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देवघर नगर निगम के वार्ड 30 पार्षद गोपी कुमार गुप्ता ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तहत सोशल मीडिया पर छवि धूमिल करने की साजिश का आरोप लगाया। नाला सफाई, स्लैब तोड़ने और वायरल वीडियो को लेकर उठाया बड़ा सवाल।
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वार्ड 30 में नाला विवाद पर बढ़ी सियासत, पार्षद गोपी गुप्ता ने लगाया छवि धूमिल करने की साजिश का आरोप
“राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में सोशल मीडिया के जरिए फैलाया गया भ्रम”, नगर आयुक्त को सौंपा तीन पन्नों का विस्तृत पत्र
सुनील झा | देवघर | 21 मई 2026



वार्ड 30 पार्षद गोपी कुमार गुप्ता द्वारा नगर आयुक्त को सौंपे गए पत्र की तस्वीर
देवघर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 30 में नाला सफाई और स्लैब तोड़े जाने के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। वार्ड पार्षद गोपी कुमार गुप्ता ने नगर आयुक्त को विस्तृत पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण उनकी छवि धूमिल करने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल किए गए वीडियो और पोस्ट वास्तविक तथ्यों से परे हैं तथा जनता और प्रशासन को गुमराह करने के उद्देश्य से प्रसारित किए गए।
पार्षद द्वारा नगर आयुक्त को दिए गए तीन पृष्ठों के पत्र में पूरे घटनाक्रम का क्रमवार उल्लेख किया गया है। पत्र में बताया गया कि 12 मई 2026 को व्हाट्सएप ग्रुप “अपना वार्ड आदर्श वार्ड” में वार्ड क्षेत्र के कुछ लोगों द्वारा सूचना दी गई थी कि सदर अस्पताल रोड स्थित अभय चंद्र झा के आवास के पास नाले का पानी घर और सड़क पर बह रहा है। मामले की जानकारी मिलने के बाद तत्काल सफाईकर्मियों को मौके पर भेजा गया।
नाला जाम होने के कारण बनी थी समस्या
पत्र में कहा गया है कि वार्ड जमादार और सफाईकर्मियों ने पहले मैनुअल तरीके से नाले की सफाई करने का प्रयास किया। हालांकि काफी मशक्कत के बावजूद जब नाला पूरी तरह साफ नहीं हो पाया तो स्थानीय लोगों की सलाह पर नाले के स्लैब को तोड़कर अंदर जमा गंदगी निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में जेसीबी मशीन की सहायता से नाले की सफाई कर पानी के बहाव को सामान्य किया गया।
गोपी कुमार गुप्ता ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि नाले के स्लैब को तोड़ने का फैसला मजबूरी में लिया गया, क्योंकि उसके अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्य का उद्देश्य केवल आम लोगों को जलजमाव और गंदगी की समस्या से राहत दिलाना था।
“वीडियो बनाकर गलत तस्वीर पेश की गई”
पार्षद ने आरोप लगाया कि निकाय चुनाव 2026 में उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे कुंदन कुमार वर्मा उर्फ फ्रिज मिस्त्री द्वारा इस पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया गया। पत्र में कहा गया है कि चुनाव में हार के बाद से लगातार उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि सफाई कार्य के दौरान नाले से निकाले गए मलबे के एक हिस्से को सड़क किनारे दिखाकर वीडियो तैयार किया गया और ऐसा प्रचारित किया गया मानो पूरी सड़क कचरे और मलबे से भर गई हो। जबकि वास्तविकता यह थी कि सड़क की चौड़ाई लगभग 30 फीट से अधिक थी और यातायात सामान्य रूप से संचालित हो रहा था।
गोपी गुप्ता ने कहा कि उक्त वीडियो को सोशल मीडिया और महापौर तक भेजकर प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास किया गया। उन्होंने इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कदम बताया।
स्थानीय लोगों का भी लिया गया जिक्र
पत्र में पार्षद ने यह भी उल्लेख किया है कि आसपास रहने वाले कई स्थानीय लोगों ने नाला सफाई को लेकर किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। उन्होंने अभय चंद्र झा, संजय मिश्रा, संजय झा, आशीष झा और सोमा मुखर्जी सहित कई स्थानीय नागरिकों के नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों ने समस्या के समाधान पर संतोष व्यक्त किया था।
पत्र के अनुसार, नाले की सफाई के बाद सोमा मुखर्जी ने महापौर को धन्यवाद भी दिया और पार्षद को भी आभार प्रकट किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर सफाई कार्य को सकारात्मक रूप से देखा गया था।
महापौर के निर्देश पर भी उठाए सवाल
गोपी कुमार गुप्ता ने पत्र में यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के आधार पर महापौर द्वारा कनीय अभियंता को यह निर्देश देना कि “वार्ड 30 में नाले का ढक्कन तोड़ दिया गया है और मलबा सड़क पर पड़ा है”, वास्तविक तथ्यों से परे था। उन्होंने कहा कि बिना पूरी जांच के ऐसी टिप्पणी से निगम की कार्यशैली और जनप्रतिनिधियों की छवि प्रभावित होती है।
उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने मांग की कि भविष्य में किसी भी मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही प्रशासनिक टिप्पणी की जाए।
“बदनामी करने वालों पर हो FIR”
पत्र में सबसे गंभीर मांग करते हुए पार्षद ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से गलत, भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित कर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई है। उन्होंने नगर आयुक्त से अनुरोध किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत सूचना फैलाने में शामिल पाया जाए तो उसके खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
उन्होंने लिखा कि “इसमें जो लोग भी शामिल हैं, उन पर तुरंत FIR कार्रवाई होनी चाहिए।” पार्षद का कहना है कि इससे न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि प्रभावित हुई बल्कि निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी जनता के बीच भ्रम पैदा हुआ।
वार्ड पार्षद ने की नई व्यवस्था की मांग
गोपी कुमार गुप्ता ने नगर आयुक्त से यह भी अनुरोध किया कि भविष्य में नगर निगम क्षेत्र में किसी वार्ड में सफाई, तोड़फोड़ या निर्माण से जुड़ा कोई बड़ा कार्य कराया जाए तो संबंधित वार्ड पार्षद को उसकी पूर्व सूचना आधिकारिक रूप से दी जाए। उनका कहना है कि इससे समन्वय बेहतर होगा और विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि कई बार बिना सूचना के कार्रवाई होने पर जनता में भ्रम की स्थिति बन जाती है और विपक्षी लोग इसका राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास करते हैं।
नगर निगम राजनीति में फिर बढ़ी हलचल
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद देवघर नगर निगम की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। एक पक्ष इसे जनहित में किया गया सफाई अभियान बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे निगम की लापरवाही और अव्यवस्था का उदाहरण बता रहा है।
हालांकि अभी तक नगर निगम प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन पार्षद द्वारा नगर आयुक्त को सौंपे गए विस्तृत पत्र ने पूरे मामले को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।
निष्कर्ष
देवघर नगर निगम के वार्ड 30 में नाला सफाई को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। पार्षद गोपी कुमार गुप्ता द्वारा नगर आयुक्त को सौंपे गए पत्र में जहां खुद को साजिश का शिकार बताया गया है, वहीं सोशल मीडिया पर फैलाई गई सूचनाओं की निष्पक्ष जांच और FIR की मांग ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब सबकी नजर नगर निगम प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।
Q1. वार्ड 30 विवाद किस मामले को लेकर है?
A. वार्ड 30 में नाला सफाई और स्लैब तोड़े जाने को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो बाद में सोशल मीडिया और राजनीतिक आरोपों तक पहुंच गया।
Q2. पार्षद गोपी कुमार गुप्ता ने क्या आरोप लगाए हैं?
A. उन्होंने आरोप लगाया है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तहत सोशल मीडिया पर गलत वीडियो और जानकारी फैलाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई।
Q3. नाले का स्लैब क्यों तोड़ा गया था?
A. पत्र के अनुसार, नाला पूरी तरह जाम था और मैनुअल सफाई असफल होने के बाद मजबूरी में स्लैब तोड़कर सफाई करनी पड़ी।
Q4. पार्षद ने प्रशासन से क्या मांग की है?
A. उन्होंने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर FIR और भविष्य में वार्ड स्तर के कार्यों की पूर्व सूचना देने की मांग की है।
Q5. क्या नगर निगम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है?
A. फिलहाल इस मामले पर नगर निगम प्रशासन की ओर से कोई सार्वजनिक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।










