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📰 देवघर नगर निगम में सफाई कर्मचारियों का उग्र प्रदर्शन | बकाया वेतन–मानदेय को लेकर घेराव
📝 देवघर नगर निगम में सफाई कर्मचारियों ने बकाया वेतन व मानदेय भुगतान को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। नगर आयुक्त का घेराव, पीएफ–ईपीएफ हिसाब की मांग और 30 दिसंबर तक भुगतान का आश्वासन।
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देवघर नगर निगम में सफाई कर्मचारियों का फूटा गुस्सा
बकाया वेतन व मानदेय भुगतान की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन, नगर आयुक्त का घेराव
तीन माह से वेतन और दो माह से मानदेय लंबित, कर्मचारियों में भारी आक्रोश
देवघर | सुनील झा की रिपोर्ट।
देवघर नगर निगम में सोमवार को हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब बकाया वेतन और मानदेय भुगतान को लेकर सफाई कर्मचारियों का धैर्य पूरी तरह टूट गया। नगर निगम में कार्यरत स्थायी और दैनिक सफाई कर्मचारियों ने एकजुट होकर निगम कार्यालय का रुख किया और जोरदार नारेबाजी करते हुए नगर आयुक्त सह प्रशासक रोहित कुमार सिन्हा का घेराव कर लिया। कार्यालय परिसर में गूंजते नारों और आक्रोश के कारण कुछ समय के लिए नगर निगम का कामकाज भी प्रभावित रहा।
तीन माह से वेतन और दो माह से मानदेय लंबित
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि नगर निगम के स्थायी सफाई कर्मचारियों का पिछले तीन माह से वेतन लंबित है, जबकि दैनिक सफाई कर्मचारियों को दो माह से मानदेय नहीं मिला है। कर्मचारियों का कहना था कि दिसंबर माह की 22 तारीख गुजर चुकी है और 25 दिसंबर के बाद लगातार छुट्टियां शुरू हो जाएंगी। ऐसे में यदि अधिकारी और कर्मचारी अवकाश पर चले गए, तो भुगतान की प्रक्रिया और भी लंबी खिंच सकती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी।
नगर निगम कार्यालय में दो घंटे तक हंगामा
सोमवार अपराह्न बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी नगर निगम कार्यालय पहुंचे। सफाई कर्मचारियों ने “वेतन दो”, “मानदेय दो”, “सफाई कर्मचारी नहीं तो शहर नहीं” जैसे नारे लगाए।
करीब दो घंटे तक चला यह उग्र प्रदर्शन नगर निगम प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया। प्रदर्शन के दौरान मुख्य द्वार पर भीड़ जमा हो गई, जिससे आम लोगों और कर्मचारियों को आने-जाने में परेशानी हुई।

महंगाई में बिना वेतन जीना हुआ मुश्किल
सफाई कर्मचारियों का कहना था कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में बिना वेतन के घर चलाना बेहद कठिन हो गया है।
कई कर्मचारियों ने बताया कि वे पहले से ही कर्ज के बोझ में दबे हैं। किराया, बच्चों की पढ़ाई, स्कूल फीस, दवाइयां, राशन और बिजली-पानी के बिल समय पर चुकाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
प्रदर्शन के दौरान कुछ कर्मचारियों की आंखों में आंसू भी देखे गए। उनका कहना था कि अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो उनके परिवारों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
“अब सिर्फ आश्वासन नहीं, भुगतान चाहिए”
कर्मचारियों ने साफ शब्दों में कहा कि वे अब केवल आश्वासन सुनने के लिए तैयार नहीं हैं।
उनकी मांग है कि बकाया वेतन और मानदेय का समयबद्ध और लिखित आश्वासन के साथ भुगतान किया जाए।
कर्मचारियों का कहना था कि हर बार उन्हें यही कहा जाता है कि “राशि उपलब्ध नहीं है”, लेकिन उनकी जरूरतें और जिम्मेदारियां रोज बढ़ती जा रही हैं।
नगर आयुक्त के साथ वार्ता, सवाल-जवाब का लंबा दौर
लगभग दो घंटे के प्रदर्शन के बाद नगर आयुक्त सह प्रशासक रोहित कुमार सिन्हा ने सफाई कर्मचारियों को अपने कार्यालय कक्ष में वार्ता के लिए बुलाया।
इस दौरान कर्मचारियों और नगर आयुक्त के बीच सवाल-जवाब का लंबा दौर चला। कर्मचारियों ने सीधे तौर पर पूछा कि आखिर हर बार सफाई कर्मचारियों के वेतन में ही देरी क्यों होती है।

नगर आयुक्त का भरोसा—30 दिसंबर तक हर हाल में भुगतान
वार्ता के दौरान नगर आयुक्त रोहित कुमार सिन्हा ने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना।
उन्होंने बताया कि फिलहाल भुगतान के लिए राशि उपलब्ध नहीं है, लेकिन कर्मचारियों का वेतन और मानदेय भुगतान उनकी प्राथमिकता में है।
नगर आयुक्त ने भरोसा दिलाया कि
“चाहे सभी लोग छुट्टी पर क्यों न चले जाएं, मैं स्वयं 30 दिसंबर तक देवघर में रहूंगा और जैसे ही राशि उपलब्ध होगी, हर हाल में कर्मचारियों का बकाया वेतन और मानदेय भुगतान कराया जाएगा।”
हालांकि कर्मचारियों ने कहा कि वे तब तक पूरी तरह आश्वस्त नहीं होंगे, जब तक राशि उनके खातों में नहीं आ जाती।
पीएफ–ईपीएफ कटौती के हिसाब की भी उठी मांग
वार्ता के दौरान सफाई कर्मचारियों ने पीएफ और ईपीएफ कटौती को लेकर भी नाराजगी जाहिर की।
कर्मचारियों का कहना था कि उनकी तनख्वाह से नियमित रूप से पीएफ–ईपीएफ की कटौती की जाती है, लेकिन न तो उन्हें इसका स्पष्ट ब्यौरा दिया जाता है और न ही यह जानकारी मिलती है कि राशि समय पर उनके खातों में जमा हो रही है या नहीं।
कर्मचारियों ने मांग की कि पीएफ–ईपीएफ कटौती का पूरा हिसाब उपलब्ध कराया जाए और भविष्य में इसमें किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए।
संघ पदाधिकारियों ने किया कर्मचारियों का समर्थन
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान झारखंड लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन के अध्यक्ष संजय मंडल, संघ नेता बिरजू राम, सुनील राम सहित अन्य पदाधिकारी नगर निगम परिसर में मौजूद रहे।
हालांकि वार्ता के समय संघ का कोई भी पदाधिकारी नगर आयुक्त के कक्ष में कर्मचारियों के साथ नहीं गया और सभी बाहर ही मौजूद रहे।
बाद में मीडिया से बातचीत में संघ पदाधिकारियों ने कहा कि
“सफाई कर्मचारी नगर की रीढ़ हैं। इनके बिना शहर की कल्पना नहीं की जा सकती। इनके वेतन और मानदेय में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
शाम को शांत हुई स्थिति, लेकिन चिंता बरकरार
वार्ता के बाद शाम करीब पांच बजे सफाई कर्मचारी नगर निगम कार्यालय से लौटे।
हालांकि स्थिति शांत जरूर हो गई, लेकिन कर्मचारियों के चेहरों पर संतोष के बजाय चिंता साफ नजर आ रही थी।
कर्मचारियों का कहना था कि जब तक वेतन और मानदेय उनके खातों में नहीं आ जाता, तब तक भरोसा करना मुश्किल है।
भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सफाई कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि आने वाले दिनों में भुगतान में और देरी हुई, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करेंगे।
कर्मचारियों का कहना है कि वे मजबूर होकर सड़क पर उतरे हैं और अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता।
📸 फोटो कैप्शन
देवघर नगर निगम कार्यालय में बकाया वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन करते सफाई कर्मचारी








