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देवघर नगर निगम में मेयर रवि कुमार राउत की अध्यक्षता में कबूतर धर्मशाला की अवैध खरीद-बिक्री पर रोक और निगम संचालन को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई। व्यवसायियों और निगम अधिकारियों ने धर्मशाला के संरक्षण को लेकर बड़ा निर्णय लिया।
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कबूतर धर्मशाला को बचाने की कवायद तेज, मेयर रवि कुमार राउत की अगुवाई में निगम ने बनाई बड़ी रणनीति
अवैध खरीद-बिक्री पर रोक लगाने और नगर निगम के पुनः संचालन को लेकर व्यवसायियों व अधिकारियों की अहम बैठक
संवाददाता | देवघर | मंगलवार, 26 मई 2026

देवघर शहर की ऐतिहासिक और सामाजिक पहचान मानी जाने वाली कबूतर धर्मशाला को लेकर अब नगर निगम स्तर पर बड़ी पहल शुरू हो गई है। मंगलवार को देवघर नगर निगम कार्यालय में मेयर रवि कुमार राउत की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें कबूतर धर्मशाला की कथित अवैध खरीद-बिक्री पर रोक लगाने, उसकी मूल पहचान को सुरक्षित रखने और पुनः नगर निगम के अधीन संचालन सुनिश्चित करने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में शामिल व्यवसायी प्रतिनिधियों, निगम अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि कबूतर धर्मशाला के अस्तित्व और उसकी सामाजिक उपयोगिता को हर हाल में बचाया जाएगा। इसके लिए कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका—तीनों स्तरों पर मजबूती से पक्ष रखने की रणनीति तैयार की जाएगी।
शहर की पहचान से जुड़ा है कबूतर धर्मशाला का इतिहास
बैठक के दौरान कई वक्ताओं ने कहा कि कबूतर धर्मशाला केवल एक भवन नहीं, बल्कि देवघर शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। वर्षों से यह स्थान यात्रियों, व्यवसायियों और आम लोगों के उपयोग में रहा है। ऐसे में यदि इसकी अवैध खरीद-बिक्री या निजी हितों के लिए उपयोग की कोशिश होती है, तो इससे शहर की ऐतिहासिक पहचान को नुकसान पहुंचेगा।
मेयर रवि कुमार राउत ने स्पष्ट कहा कि नगर निगम शहर की सार्वजनिक परिसंपत्तियों और विरासत स्थलों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि धर्मशाला को लेकर जो भी कानूनी और प्रशासनिक विकल्प उपलब्ध होंगे, उन सभी पर गंभीरता से काम किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक लग सके।
व्यवसायियों ने भी जताई चिंता
बैठक में मौजूद व्यवसायी भाइयों ने भी कबूतर धर्मशाला को लेकर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि यह धर्मशाला लंबे समय से सामाजिक हित में उपयोग होती रही है और इसे निजी विवाद या अवैध लेन-देन का विषय नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
व्यवसायियों ने नगर निगम को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि शहर की पुरानी संस्थाओं और सार्वजनिक परिसंपत्तियों को बचाने के लिए सामूहिक पहल जरूरी है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी अन्य संपत्तियां भी विवादों में फंस सकती हैं।
कानूनी पहलुओं पर भी हुई चर्चा
बैठक में धर्मशाला से जुड़े कानूनी पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि उपलब्ध दस्तावेजों, स्वामित्व स्थिति और पूर्व के प्रशासनिक रिकॉर्ड की समीक्षा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर सक्षम न्यायालय और संबंधित विभागों के समक्ष भी पक्ष रखा जाएगा।
मेयर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि धर्मशाला से जुड़े सभी पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों का संकलन किया जाए, ताकि आगे की कार्रवाई तथ्यों के आधार पर की जा सके।
निगम संचालन की दिशा में भी बनी सहमति
बैठक में यह भी सहमति बनी कि यदि आवश्यक हुआ तो कबूतर धर्मशाला का संचालन पुनः नगर निगम के माध्यम से किए जाने की दिशा में पहल की जाएगी। इसके लिए प्रशासनिक प्रक्रिया और कानूनी राय लेने की बात कही गई।
नगर निगम का मानना है कि सार्वजनिक उपयोग की ऐसी संपत्तियों का संचालन पारदर्शी और जनहित के अनुरूप होना चाहिए। इससे आम नागरिकों को भी लाभ मिलेगा और संपत्ति की मूल भावना बनी रहेगी।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी
बैठक में टैक्स दारोगा जयशंकर साह, नगर प्रबंधक प्रकाश मिश्रा, वार्ड पार्षद मृत्युंजय राउत सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि धर्मशाला को बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जारी रहेगा।
बैठक के बाद निगम कार्यालय के बाहर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों के बीच चर्चा होती रही। कई स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम की इस पहल का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि शहर की ऐतिहासिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए भविष्य में भी इसी तरह ठोस कदम उठाए जाएंगे।
देवघर में बढ़ रही सार्वजनिक संपत्तियों को बचाने की मांग
हाल के वर्षों में देवघर शहर के तेजी से विस्तार और व्यावसायिक गतिविधियों में वृद्धि के बीच सार्वजनिक और सामाजिक उपयोग की कई संपत्तियों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में कबूतर धर्मशाला का मामला भी शहर में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज के विभिन्न वर्ग एकजुट होकर पहल करें, तो ऐसी परिसंपत्तियों को सुरक्षित रखा जा सकता है। नगर निगम की यह बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
निष्कर्ष
कबूतर धर्मशाला को लेकर देवघर नगर निगम की यह बैठक केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शहर की सामाजिक विरासत को बचाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। मेयर रवि कुमार राउत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि नगर निगम सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी लड़ाई लड़ने से भी पीछे नहीं हटेगा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर और गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
Q1. कबूतर धर्मशाला को लेकर बैठक कब हुई?
A. मंगलवार, 26 मई 2026 को देवघर नगर निगम कार्यालय में यह बैठक आयोजित हुई।
Q2. बैठक की अध्यक्षता किसने की?
A. बैठक की अध्यक्षता देवघर के मेयर रवि कुमार राउत ने की।
Q3. बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
A. कबूतर धर्मशाला की अवैध खरीद-बिक्री पर रोक लगाना और इसे पुनः नगर निगम द्वारा संचालित करने की दिशा में रणनीति बनाना।
Q4. बैठक में कौन-कौन शामिल हुए?
A. बैठक में व्यवसायी प्रतिनिधि, निगम अधिकारी, टैक्स दारोगा जयशंकर साह, नगर प्रबंधक प्रकाश मिश्रा, वार्ड पार्षद मृत्युंजय राउत सहित अन्य लोग मौजूद थे।
Q5. नगर निगम आगे क्या कदम उठाएगा?
A. नगर निगम कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों की समीक्षा कर सक्षम प्राधिकार के समक्ष अपना पक्ष रखेगा।









