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असामयिक निधन से शोक की लहर, पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख ने परिजनों को दी सांत्वना | देवघर
देवघर जिले के सारवां प्रखंड के चरघरा गांव निवासी सहायक अध्यापक मंजय कुमार के असामयिक निधन पर शोक की लहर। पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने परिजनों से मिलकर दी सांत्वना और श्रद्धांजलि।
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असामयिक निधन से शोक की लहर, पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख ने परिजनों को दी सांत्वना
सारवां प्रखंड के चरघरा गांव पहुंचे पूर्व कृषि मंत्री, दिवंगत सहायक अध्यापक को दी श्रद्धांजलि
देवघर | संवाददाता

(दिवंगत सहायक अध्यापक मंजय कुमार के परिजनों से मिलते पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख)
देवघर जिले के सारवां प्रखंड अंतर्गत जियाखाड़ा पंचायत के चरघरा गांव निवासी एवं बरहेट (साहेबगंज) में पदस्थापित सहायक अध्यापक मंजय कुमार के असामयिक निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। शनिवार को जैसे ही उनके निधन की सूचना गांव में पहुंची, पूरे इलाके में गमगीन माहौल बन गया। परिवारजनों के साथ-साथ ग्रामीणों, शिक्षकों और परिचितों में शोक की भावना स्पष्ट रूप से देखी गई।
दिवंगत मंजय कुमार अपने सरल स्वभाव, कर्तव्यनिष्ठ कार्यशैली और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। वे न केवल एक शिक्षक थे, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी थे। उनके असामयिक निधन से शिक्षा जगत को गहरी क्षति पहुंची है।
पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख पहुंचे चरघरा गांव
निधन की सूचना मिलते ही झारखंड सरकार के पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख शनिवार को चरघरा गांव स्थित दिवंगत शिक्षक के पैतृक आवास पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और इस दुखद घड़ी में उन्हें ढांढस बंधाया। पूर्व मंत्री ने परिजनों को सांत्वना देते हुए कहा कि इस कठिन समय में वे परिवार के साथ खड़े हैं।
पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि मंजय कुमार का असमय जाना केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और शिक्षा क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि मंजय कुमार जैसे कर्मठ और समर्पित शिक्षक समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं, जिनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना
पूर्व मंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और परिजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। उन्होंने कहा कि मंजय कुमार ने अपने जीवनकाल में जिस निष्ठा और ईमानदारी से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य किया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा।
उन्होंने परिजनों को हर संभव सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वे हर स्तर पर मदद के लिए तैयार हैं। पूर्व मंत्री की इस संवेदनशील पहल से परिजनों को कुछ हद तक संबल मिला।
गांव में पसरा मातम, उमड़ी श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़
दिवंगत सहायक अध्यापक के निधन की खबर फैलते ही चरघरा गांव सहित आसपास के इलाकों में शोक का माहौल बन गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, शिक्षक साथी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं परिचितजन उनके घर पहुंचे। सभी ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
ग्रामीणों ने बताया कि मंजय कुमार न केवल एक अच्छे शिक्षक थे, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। वे हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर रहते थे, जिस कारण गांव में उनकी अलग पहचान थी।
शिक्षा जगत को अपूरणीय क्षति
स्थानीय शिक्षकों और ग्रामीणों ने कहा कि मंजय कुमार का असामयिक निधन शिक्षा जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके द्वारा दिए गए योगदान और शिक्षण कार्य को लंबे समय तक याद किया जाएगा। विद्यार्थियों के बीच उनकी लोकप्रियता इस बात का प्रमाण थी कि वे अपने कार्य को केवल नौकरी नहीं, बल्कि सेवा मानते थे।
निष्कर्ष
मंजय कुमार के असामयिक निधन से पूरा क्षेत्र शोकाकुल है। उनके सरल स्वभाव, कर्मठ जीवन और शिक्षा के प्रति समर्पण को कभी भुलाया नहीं जा सकता। पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख की संवेदनशील उपस्थिति और परिजनों को दिया गया आश्वासन इस दुखद घड़ी में संबल प्रदान करने वाला साबित हुआ।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिवार को यह असहनीय दुःख सहन करने की शक्ति दें।










