शहीद प्रहलाद को नम आंखों से अंतिम विदाई, बादल पत्रलेख और रणधीर सिंह ने संभाली कमान

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देवघर के महतोडीह गांव में एसएसबी जवान शहीद प्रहलाद कुमार सिंह को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। बादल पत्रलेख और रणधीर सिंह ने अंतिम यात्रा की कमान संभाली।

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शहीद प्रहलाद को नम आंखों से अंतिम विदाई, बादल पत्रलेख और रणधीर सिंह ने संभाली कमान

महतोडीह गांव में उमड़ा जनसैलाब, ‘शहीद अमर रहे’ के नारों से गूंजा इलाका, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

सुनील झा | देवघर | गुरुवार

शहीद प्रहलाद कुमार सिंह का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर, अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़

शोक, गर्व और सम्मान के बीच अंतिम विदाई

झारखंड के देवघर जिले के सारवां प्रखंड स्थित महतोडीह गांव में गुरुवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। यह दिन शोक, गर्व और सम्मान के अद्भुत संगम का साक्षी बना, जब सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 35वीं बटालियन के वीर जवान प्रहलाद कुमार सिंह को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

जैसे ही उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरा इलाका “शहीद अमर रहे”, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारों से गूंज उठा। हजारों की संख्या में लोग अपने वीर सपूत को अंतिम सलामी देने उमड़ पड़े। हर आंख नम थी, लेकिन दिलों में गर्व की भावना भी उतनी ही प्रबल थी। इसे संयोग कहें कि जिस 17 तारीख को उसका जन्म हुआ था, उसी 17 तारीख की शाम में इस दुनिया को छोड़कर चला गया।

बादल पत्रलेख की अगुवाई में गांव पहुंचा पार्थिव शरीर

गुरुवार सुबह लगभग 9 बजे के आसपास देवघर से का पार्थिव शरीर पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख की अगुवाई में महतोडीह गांव लाया गया।

इस दौरान पूरे रास्ते तिरंगा लिए युवाओं का हुजूम काफिले के साथ चलता रहा। हर कोई अपने नायक को अंतिम विदाई देने को आतुर था।

बादल पत्रलेख स्वयं पूरे मार्ग में सक्रिय रहे। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को संभालते हुए भीड़ को संयम और अनुशासन बनाए रखने की अपील की। गांव पहुंचने पर उन्होंने सबसे पहले शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया और परिजनों को सांत्वना दी।

रणधीर सिंह की सक्रिय मौजूदगी बनी चर्चा का केंद्र

पूर्व मंत्री और रणधीर सिंह भी इस पूरे घटनाक्रम में लगातार सक्रिय रहे। वे सुबह से लेकर अंतिम संस्कार तक हर चरण में उपस्थित रहे।

उन्होंने शहीद के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और हर संभव सहायता का भरोसा दिया। रणधीर सिंह ने कहा कि
“देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले जवानों का सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है। सरकार को उनके परिवार के साथ हर परिस्थिति में खड़ा रहना चाहिए।”

ड्यूटी के दौरान वीरगति

प्रहलाद कुमार सिंह की शहादत की खबर ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। वे चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के नक्सल प्रभावित शीला पीकेट में तैनात थे।
घटना के दिन वे संतरी ड्यूटी पर थे। रात करीब 8 बजे गोली लगने से उनकी मृत्यु हो गई।

बताया जाता है कि घटना से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने शाम करीब 5 बजे अपनी पत्नी से फोन पर बातचीत की थी। यह बातचीत अब उनके परिवार के लिए अंतिम याद बनकर रह गई है।

अंतिम दर्शन का मार्मिक दृश्य, हर आंख हुई नम

जब शहीद का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा, तो वहां का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था।

पत्नी ब्यूटी कुमारी का विलाप और 4 वर्षीय पुत्री गौरी की मासूम निगाहें हर किसी का दिल तोड़ रही थीं। गौरी बार-बार अपने पिता को देख रही थी, मानो वह समझ नहीं पा रही हो कि उसके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे।

इस दौरान मौजूद हजारों लोग खुद को आंसू बहाने से रोक नहीं सके। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति के मन में हमेशा के लिए अंकित हो गया।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

अजय नदी के दासडीह स्थित सतीघाट पर शहीद प्रहलाद कुमार सिंह का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने सहायक कमांडेंट दीपक कुमार सिंह के नेतृत्व में अपने साथी को अंतिम सलामी दी। बंदूकों की सलामी और शोक धुन के बीच वातावरण पूरी तरह भावुक हो गया। हालांकि आसमानी फायरिंग नहीं किए जाने को लेकर तरह-तरह चर्चा तेज हो गई। किसने नियम में बदलाव होने के कारण फायरिंग नहीं किए जाने का हवाला दिया तो कोई और बात कही।

इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में आम लोग मौजूद रहे।

बादल पत्रलेख का भावुक वक्तव्य

अंतिम संस्कार के दौरान बादल पत्रलेख ने भावुक होकर कहा कि

“प्रहलाद कुमार सिंह ने देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। कम उम्र में 17 पदक प्राप्त करना उनकी बहादुरी का प्रमाण है। उनका जाना पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।”

उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से शहीद के परिवार को उचित मुआवजा और हर संभव सहायता प्रदान करने की मांग की।

रणधीर सिंह ने उठाई ठोस मांगें

रणधीर सिंह ने भी अपनी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार को शहीद के परिवार के भविष्य की चिंता करनी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार उठाए
परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

बाजार बंद कर दी गई श्रद्धांजलि

शहीद के सम्मान में सारवां बस पड़ाव, गोला बाजार सहित कई क्षेत्रों में दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें बंद रखीं।

यह बंद पूरी तरह स्वप्रेरित था, जो यह दर्शाता है कि शहीद के प्रति लोगों के मन में कितना सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव था।

हजारों लोगों की उपस्थिति, जनसैलाब में बदली अंतिम यात्रा

शहीद की अंतिम यात्रा एक जनसैलाब में बदल गई। सारवां, सोनारायठाढ़ी, सारठ, मोहनपुर समेत कई इलाकों से हजारों लोग इसमें शामिल हुए।

युवाओं ने तिरंगा लेकर पूरे अनुशासन के साथ यात्रा निकाली। जगह-जगह लोगों ने फूल बरसाकर अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।

यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि प्रहलाद कुमार सिंह केवल एक परिवार के नहीं, बल्कि पूरे समाज के बेटे थे।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

प्रहलाद कुमार सिंह अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और एक छोटी बेटी को छोड़ गए हैं। उनकी शादी वर्ष 2018 में हुई थी।

अंतिम संस्कार के दौरान उनके छोटे भाई प्रशांत कुमार ने मुखाग्नि दी।

परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था, लेकिन गांव और क्षेत्र के लोगों ने उन्हें हर संभव सहारा देने का प्रयास किया।

शहादत पर गर्व, आंखों में आंसू

महतोडीह गांव में हर व्यक्ति की आंखों में आंसू थे, लेकिन साथ ही शहादत पर गर्व भी साफ झलक रहा था।

लोगों ने कहा कि प्रहलाद कुमार सिंह ने देश के लिए जो बलिदान दिया है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और साहस की प्रेरणा देती रहेगी।

समाज और प्रशासन का मिला साथ

इस दुखद घड़ी में जिस तरह जनप्रतिनिधि, प्रशासन और आम जनता एक साथ खड़ी नजर आई, वह सामाजिक एकता का उदाहरण बन गया।
बादल पत्रलेख और रणधीर सिंह की सक्रिय भूमिका ने यह संदेश दिया कि शहीद के परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

निष्कर्ष

शहीद प्रहलाद कुमार सिंह की अंतिम विदाई ने यह साबित कर दिया कि देश के लिए बलिदान देने वाले कभी नहीं मरते, वे हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं।
उनकी शहादत न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है।

प्रश्न 1: शहीद प्रहलाद कुमार सिंह कौन थे?

उत्तर: वे सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 35वीं बटालियन के जवान थे, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान वीरगति प्राप्त की।

प्रश्न 2: उनकी शहादत कैसे हुई?

उत्तर: वे चतरा जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में संतरी ड्यूटी के दौरान गोली लगने से शहीद हुए।

प्रश्न 3: अंतिम संस्कार कहां हुआ?

उत्तर: अजय नदी के दासडीह स्थित सतीघाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

प्रश्न 4: अंतिम यात्रा में कौन-कौन शामिल हुए?

उत्तर: हजारों स्थानीय लोग, प्रशासनिक अधिकारी, पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख और पूर्व विधायक रणधीर सिंह शामिल हुए।

प्रश्न 5: परिवार में कौन-कौन हैं?

उत्तर: उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और 5 वर्षीय पुत्री शामिल हैं।

Disclaimer: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें समय-समय पर अपडेट संभव है।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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