभीर अव्यवस्थाओं को उजागर किया गया था। खबर में रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लंबी कतार, मरीजों की परेशानी, दलालों की सक्रियता तथा अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
समाचार के प्रकाशन के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान अस्पताल परिसर में सक्रिय महिला दलाल की पहचान वीडियो और फोटो के माध्यम से की गई, जिसके आधार पर नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
अस्पताल प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अस्पताल परिसर में सक्रिय दलालों, विशेषकर महिला दलालों के बीच हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है।
रजिस्ट्रेशन काउंटर और महिला ओपीडी के आसपास रहती थी सक्रियता
अस्पताल प्रशासन के अनुसार संबंधित महिला रजिस्ट्रेशन काउंटर, महिला ओपीडी तथा लेबर रूम के आसपास मरीजों और उनके परिजनों से संपर्क कर उन्हें गुमराह करने का प्रयास करती थी। इससे न केवल मरीजों को परेशानी होती थी बल्कि अस्पताल की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही थी।
प्रशासन का मानना है कि ऐसे तत्व सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है, ताकि मरीजों को बिना किसी बाधा के सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सके।

डॉक्टर की अनुपस्थिति भी बनी चर्चा का विषय
इसी समाचार में मेडिसिन ओपीडी में कार्यरत महिला चिकित्सक डॉ. अर्चना कुमारी की ड्यूटी को लेकर भी सवाल उठे थे। आरोप था कि वह लगभग दो घंटे तक अपने निर्धारित ड्यूटी स्थल पर मौजूद नहीं थीं। इस दौरान इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
मरीजों द्वारा विरोध जताने के बावजूद स्थिति में तत्काल सुधार नहीं हुआ। कई मरीज बिना चिकित्सकीय परामर्श के ही वापस लौट गए। इस घटना की शिकायत अस्पताल प्रशासन तक भी पहुंची थी।
सिविल सर्जन ने जांच कर कार्रवाई का दिया आश्वासन
पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने कहा था कि अस्पताल में सामने आई शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी चिकित्सक, कर्मचारी अथवा अन्य व्यक्ति की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब महिला दलाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद माना जा रहा है कि अस्पताल प्रशासन अस्पताल परिसर को दलाल मुक्त बनाने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है।
मरीजों के हितों से समझौता नहीं : अस्पताल प्रशासन
उपाधीक्षक डॉ. सुषमा वर्मा ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल आने वाले मरीजों के हित सर्वोपरि हैं। किसी भी दलाल, बिचौलिए या अवैध गतिविधि में शामिल व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अस्पताल परिसर की निगरानी और अधिक सख्त की जाएगी तथा भविष्य में भी इस तरह की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई होगी।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि दलालों पर प्रभावी कार्रवाई से मरीजों का सरकारी अस्पतालों पर विश्वास मजबूत होगा और स्वास्थ्य सेवाएं अधिक पारदर्शी बनेंगी।
प्रश्न 1. महिला दलाल के खिलाफ एफआईआर किसने दर्ज कराई?
उत्तर: सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. सुषमा वर्मा ने नगर थाना में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई।
प्रश्न 2. महिला दलाल की पहचान कैसे हुई?
उत्तर: अस्पताल प्रशासन ने वीडियो और फोटोग्राफ के आधार पर महिला की पहचान की।
प्रश्न 3. दलाली की शिकायत अस्पताल के किस हिस्से से थी?
उत्तर: रजिस्ट्रेशन काउंटर, महिला ओपीडी और लेबर रूम के आसपास दलाली की शिकायत मिली थी।
प्रश्न 4. अस्पताल प्रशासन ने कार्रवाई क्यों की?
उत्तर: मरीजों और उनके परिजनों को गुमराह करने तथा अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायतों के बाद कार्रवाई की गई।
प्रश्न 5. डॉक्टर की अनुपस्थिति का मामला क्या था?
उत्तर: मेडिसिन ओपीडी की एक चिकित्सक के करीब दो घंटे तक ड्यूटी पर नहीं रहने की शिकायत सामने आई थी, जिसकी जांच की बात कही गई है।
प्रश्न 6. सिविल सर्जन ने क्या कहा?
उत्तर: सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि सभी शिकायतों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्न 7. क्या आगे भी दलालों के खिलाफ अभियान चलेगा?
उत्तर: अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी दलाली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
निष्कर्ष
देवघर सदर अस्पताल में महिला दलाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होना अस्पताल परिसर में फैली अव्यवस्था पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि केवल दलालों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। अस्पताल में समय पर चिकित्सकों की उपलब्धता, पारदर्शी कार्यप्रणाली, मरीजों के साथ बेहतर व्यवहार और नियमित निगरानी भी उतनी ही आवश्यक है। यदि प्रशासन इन सभी पहलुओं पर समान रूप से ध्यान देता है, तो सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में आम लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।









