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बाबा सत्यनारायण मौर्य ने दी राष्ट्रीय एकता व सनातन संस्कृति की सीख
देवघर अति रुद्र महायज्ञ में बाबा सत्यनारायण मौर्य ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव व सनातन संस्कृति संरक्षण का संदेश दिया। श्रद्धालुओं में उत्साह उमड़ा।
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अति रुद्र महायज्ञ में संबोधित करते बाबा सत्यनारायण मौर्य – देवघर
बाबा सत्यनारायण मौर्य ने दिया राष्ट्रीय एकता और सनातन संस्कृति का संदेश
देवघर। बाबा बैद्यनाथधाम की पवित्र व आध्यात्मिक भूमि पर आयोजित नौ दिवसीय अति रुद्र महायज्ञ के आठवें दिन बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक गौरव का दुर्लभ संगम देखने को मिला। इस अवसर पर विख्यात संत बाबा सत्यनारायण मौर्य ने अपने प्रेरणादायी संबोधन से न सिर्फ श्रद्धालुओं को अभिभूत किया, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रभावशाली संदेश भी दिया।
जैसे ही बाबा सत्यनारायण मौर्य मंच पर पहुंचे, पूरा पंडाल जयघोष से गूंज उठा। अपने विशेष और सरल अंदाज में उन्होंने उपस्थित संत–महात्माओं और हजारों भक्तों का अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने मंच पर ही भारत माता का सुंदर चित्र बनाकर उसमें रंग भरे। इस अनूठी प्रस्तुति ने सभी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया और वातावरण में देशभक्ति की ऊर्जा भर दी।
कृष्ण–सुदामा मिलाप और जरासंध वद्ध बना आकर्षण
अति रुद्र महायज्ञ के आठवें दिन धार्मिक प्रस्तुतियों में कृष्ण–सुदामा मिलाप, जरासंध वद्ध और अन्य आध्यात्मिक झांकियों ने सभी का मन मोह लिया। मंचन की भव्यता और पात्रों की उत्कृष्ट प्रस्तुति ने पूरे परिसर को देवत्वमय बना दिया। इन कार्यक्रमों के बीच बाबा सत्यनारायण मौर्य का आध्यात्मिक संदेश कार्यक्रम का मुख्य केंद्र रहा।
सनातन संस्कृति जीवन का मार्गदर्शक — बाबा मौर्य
अपने विस्तृत उद्बोधन में बाबा सत्यनारायण मौर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल परंपरा या धार्मिक अनुष्ठानों का समूह नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला शाश्वत मार्ग है।
उन्होंने कहा—
“सनातन संस्कृति केवल धर्म नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, करुणा, सद्भाव, कर्तव्य और संस्कृति का वह अथाह सागर है जिसने हजारों वर्षों से भारत को विश्वगुरु बनाया है।”
उन्होंने अपने वक्तव्य में विशेष रूप से युवाओं पर जोर देते हुए कहा कि आज का युवा यदि अपने संस्कारों, धर्मग्रंथों, गुरुवचन और आध्यात्मिक धरोहरों से जुड़ेगा, तभी भारत अपनी वास्तविक शक्तियों को प्राप्त कर सकेगा।
कंधार–अफगानिस्तान को बताया भारत का प्राचीन हिस्सा
बाबा मौर्य ने इतिहास और संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि कंधार, अफगानिस्तान और भारत के कई प्राचीन भू-भाग सांस्कृतिक रूप से भारत माता का ही विस्तार रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों की संस्कृति, वास्तुकला, रीति-रिवाज और भाषा में आज भी प्राचीन भारतीयता के स्पष्ट चिन्ह दिखाई देते हैं।
राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव पर जोर
अपने प्रवचन में बाबा मौर्य ने कहा कि राष्ट्र की शक्ति उसके नागरिकों की एकता से बनती है। उन्होंने कहा कि मत, विचार और परंपराओं का भिन्न होना स्वाभाविक है, परंतु भारत प्रेम सबसे ऊपर है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि समाज में समरसता, सद्भाव और सहयोग का वातावरण बनाएँ, जिससे राष्ट्र मजबूत बने और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत मिले।
बाबा मौर्य ने संत समाज की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि संत, समाज और संस्कृति के बीच सेतु का कार्य करते हैं। उनका कर्तव्य है कि वे राष्ट्र को जोड़ने वाले संदेश जन-जन तक पहुँचाएँ।
श्रद्धालुओं की उमड़ पड़ी भीड़, जयघोष से गूंज उठा पंडाल
बाबा सत्यनारायण मौर्य के प्रवचन के दौरान हजारों श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर बैठे रहे। बीच-बीच में “जय श्रीराम”, “हर हर महादेव” और “भारत माता की जय” के नारों से वातावरण गूंजता रहा।
बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों सभी ने बाबा मौर्य के संदेश की सराहना की और कहा कि उनके शब्द सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणा देने वाले हैं।
महायज्ञ स्थल पर अद्भुत व्यवस्था
देवि संपत मंडल के तत्वावधान में चल रहे इस महायज्ञ में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। यज्ञ मंडप में 108 हवन कुंड, सुगठित व्यवस्था, भजन-कीर्तन, प्रवचन और झांकियों ने पूरे महायज्ञ को आध्यात्मिक उत्सव का रूप दे दिया है।
आयोजकों ने बताया कि बाबा सत्यनारायण मौर्य जैसे प्रेरक संतों की उपस्थिति से यज्ञ और भी पवित्र और प्रभावशाली हो रहा है।
कार्यक्रम जारी, समापन आज
महायज्ञ का समापन बुधवार रात को होगा, जबकि बाबा सत्यनारायण मौर्य का कार्यक्रम देर शाम तक जारी रहेगा। उनके उद्बोधन और आशीर्वचन को सुनने के लिए भक्तों में अपार उत्साह देखा जा रहा है।










