
पाकुड़ में झारखंड राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका संघ बैठक संपन्न, विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा
संगठन को ले नाजिर हुसैन बने जिला संयोजक व पाकुड़ प्रखंड में संघ गतिविधियों के संचालन के लिए 4 सदस्यीय कमेटी गठित
देवघर। रविवार को झारखंड राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका संघ जिला इकाई पाकुड़ की बैठक पाकुड़ के लड्डू बाबू बगान में दीपा देवी की अध्यक्षता में हुई। बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में सुशील कुमार पांडेय प्रधान संरक्षक एवं राखी देवी महासचिव झारखंड राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका संघ झारखण्ड ने भाग लिया। मंच संचालन मो नाजिर हुसैन ने किया। बैठक में अन्य संगठनों से नाता तोड़ कर शाहिदून बीबी, स्वर्ण लता मुर्मू , आशा मरांडी, अनुसुइया साहा और नाजिर हुसैन की अगुवाई में आंगनबाड़ी सेविका सहायिका ने सुशील कुमार पांडेय की अगुवाई में संचालित संगठन झारखण्ड राज्य आंगनबाड़ी सेविका सहायिका संघ झारखण्ड की सदस्यता ग्रहण कर संघ के नीति सिद्धांतों के आधार पर संघों की हाथों को मजबूत करने का ऐलान किया।बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने ध्वनि मत से पाकुड़ जिला में संगठन का विस्तार हेतु नाजिर हुसैन को जिला संयोजक एवं पाकुड़ प्रखंड में संघ की गतिविधियों के संचालन के लिए 4 सदस्यीय कमेटी बनाया गया। जिसमें अध्यक्ष स्वर्णलता मुर्मू, महासचिव आशा मरांडी, कोषाध्यक्ष अनुसुइया साहा, सचिव शहीदून बीबी मनोनीत की गई। संघ ने एक मत में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को रिटायरमेंट पेंशन, वार्षिक वृद्धि, बाजार दर पर पोषाहार सामग्री की आपूर्ति विभागीय पत्रांक 2238 एवं 2239 दिनांक 30 सितंबर 2022 के अनुसार देय अनुकम्पा एवं वार्षिक वृद्धि को पत्र निर्गत के प्रभावी तिथि से देने की मांग की गई। बैठक में उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में कहा कि पाकुड़, महेशपुर और हिरणपुर परियोजना में अप्रैल एवं मई 2023 में आंगनबाड़ी सेविकाओं का बकाया 65 लाख रुपए जल्द भुगतान की मांग की नहीं तो विवश होकर संघ जोरदार आंदोलन करेगी। इसकी सारी जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी। संघ ने इस बात पर भी आपत्ति दर्ज किया कि झारखंड में पाकुड़ ही एक मात्र जिला है, जहां नियमावली के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को वार्षिक 500 एवं 250 रुपए की वृद्धि विगत 2 वर्षों से नहीं दिया है। पोषण ट्रैकर एवं एफआरएस के कारण हो रहे परेशानियों से निजात दिलाने की मांग की। पोषाहार का दर विगत कई वर्षों से संशोधित नहीं हुआ जिसके कारण पोषाहार के वस्तुओं के निर्धारित दर और बाजार दर में दो गुने का अंतर हो गया है। आंगनबाड़ी केंद्र को आपूर्ति योग्य वस्तुओं को बाजार दर पर करने की आवश्यकता है। झारखंड में सरकारी सेवकों और आउट सोर्सिंग कंपनियों के कर्मियों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है, मगर आंगनबाड़ी सेविका सहायिका को यह लाभ वर्षों तक सेवा देने के बाद नहीं मिल पा रहा है। सरकार यदि वास्तव में महिला सम्मान के प्रति चिंतित है तो आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों सहित तमाम महिला कामगारों को बीमा भविष्य निधि, सेवा निवृति और पेंशन की व्यवस्था कर दे तो समझा जाएगा कि सरकार महिलाओं के सम्मान के प्रति सजग है। बैठक में सर्वसम्मति से आंगनबाड़ी कामगारों के अधिकारों के लिए संघर्ष तेज कर केंद्र सरकार को राज्य सरकार के अनुपात में मानदेय वृद्धि, बंगाल के तेज कर रिटायमेट की व्यवस्था की मांग करते हुए संघर्ष तेज करने की अपील की। मौके पर एलिजाबेथ किस्कू, परसिया हेंब्रम, सुसना हेंब्रम, साजिया खातून, सलमा खातून, सायरा बानो, ललिता देवी, सुमित्रा मुर्मू , घोष पिंकी मुर्मू सहित अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग।










