शिव महापुराण कथा का छठा दिन: शिव–महिमा के दिव्य वर्णन से भावविभोर हुए भक्त, कल की कथा सुबह 8 बजे से 11 बजे तक

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देवघर कोठिया मैदान में शिव महापुराण कथा के छठे दिन पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव-तत्त्व, शिव-भक्ति और बैद्यनाथ धाम की महिमा का दिव्य वर्णन किया। कल कथा सुबह 8-11 बजे।

 

 

 

शिव महापुराण कथा का छठा दिन: शिव–महिमा के दिव्य वर्णन से भावविभोर हुए भक्त, कल की कथा सुबह 8 बजे से 11 बजे तक

 

सुनील झा

देवघरविट्ठलेश सेवा समिति सिहोर के तत्वावधान में आयोजित द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा संकल्प की पवित्र श्रृंखला इन दिनों बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में भक्तिमय वातावरण रच रही है। सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के छठे दिन बुधवार को कोठिया मैदान में आस्था का विशाल जनसागर उमड़ पड़ा, जहाँ सिहोर वाले बाबा भागवत भूषण पंडित प्रदीप मिश्रा जी महाराज ने शिव–महिमा का दिव्य, जीवन–स्पर्शी और आध्यात्मिक वर्णन किया।

 

महाराज जी के प्रवचनों ने न केवल उपस्थित लाखों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई बल्कि शिव–तत्त्व के वास्तविक स्वरूप को समझने का प्रेरक मार्ग भी दिखाया। उन्होंने कहा कि “शिव वह शक्ति हैं जो बिना किसी अपेक्षा के प्रेम करती है। शिव वह करुणा हैं जो बिना भेदभाव के सबको स्वीकार करती है। शिव वह तत्त्व हैं जो इस सृष्टि को थामे हुए हैं और स्वयं से परे भी हैं।”

 

 

शिव निराकार भी, साकार भी — भक्त की भावना से धारण करते हैं रूप

 

कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने शिव–भक्ति को संसार की सबसे सरल और सहज भक्ति बताया। उन्होंने कहा—

शिव निराकार भी हैं और साकार भी। भक्त की भावना के अनुसार शिव अपना रूप धारण कर लेते हैं। न विधि चाहिए, न विधान — बस एक सच्चे हृदय की आवश्यकता होती है। शिव की कृपा पलक झपकते ही मिल जाती है।”

 

महाराज जी के इन वचनों ने यह संदेश स्पष्ट किया कि शिव–भक्ति में दिखावे का कोई स्थान नहीं है। महादेव केवल हृदय की सच्चाई और भक्ति की सरलता को स्वीकार करते हैं।

 

‘ॐ नमः शिवाय’ जाप का महत्व: घर में रुकती हैं नकारात्मक शक्तियाँ

 

शिवनाम की महिमा पर प्रकाश डालते हुए महाराज जी ने बताया कि ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप ऐसा महामंत्र है जो जीवन और परिवार दोनों को ऊर्जावान और सकारात्मक बनाता है।

उन्होंने कहा—

“जिस घर में निरंतर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप होता है, वहाँ दरिद्रता, तनाव, क्लेश और नकारात्मकता का प्रवेश नहीं हो सकता। यह महामंत्र अपने आप में दिव्य शक्ति का स्रोत है।”

 

 

शिवलिंग पूजा— सबसे सरल और फलदायी साधना

 

कथा के दौरान उन्होंने शिवलिंग पूजा के महत्व को अत्यंत सरल शब्दों में समझाते हुए कहा—

एक मुट्ठी जल, एक बेलपत्र और थोड़ी सी श्रद्धा… बस इतना काफी है महादेव को प्रसन्न करने के लिए। शिवलिंग की पूजा सबसे सरल, पवित्र और फलदायी साधना है। इससे न केवल व्यक्ति, बल्कि उसकी पीढ़ियाँ धन्य हो जाती हैं।”

 

पंडित जी ने यह भी कहा कि शिव की पूजा में भौतिक साधनों का नहीं, बल्कि भावनाओं की पवित्रता का महत्व है।

 

बैद्यनाथ धाम— जहाँ स्वयं भगवान शिव ‘वैद्य’ बनकर दूर करते हैं रोग

 

देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की महिमा का वर्णन करते हुए सिहोर वाले बाबा ने कहा—

बाबा बैद्यनाथ स्वयं वैद्य हैं — तन, मन और जीवन के। जो श्रद्धा से इस धाम में आता है, उसके शरीर के ही नहीं, जीवन के भी रोग कट जाते हैं।”

 

बैद्यनाथ धाम को विश्व के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक विशेष स्थान प्राप्त है, और पंडित प्रदीप मिश्रा जी के वचनों ने इस धाम की आध्यात्मिक शक्ति को और अधिक उजागर किया।

 

शिव— समय के स्वामी, सृजन और प्रलय दोनों के केंद्र

 

महाराज जी ने शिव–तत्त्व की गहराई को समझाते हुए आगे कहा—

“शिव समय हैं और समय के भी स्वामी। शिव अंत भी हैं और आरंभ भी। सृजन में शिव हैं, प्रलय में भी शिव हैं और दोनों के बीच के हर क्षण में शिव ही विद्यमान हैं।”

 

इन शब्दों ने श्रोताओं को शिव के अनंत एवं अदृश्य स्वरूप का बोध कराया।

 

कथा का सार— शिव को सुनना नहीं, जीवन में उतारना ही सच्ची भक्ति

 

अपने उपदेशों के अंत में उन्होंने भक्तों को प्रेरित करते हुए कहा—

“शिव की महिमा केवल सुनने की नहीं, जीने की है। कथा का सार जीवन में उतरे, यही सच्ची भक्ति है। जो शिव को अपनाता है, शिव उसके जीवन को स्वयं सँवार देते हैं।”

 

 

कथा से लोगों को मिला रोजगार, बढ़ा स्थानीय कारोबार

 

शिव महापुराण कथा के दौरान देवघर में धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय व्यापार में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

 

भोजन, जल और सामग्री की दुकानों में बड़ी बिक्री हुई

 

परिवहन साधनों में पूरे सप्ताह भारी भीड़ रही

 

कोठिया मैदान और उसके आसपास अस्थायी रोजगार के अनेक अवसर उत्पन्न हुए

 

अन्नदान और दानराशि के माध्यम से हजारों भक्तों ने सेवा का पुण्य अर्जित किया

 

कई भक्तों ने सिहोर वाले बाबा से बेलपत्र और रुद्राक्ष भी ग्रहण किया, जिससे वातावरण और अधिक पवित्र एवं आध्यात्मिक बना रहा।

 

 

कल का कार्यक्रम — कथा सुबह 8 बजे से 11 बजे तक

 

आयोजकों के अनुसार कल गुरुवार को कथा सुबह 8 बजे से 11 बजे तक आयोजित की जाएगी।

भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, पार्किंग, व्यवस्था और प्रसाद वितरण की विशेष तैयारी की गई है।

Baba Wani
Author: Baba Wani

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