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देवघर सदर अस्पताल में जापानी इंसेफेलाइटिस और एईएस पर जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित हुई। सिविल सर्जन डॉ रमेश कुमार ने मच्छरों से बचाव और बच्चों की सुरक्षा को लेकर अहम निर्देश दिए।
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मच्छर छोटी बीमारी नहीं, जानलेवा खतरे का संकेत: डॉ रमेश कुमार
देवघर सदर अस्पताल में जापानी इंसेफेलाइटिस पर जिला स्तरीय कार्यशाला, स्वास्थ्य कर्मियों को दिए गए बचाव और रोकथाम के विशेष निर्देश
संवाददाता | देवघर | 22 मई 2026

सदर अस्पताल सभागार में आयोजित जापानी इंसेफेलाइटिस एवं एईएस कार्यशाला में उपस्थित स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मी।
देवघर में बढ़ते मच्छरजनित रोगों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता और जागरूकता अभियान को तेज कर दिया है। शुक्रवार को सदर अस्पताल सभागार में राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीबीडीसीपी) के तहत जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) एवं एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) विषय पर जिला स्तरीय एक दिवसीय रिओरिएंटेशन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रमेश कुमार ने की।
कार्यशाला में जिले भर से आए स्वास्थ्य कर्मियों, एएनएम, सहिया, एमपीडब्ल्यू, बीटीटी और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी के लक्षण, रोकथाम, बचाव और समय पर उपचार के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मच्छरों को सामान्य समस्या समझने की गलती अब जानलेवा साबित हो सकती है।
“सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव” : डॉ रमेश कुमार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ रमेश कुमार ने कहा कि जापानी इंसेफेलाइटिस बेहद खतरनाक मच्छरजनित बीमारी है, जो खासकर बच्चों को तेजी से प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में पशु, पक्षी और इंसान एक साथ रहते हैं, वहां इस बीमारी का खतरा अधिक बढ़ जाता है।
उन्होंने विशेष रूप से लोगों से अपील की कि सुअरों को घरों और रिहायशी इलाकों से दूर रखें, क्योंकि संक्रमित सूअर इस बीमारी के संक्रमण चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और जलजमाव पर नियंत्रण बेहद जरूरी है। यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो बीमारी तेजी से फैल सकती है।
डॉ रमेश कुमार ने कहा कि मच्छर केवल डेंगू या मलेरिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी जानलेवा बीमारी भी फैला सकते हैं। इसलिए हर परिवार को मच्छरों से बचाव को अपनी दैनिक आदत में शामिल करना चाहिए।
बच्चों पर सबसे अधिक खतरा
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ अभय कुमार यादव ने बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस मुख्य रूप से एक वर्ष से 15 वर्ष तक के बच्चों को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि यह वायरस जनित बीमारी मस्तिष्क को प्रभावित करती है और कई मामलों में मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है।
उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर हर वर्ष हजारों लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं। कई मरीज इलाज के बाद भी शारीरिक या मानसिक विकलांगता का शिकार हो जाते हैं। इसलिए बीमारी की शुरुआती पहचान और त्वरित इलाज बेहद आवश्यक है।
धान के खेत और तालाब बन रहे मच्छरों के प्रजनन केंद्र
कार्यशाला में बताया गया कि जापानी इंसेफेलाइटिस फैलाने वाले क्यूलेक्स ट्रिटेनिओरहिन्कस एवं क्यूलेक्स विश्नोई प्रजाति के मच्छर मुख्य रूप से धान के खेतों, तालाबों और जमे हुए पानी में पनपते हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जलजमाव बीमारी के प्रसार का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है।
मच्छरों की रोकथाम के लिए जलजमाव वाले स्थानों पर नीम की सूखी पत्तियां डालने या जला हुआ मोबिल डालने की सलाह दी गई। साथ ही लोगों से अपने घरों के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने और पानी जमा नहीं होने देने की अपील की गई।
पीपीटी प्रस्तुति के जरिए दी गई बीमारी की विस्तृत जानकारी
चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शब्दकांत मिश्रा ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों को बीमारी के लक्षण, उपचार और रोकथाम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तेज बुखार, लगातार सिरदर्द, उल्टी, शरीर में कंपन्न, बेहोशी और मिर्गी जैसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई बार लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है।
समुदाय आधारित जागरूकता अभियान पर जोर
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार डॉ गणेश कुमार यादव ने मच्छरों के प्रकार, उनके प्रजनन स्थल और संक्रमण चक्र की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीमारी की रोकथाम केवल अस्पतालों से संभव नहीं है, बल्कि समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि गांव-गांव जाकर लोगों को मच्छरों से बचाव के उपाय समझाने, रोगी खोज अभियान चलाने और प्रभावी सर्विलांस प्रणाली विकसित करने से बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
ऑनलाइन रिपोर्टिंग और सर्विलांस सिस्टम पर प्रशिक्षण
जिला एपीडेमियोलॉजिस्ट-आईडीएसपी डॉ मनीष शेखर ने संभावित रोगियों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग प्रक्रिया और पोर्टल संचालन की जानकारी दी। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को बताया कि संदिग्ध मरीजों की जानकारी समय पर पोर्टल पर अपलोड करना बेहद जरूरी है, ताकि संक्रमण फैलने से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
उन्होंने कहा कि डिजिटल सर्विलांस सिस्टम के माध्यम से बीमारी की मॉनिटरिंग और नियंत्रण अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें : स्वास्थ्य विभाग
कार्यशाला के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को अंधविश्वास से बचने की सलाह भी दी। अधिकारियों ने कहा कि यदि बच्चों में बेहोशी, मिर्गी या तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो झाड़-फूंक या ओझा-गुणी के चक्कर में समय बर्बाद न करें।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी सलाह दी कि बेहोशी की स्थिति में मरीज के मुंह में जबरन कुछ न डालें और गर्दन झुकाकर न रखें।
54 स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण
कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न पदाधिकारियों, एएनएम, सहिया, सहिया साथी, एमपीडब्ल्यू, बीटीटी सहित कुल 54 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में उपाधीक्षक डॉ सुष्मा वर्मा, पिरामल फाउंडेशन के जिला प्रोग्राम लीड अभिषेक कात्यायन समेत कई अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।
निष्कर्ष
देवघर में आयोजित यह कार्यशाला केवल स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम लोगों को जागरूक करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हुई। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी से लड़ने के लिए केवल दवा नहीं, बल्कि जागरूकता, स्वच्छता और समय पर इलाज सबसे बड़ा हथियार है। मच्छरों को छोटी समस्या समझने की भूल अब भारी पड़ सकती है, इसलिए हर व्यक्ति को सतर्क रहना जरूरी है।
Q1. जापानी इंसेफेलाइटिस क्या है?
A. यह एक गंभीर वायरस जनित मच्छरजनित बीमारी है, जिसे मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है।
Q2. यह बीमारी सबसे अधिक किन लोगों को प्रभावित करती है?
A. यह बीमारी मुख्य रूप से एक से 15 वर्ष तक के बच्चों को प्रभावित करती है।
Q3. जापानी इंसेफेलाइटिस फैलाने वाले मच्छर कहां पनपते हैं?
A. ये मच्छर धान के खेतों, तालाबों और जमे हुए पानी में पनपते हैं।
Q4. बीमारी के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
A. तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी, कंपन्न और मिर्गी जैसे लक्षण इसके प्रमुख संकेत हैं।
Q5. बीमारी से बचाव के लिए क्या करना चाहिए?
A. घर और आसपास साफ-सफाई रखें, जलजमाव न होने दें, मच्छरों से बचाव करें और लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाएं।










