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देवघर के नवनिर्वाचित मेयर रवि राउत के संघर्ष की कहानी। पिता अशोक कुमार राउत ने बताया कैसे ट्रक चालक के बेटे ने शिवगंगा तट पर फूल बेचते हुए शुरुआत कर शहर का मेयर बनने तक का सफर तय किया।
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ट्रक चालक के बेटे से शहर का मेयर बनने तक: पिता अशोक कुमार राउत ने सुनाई रवि राउत के संघर्ष की कहानी
शिवगंगा तट पर फूल बेचने से शुरू हुआ सफर, सेवा भावना और जनता के भरोसे ने दिलाया देवघर का मेयर पद
सुनील झा | देवघर | 15 मार्च 2026

रवि राउत और उनके पिता अशोक कुमार राउत मां प्रमिला देवी व अन्य
देवघर नगर निगम के नवनिर्वाचित मेयर रवि राउत की सफलता के पीछे संघर्ष, सेवा भावना और जनता के भरोसे की एक लंबी कहानी छिपी है। एक साधारण परिवार में जन्मे रवि राउत ने अपनी मेहनत और सामाजिक कार्यों के बल पर आज शहर की सबसे बड़ी जिम्मेदारी हासिल की है। उनके पिता अशोक कुमार राउत ने अपने बेटे के बचपन और संघर्ष से जुड़ी कई यादें साझा करते हुए बताया कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक ट्रक चालक का बेटा आगे चलकर शहर का मेयर बनेगा।
अशोक कुमार राउत ने बातचीत में बताया कि रवि राउत का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने बच्चों को मेहनत और ईमानदारी का पाठ पढ़ाया। उनका कहना है कि बचपन से ही रवि राउत में लोगों के प्रति अपनापन और सेवा करने की भावना दिखाई देती थी।
शिवगंगा तट से शुरू हुआ संघर्ष का सफर
रवि राउत का बचपन देवघर के प्रसिद्ध शिवगंगा तट के आसपास बीता। पिता ने बताया कि कई बार वह परिवार की मदद के लिए वहां फूल बेचने में भी हाथ बंटाता था। उस समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि वही बच्चा आगे चलकर शहर की राजनीति में इतना बड़ा मुकाम हासिल करेगा।
अशोक कुमार राउत के अनुसार, रवि राउत बचपन से ही लोगों के बीच रहने और उनकी समस्याओं को समझने में रुचि रखते थे। पढ़ाई के साथ-साथ वह सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते थे। मोहल्ले के लोगों की छोटी-छोटी समस्याओं को हल करने की कोशिश करना उनके स्वभाव का हिस्सा था।
उन्होंने बताया कि परिवार में हमेशा सादगी और मेहनत का माहौल रहा। इसी माहौल ने रवि राउत को जमीन से जुड़े रहने की सीख दी, जो आज भी उनके व्यक्तित्व में दिखाई देती है।
पढ़ाई के साथ सामाजिक कार्यों में बढ़ी रुचि
अशोक कुमार राउत ने बताया कि जब रवि राउत पढ़ाई कर रहे थे, उसी दौरान उनकी रुचि सामाजिक कार्यों की ओर ज्यादा बढ़ने लगी। वह अक्सर लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनते और समाधान ढूंढने की कोशिश करते थे।
मोहल्ले के लोग भी उन्हें एक जिम्मेदार और मददगार युवक के रूप में देखने लगे थे। धीरे-धीरे यही विश्वास उनके लिए आगे की राह बनता गया। लोगों के बीच लगातार सक्रिय रहने और सेवा कार्यों के कारण उनका जनसंपर्क मजबूत होता चला गया।
पिता का कहना है कि बेटे की यही आदत आगे चलकर उसकी पहचान बन गई। लोगों ने उसे हमेशा अपने बीच पाया और यही कारण रहा कि जनता ने उस पर भरोसा जताया।
जनता के भरोसे ने दिलाया मेयर का पद
देवघर नगर निगम चुनाव में रवि राउत को जनता का भरपूर समर्थन मिला। उनके पिता के अनुसार, यह जीत केवल चुनावी जीत नहीं बल्कि वर्षों की सेवा और लोगों के बीच बनाए गए विश्वास का परिणाम है।
अशोक कुमार राउत भावुक होते हुए कहते हैं कि एक पिता के लिए इससे बड़ा गर्व का क्षण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जब लोगों ने उनके बेटे को शहर का मेयर चुना, तब उन्हें महसूस हुआ कि मेहनत और ईमानदारी कभी व्यर्थ नहीं जाती।
उनका मानना है कि रवि राउत ने हमेशा लोगों के बीच रहकर काम किया और यही कारण है कि जनता ने उन्हें शहर की जिम्मेदारी सौंप दी।
मां और बेटे ने एक साथ ली जनप्रतिनिधि की शपथ
अशोक कुमार राउत ने यह भी बताया कि उनके परिवार के लिए एक और खास बात यह रही कि मां और बेटे ने एक साथ जनप्रतिनिधि के रूप में शपथ ली। जहां रवि राउत देवघर के मेयर बने हैं, वहीं उनकी पत्नी प्रमिला देवी वार्ड पार्षद के रूप में चुनी गई हैं।
उनके अनुसार यह पल पूरे परिवार के लिए बेहद यादगार और ऐतिहासिक रहा। परिवार के दो सदस्यों का एक साथ जनप्रतिनिधि बनना उनके लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि यह केवल उनके परिवार की खुशी नहीं बल्कि पूरे देवघर शहर के लिए भी एक खास क्षण है।
स्वागत समारोह में शामिल हुए पिता
शनिवार को देवघर नगर निगम कार्यालय में आयोजित स्वागत समारोह में भी अशोक कुमार राउत अपने परिवार के साथ मौजूद थे। वहां उन्होंने लोगों के साथ बातचीत करते हुए अपने बेटे के संघर्ष और उपलब्धि पर खुशी जाहिर की।
उन्होंने कहा कि अब उनका बेटा केवल उनका बेटा नहीं रहा, बल्कि पूरे शहर का बेटा और भाई बन गया है। जनता ने जिस विश्वास के साथ उसे यह जिम्मेदारी दी है, वह उसे पूरी ईमानदारी से निभाएगा।
शहर के विकास और जनसेवा को मिलेगी प्राथमिकता
अशोक कुमार राउत ने उम्मीद जताई कि रवि राउत अपने कार्यकाल में शहर के विकास, स्वच्छता व्यवस्था और जनसेवा को प्राथमिकता देंगे। उनका कहना है कि बचपन से ही रवि राउत लोगों की समस्याओं को समझते रहे हैं, इसलिए वह शहर की जरूरतों को अच्छी तरह जानते हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि मेयर बनने के बाद भी रवि राउत आम लोगों से जुड़े रहेंगे और शहर के विकास के लिए लगातार काम करेंगे।
संघर्ष और सेवा की कहानी से मिलती है प्रेरणा
रवि राउत की कहानी यह दिखाती है कि साधारण परिवार से आने वाला व्यक्ति भी मेहनत, लगन और सेवा भावना के दम पर बड़ी जिम्मेदारी तक पहुंच सकता है। ट्रक चालक के बेटे से शहर का मेयर बनने तक का उनका सफर कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है।
अशोक कुमार राउत का कहना है कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सबसे जरूरी चीज मेहनत और ईमानदारी है। अगर व्यक्ति लोगों के लिए काम करता है तो जनता का भरोसा उसे जरूर मिलता है।
प्रश्न 1: देवघर के नए मेयर कौन बने हैं?
उत्तर: देवघर नगर निगम के नए मेयर रवि राउत बने हैं।
प्रश्न 2: रवि राउत के पिता कौन हैं?
उत्तर: रवि राउत के पिता अशोक कुमार राउत हैं, जिन्होंने अपने बेटे के संघर्ष और बचपन की कहानी साझा की।
प्रश्न 3: रवि राउत का बचपन कहां बीता?
उत्तर: उनका बचपन देवघर के शिवगंगा तट के आसपास बीता, जहां वह कभी-कभी फूल बेचने में भी मदद करते थे।
प्रश्न 4: रवि राउत के परिवार का राजनीति से क्या संबंध है?
उत्तर: रवि राउत जहां देवघर के मेयर बने हैं, वहीं उनकी पत्नी प्रमिला देवी वार्ड पार्षद के रूप में चुनी गई हैं।
निष्कर्ष
देवघर के मेयर रवि राउत की कहानी संघर्ष, सेवा भावना और जनता के भरोसे की मिसाल है। एक साधारण परिवार से निकलकर शहर का नेतृत्व करना यह साबित करता है कि मेहनत और जनसेवा के बल पर कोई भी व्यक्ति बड़ी जिम्मेदारी तक पहुंच सकता है।
Disclaimer:
यह समाचार उपलब्ध जानकारी और बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करना है।








