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अति रुद्र महायज्ञ देवघर: आठवें दिन कृष्ण–सुदामा मिलाप व जरासंध वध आकर्षण
देवघर में अति रुद्र महायज्ञ के आठवें दिन कृष्ण–सुदामा मिलाप, जरासंध वध, संत प्रवचन और भक्ति की अद्भुत छटा देखने को मिली। कल होगा महायज्ञ का समापन।
अति रुद्र महायज्ञ देवघर
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भागवत कथा देवघर
देवघर धार्मिक कार्यक्रम
वैदिक महायज्ञ 2025
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अति रुद्र महायज्ञ देवघर का आठवां दिन: कृष्ण–सुदामा मिलाप व जरासंध वध बना मुख्य आकर्षण, उमड़ी आस्था की अविरल धारा | आज होगा नौ दिवसीय महायज्ञ का समापन
रिपोर्ट: सुनील झा, देवघर
देवी संपत मंडल के तत्वावधान में बाबानगरी देवघर में आयोजित नौ दिवसीय अति रुद्र महायज्ञ सह श्रीमद् भागवत कथा के आठवें दिन बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
आरएल सर्राफ स्कूल मैदान सुबह से ही वैदिक ध्वनियों, मंत्रोच्चार और 108 हवन-कुंडों की हवि–सुगंध से गूंज उठा। पूरा परिसर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो देवभूमि धरती पर उतर आई हो।
भक्तजन ‘हर हर महादेव’, ‘जय श्रीराम’, ‘राधे–राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारों से वातावरण को पवित्र करते दिखे। महिलाओं की पारंपरिक उपस्थिति, पूजा-थालियों की सजावट और भजन-कीर्तन ने कार्यक्रम को दिव्यता प्रदान की।
108 हवन कुंडों में आहुतियों से गूंजा परिसर
वैदिक विधि-विधान से दिन की शुरुआत हुई। ब्राह्मणों और वैदिक विद्वानों ने आहुति प्रदान कर वैदिक ऋषि–परंपरा को जीवंत किया। धूप, धुएं और मंत्रों ने श्रद्धालुओं को गहन आध्यात्मिक अनुभूति दी।

देशभर के संतों की गरिमामयी उपस्थिति
महायज्ञ में देशभर से आए कई प्रमुख संत-महात्माओं ने भाग लिया, जिनमें—
आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 108 विशेश्वरानंद भारती जी
स्वामी चिन्मयानंद जी महाराज (पूर्व केंद्रीय मंत्री)
महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी महाराज
स्वामी राम भूषण दास जी महाराज
स्वामी इंद्ररामण जी महाराज
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज
स्वामी शक्तिशरणनंद सरस्वती (चंचल बाबा)
स्वामी आनंद चैतन्य जी महाराज
स्वामी पंचमानंद जी महाराज
स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज
सभी संतों ने धर्म, सत्य, सेवा, भक्ति और मानवता के महत्व पर प्रवचन दिए।
कल पूर्ण होगा स्वामी शारदानंद का संकल्प—देवघर रचेगा धार्मिक इतिहास
गुरुवार को अति रुद्र महायज्ञ अपने चरम पर पहुँचेगा।
स्वामी शारदानंद जी महाराज के महान संकल्प को उनके शिष्य स्वामी हरिहरानंद सरस्वती पूर्ण करेंगे।
उन्होंने इसे बाबा बैद्यनाथ की कृपा बताते हुए कहा—
“यह संगम आने वाले युगों तक याद रखा जाएगा।”
देव दर्शन से सद्गुरुदेव दर्शन होता है — आचार्य शुभेष शर्मा
आचार्य शुभेष शर्मा ने बताया कि
अति रुद्र महायज्ञ पूर्णता की ओर अग्रसर है
कल होगी पूर्णाहुति
श्रीमद् भागवत कथा का भी समापन होगा
उन्होंने कहा—
“देव दर्शन के पुण्य से सद्गुरुदेव का दर्शन होता है और सद्गुरु के निर्देशन से महादेव का दर्शन मिलता है।”

सांध्यकालीन कार्यक्रम में राष्ट्रवादी संदेश
शाम 7 बजे के सांस्कृतिक कार्यक्रम में बाबा सत्यनारायण मौर्य ने राष्ट्रवादी संदेश देते हुए कहा—
“राष्ट्रीय एकता और अखंडता ही सनातन संस्कृति की मूल शक्ति है।”
उनके उद्बोधन पर बार–बार तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही।
महिलाओं की अद्भुत भागीदारी बनी कार्यक्रम की शोभा
सुहाग की लाल रेखा
पूजा की थालियाँ
पारंपरिक वेश
समूह नृत्य और भजन
इन सबने महायज्ञ परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
अति रुद्र महायज्ञ—देवघर का आध्यात्मिक केंद्र
देवघर इन दिनों पूर्णतः धार्मिक माहौल में डूबा हुआ है।
हर ओर
✔ मंदिरों की घंटियाँ
✔ भजन
✔ पूजन-अभिषेक
✔ श्रद्धालुओं की भीड़
एक अनूठा दिव्य अनुभव प्रदान कर रहे हैं।
कृष्ण–सुदामा मिलाप और जरासंध वध ने मोहा मन
कथा वाचक पंडित रामाकांत मिश्र ने
कृष्ण–सुदामा मिलाप
जरासंध वध
के पावन प्रसंगों का दिव्य वर्णन किया।
यज्ञ परिषद “राधे–राधे”, “हरे कृष्णा”, “जय श्री राधे” से गूंज उठा।
सेवा का अद्भुत दृश्य — सतनाली वाला भवन चमका भक्ति से
नौ दिनों से लगातार महाप्रसाद वितरण में
✔ भक्त
✔ यजमान
✔ स्वयंसेवक
सब सेवा-भाव में डूबे दिखे।
सतनाली वाला भवन में हजारों श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।
सनातन धर्म की रक्षा की जिम्मेवारी हम सभी की — स्वामी हरिहरानंद
स्वामी हरिहरानंद सरस्वती ने कहा—
“सनातन धर्म की रक्षा और संरक्षण हम सभी संतों का कर्तव्य है।
गुरुदेव का संकल्प कल पूर्ण होगा — यही सबसे बड़ा सौभाग्य है।”
आयोजन समिति—सफलता के स्तंभ
मुख्य योगदानकर्ता:
डॉ. गिरधारी अग्रवाल
प्रेम कुमार सिंघानिया
राजेश सतनालीवाला
विनोद कुमार सुल्तानिया
रमेश कुमार बाजला
सीए गोपाल चौधरी
पंकज पचेरीवाला
रोहित सुल्तानिया
बजरंग बथवाल
अक्षत सिंघानिया
प्रत्यूष सुल्तानिया
सुनील मोदी
हरीश तोलासरिया
कृष्ण सुल्तानिया
रेनू सिंघानिया
आदि।
डॉ. अग्रवाल ने कहा—
“अति रुद्र महायज्ञ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता व विश्व-शांति का संदेश है।”

कल (गुरुवार) का मुख्य कार्यक्रम
सुबह परिक्रमा एवं आहुतियाँ
भागवत कथा — 10:00 बजे
संतों का आशीर्वचन — 11:30 बजे
पूर्णाहुति — 12:00 बजे









