बेहरन में दुबे बाबा महायज्ञ का पंचम दिवस: भक्ति, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम

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देवघर के बेहरन गांव में दुबे बाबा महायज्ञ के पंचम दिवस पर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं की भीड़, हवन, प्रवचन और भजन संध्या का भव्य आयोजन।

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बेहरन में दुबे बाबा महायज्ञ का पंचम दिवस: भक्ति, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम

नवाह्न पारायण मानस पाठ में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, हवन-प्रवचन और भजन संध्या से गूंजा वातावरण

संवाददाता | देवघर | 29 मार्च 2026

देवघर जिले के देवीपुर प्रखंड अंतर्गत महुआडांड़ पंचायत स्थित बेहरन गांव इन दिनों भक्ति और आस्था के रंग में पूरी तरह सराबोर है। यहां आयोजित नौ दिवसीय श्री श्री 108 नवाह्न पारायण मानस पाठ महायज्ञ का पंचम दिवस रविवार को अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ सम्पन्न हुआ। यज्ञ स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां हर कोई पूजा-अर्चना, परिक्रमा और यज्ञ अनुष्ठान में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित करता नजर आया।

यज्ञमंडप में गूंजा वैदिक मंत्रोच्चार, भक्तिमय बना माहौल

महायज्ञ के पंचम दिवस पर सुबह से ही यज्ञमंडप में वैदिक मंत्रोच्चार की ध्वनि गूंजती रही। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान के साथ यज्ञ मंडप एवं मंदिर परिसर की परिक्रमा करते दिखाई दिए। वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ था, जहां हर ओर भक्ति की अनुभूति हो रही थी।

मुख्य यजमान किशोर झा अपनी धर्मपत्नी एवं महुआडांड़ पंचायत की पूर्व मुखिया दुर्गा देवी के साथ आचार्य मुरलीधर पांडेय के सान्निध्य में पूरे विधि-विधान से यज्ञ अनुष्ठान का निर्वहन कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में सभी धार्मिक क्रियाएं शास्त्रोक्त ढंग से सम्पन्न हो रही हैं, जिससे आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गई है।

संध्या काल में हवन, प्रवचन और भजन संध्या का भव्य आयोजन

दिनभर पूजा-पाठ के बाद संध्या समय हवन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। हवन के दौरान वातावरण में घी, हवन सामग्री और मंत्रों की ध्वनि ने एक दिव्य अनुभूति पैदा कर दी।

इसके पश्चात अयोध्या से पधारे शुभम जी महाराज द्वारा प्रवचन दिया गया। उनके मुखारविंद से निकले आध्यात्मिक विचारों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने धर्म, कर्म और भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए लोगों को जीवन में सकारात्मकता अपनाने की प्रेरणा दी।

देर शाम भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें भक्ति गीतों की स्वर लहरियों पर श्रद्धालु झूम उठे। पूरा परिसर भक्ति संगीत से गुंजायमान हो गया और लोगों ने भक्ति रस में डूबकर आयोजन का आनंद लिया।

दुबे बाबा की महिमा और इतिहास से जुड़ी रोचक कथा

मुख्य यजमान किशोर झा ने दुबे बाबा की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि बेहरन गांव ही दुबे बाबा का जन्मस्थान है और मंदिर की भूमि आज भी सर्वे खतियान में उनके नाम से दर्ज है।

उन्होंने बताया कि इस पवित्र भूमि से जुड़ी एक प्राचीन जनश्रुति भी प्रचलित है। कहा जाता है कि कभी खेतोरी राज की नजर इस भूमि पर पड़ी थी और राजा ने इसे अपने अधिकार में लेने का प्रयास किया। इसी क्रम में उसने दुबे बाबा को अपने दरबार में बुलाया और उनका अपमान किया।

अपमानित होकर दुबे बाबा वापस अपने गांव बेहरन लौट आए। इसके बाद एक अद्भुत घटना घटी, जो आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है।

चमत्कारी घटना: बछिया से दूध और सर्प प्रकट होने की कथा

गांव लौटने के बाद दुबे बाबा ने अपने सेवक राजू राउत से भोजन की मांग की, लेकिन घर में खाने के लिए कुछ भी उपलब्ध नहीं था। तब उन्होंने सामने बंधी बछिया से दूध निकालने को कहा।

आश्चर्यजनक रूप से बछिया ने दूध दिया, जिसे दुबे बाबा ने ग्रहण किया। इसके तुरंत बाद उनके शरीर से एक सर्प प्रकट हुआ, जिसने खेतोरी राजा को क्षेत्र से खदेड़ना शुरू कर दिया।

यह घटना सुनकर आज भी श्रद्धालु चमत्कृत हो जाते हैं और दुबे बाबा की शक्ति एवं महिमा में अपनी अटूट आस्था प्रकट करते हैं।

बासुकीनाथ की शरण और दुबे बाबा की शर्त

जनश्रुति के अनुसार, इस घटना से भयभीत होकर राजा बासुकीनाथ की शरण में पहुंचा। वहां बाबा बासुकीनाथ ने दुबे बाबा को शांत करने का प्रयास किया।

हालांकि दुबे बाबा ने एक शर्त रखी कि जहां तक उनकी पहचान और प्रभाव रहेगा, वहां तक राजा का अस्तित्व नहीं रहेगा। कहा जाता है कि इसी कारण राजा को उस क्षेत्र से पलायन करना पड़ा।

आज भी ग्रामीणों का मानना है कि उस राजा का गढ़ कुछ किलोमीटर दूर स्थित है, जहां उनके कुलदेवता की पूजा होती है और स्थानीय लोग उसे ग्राम देवता के रूप में मानते हैं।

ऐतिहासिकता के प्रमाण: मुगलकालीन सिक्कों की चर्चा

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस क्षेत्र में समय-समय पर मुगलकालीन सिक्के भी मिलते रहे हैं, जो इस स्थान की ऐतिहासिकता को प्रमाणित करते हैं।

इतिहास और आस्था का यह संगम इस स्थल को और भी विशेष बनाता है, जहां धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ ऐतिहासिक साक्ष्य भी मौजूद हैं।

बेहरन गांव में दुबे बाबा महायज्ञ के दौरान हवन और श्रद्धालु

दुबे बाबा महायज्ञ के पंचम दिवस पर हवन में शामिल श्रद्धालु

गंगा नारायण सिंह ने की परिक्रमा, आयोजन की सराहना

रविवार को मधुपुर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व भाजपा प्रत्याशी एवं समाजसेवी गंगा नारायण सिंह भी बेहरन गांव पहुंचे। उन्होंने यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर दुबे बाबा से आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस दौरान उन्होंने यज्ञ समिति के अध्यक्ष शिवानंद साह सहित अन्य सदस्यों से मुलाकात कर आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संचार करते हैं।

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहे इस 95 पारायण महायज्ञ में अधिक से अधिक लोग भाग लें और पुण्य के भागी बनें।

दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु, बढ़ी क्षेत्र की पहचान

महायज्ञ के आयोजन से पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण का संचार हुआ है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया है, बल्कि बेहरन गांव की पहचान को भी व्यापक स्तर पर स्थापित किया है।

Conclusion

बेहरन गांव में आयोजित दुबे बाबा महायज्ञ का पंचम दिवस भक्ति, आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम बनकर सामने आया। वैदिक मंत्रों, हवन, प्रवचन और भजन संध्या ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

ऐसे आयोजन समाज में न केवल धार्मिक चेतना को जागृत करते हैं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी जीवित रखने का कार्य करते हैं। दुबे बाबा की महिमा और इस स्थल की ऐतिहासिकता इसे एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बनाती है।

Q1. दुबे बाबा महायज्ञ कहां आयोजित हो रहा है?

A. बेहरन गांव, महुआडांड़ पंचायत, देवीपुर प्रखंड, देवघर में यह महायज्ञ आयोजित हो रहा है।

Q2. यह महायज्ञ कितने दिनों का है?

A. यह नौ दिवसीय श्री श्री 108 नवाह्न पारायण मानस पाठ महायज्ञ है।

Q3. पंचम दिवस पर क्या विशेष आयोजन हुआ?

A. पंचम दिवस पर हवन, प्रवचन और भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

Q4. दुबे बाबा से जुड़ी खास मान्यता क्या है?

A. मान्यता है कि दुबे बाबा ने चमत्कारी शक्ति से राजा को क्षेत्र से खदेड़ा था और उनकी महिमा आज भी कायम है।

Q5. क्या यहां दूर-दराज से भी लोग आते हैं?

A. हां, इस महायज्ञ में दूर-दराज से श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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