राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर युवा प्रबोधन सम्मेलन आयोजित

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देवघर के आरएसएस कार्यालय में आयोजित युवा प्रबोधन सम्मेलन में राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने युवाओं से अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

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राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर युवा प्रबोधन सम्मेलन आयोजित

आरएसएस कार्यालय में जुटे बुद्धिजीवी और युवा, सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का दिया संदे

संवाददाता | देवघर | 24 मई 2026

देवघर स्थित स्थानीय आरएसएस कार्यालय में रविवार को “राष्ट्र निर्माण में युवा की भूमिका” विषय पर युवा प्रबोधन सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, चिकित्सकों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान समाज और राष्ट्र के विकास में युवाओं की भूमिका, उनकी जिम्मेदारियों और वर्तमान समय की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं को सकारात्मक सोच, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के कार्यों के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इसके बाद वक्ताओं ने युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी की सोच और कार्यशैली पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे युवा देश के लिए यह आवश्यक है कि युवा केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझें।

सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि आज का समय अवसरों और चुनौतियों दोनों का दौर है। एक ओर तकनीक और डिजिटल माध्यमों ने युवाओं के सामने नई संभावनाएं खोली हैं, वहीं दूसरी ओर भटकाव, नशाखोरी, सामाजिक असंतुलन और नकारात्मक सोच जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में युवाओं को सही दिशा में अपनी ऊर्जा और क्षमता का उपयोग करने की जरूरत है।

वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसका उद्देश्य अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य और समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना भी होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। साथ ही समाज में फैली कुरीतियों और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।

सम्मेलन के दौरान सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज तभी मजबूत बन सकता है, जब युवा जाति, वर्ग और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर देशहित में कार्य करें। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना पर आधारित रही है और युवाओं को इसी भावना को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में युवाओं को नशा और नकारात्मक

गतिविधियों से दूर रहने का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में युवाओं को यह समझना होगा कि तकनीक का उपयोग ज्ञान, नवाचार और समाजहित के लिए किया जाए, न कि समय बर्बाद करने या गलत दिशा में जाने के लिए।

सम्मेलन में मौजूद युवाओं ने भी राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया। कई युवाओं ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि वे शिक्षा, स्वच्छता, सामाजिक जागरूकता और जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे कार्यों में आगे बढ़कर हिस्सा लेंगे। इस दौरान विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों पर खुलकर संवाद एवं विचार-विमर्श भी किया गया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि देश के इतिहास में जब-जब युवाओं ने सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़कर कार्य किया है, तब-तब समाज और राष्ट्र को नई दिशा मिली है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा अपने भीतर नेतृत्व क्षमता विकसित करें और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनें।

सम्मेलन में गणेश बरनवाल, अरुण कुमार झा, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. अखिलेश कुमार, डॉ. आनंद बर्धन, डॉ राजीव रंजन, डॉ पूजा राय, विनय बरनवाल, सागर राज, राजेश कसेरा, निलेश कुमार, राजेश, नीरज कुमार, अशोक, सुजीत कुमार, चंदन, अजीत दुबे और अमित राव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इस प्रकार के आयोजनों को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताते हुए इसकी सराहना की।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी युवाओं के लिए ऐसे प्रबोधन और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि समाज और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को और अधिक मजबूत किया जा सके।

युवाओं को मिला सकारात्मक संदेश

युवा प्रबोधन सम्मेलन ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर युवा की भागीदारी से ही एक मजबूत और विकसित भारत का निर्माण संभव है। कार्यक्रम में अनुशासन, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभक्ति और सकारात्मक सोच को युवाओं की सबसे बड़ी ताकत बताया गया।

निष्कर्ष

देवघर में आयोजित यह युवा प्रबोधन सम्मेलन युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्य धारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ। कार्यक्रम ने युवाओं को यह संदेश दिया कि यदि वे सही दिशा में अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग करें, तो समाज और देश दोनों को नई दिशा मिल सकती है।

Q1. युवा प्रबोधन सम्मेलन कहां आयोजित किया गया?

A. देवघर के स्थानीय आरएसएस कार्यालय में युवा प्रबोधन सम्मेलन आयोजित किया गया।

Q2. सम्मेलन का मुख्य विषय क्या था?

A. सम्मेलन का मुख्य विषय “राष्ट्र निर्माण में युवा की भूमिका” था।

Q3. सम्मेलन में किन विषयों पर चर्चा हुई?

A. सम्मेलन में शिक्षा, संस्कार, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभक्ति, युवा नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

Q4. युवाओं को क्या संदेश दिया गया?

A. युवाओं को नशा और नकारात्मक गतिविधियों से दूर रहकर समाज और राष्ट्रहित में कार्य करने का संदेश दिया गया।

Q5. कार्यक्रम में कौन-कौन उपस्थित रहे?

A. कार्यक्रम में गणेश बरनवाल, अरुण कुमार झा, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. अखिलेश कुमार, डॉ. आनंद बर्धन सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता, चिकित्सक और युवा उपस्थित रहे।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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