
https://gandhi-museum-demand-by-tmbu-gandhi-vichar-department-head-in-deoghar
देवघर में गांधी संग्रहालय की जरूरत: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के गांधी विचार विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के गांधी विचार विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार ने देवघर में गांधी संग्रहालय की स्थापना पर जोर दिया। देवघर डेंटल क्लिनिक में डॉ. राजीव रंजन और शोध संस्थान की टीम ने उनका स्वागत किया। जानिए उन्होंने क्यों कहा कि देवघर गांधी की स्मृतियों को सहेजने का उपयुक्त स्थान है।
देवघर गांधी संग्रहालय, गांधी विचार विभाग, डॉ विजय कुमार, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, गांधी इतिहासघर देवघर, डॉ राजीव रंजन, झारखंड शोध संस्थान, रजत मुखर्जी पक्षी विज्ञानी, देवघर न्यूज़, बैद्यनाथ धाम गांधी संबंध, Gandhi Museum Deoghar, Gandhi Historyghar
देवघर। देवघर में गांधीवादी विचारों और महात्मा गांधी से जुड़े ऐतिहासिक पहलुओं को सुरक्षित रखने की दिशा में एक नया अध्याय जोड़ने की संभावनाएँ प्रबल हो रही हैं। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के गांधी विचार विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार ने गुरुवार को स्थानीय देवघर डेंटल क्लिनिक, करनीबाग में अपने आगमन के दौरान शहर में गांधी संग्रहालय अथवा गांधी इतिहासघर स्थापित किए जाने की जोरदार आवश्यकता व्यक्त की।
उनका यह वक्तव्य न केवल देवघर के बौद्धिक समाज के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहर के सांस्कृतिक व ऐतिहासिक मानचित्र पर एक नई पहचान जोड़ने का अवसर भी प्रस्तुत करता है।
भव्य स्वागत के साथ हुई बातचीत की शुरुआत
डॉ. विजय कुमार का स्वागत देवघर डेंटल क्लिनिक में बेहद गरिमामय तरीके से किया गया।
स्वागत करने वालों में प्रमुख थे—
प्रसिद्ध दंत चिकित्सक और झारखंड शोध संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव रंजन,
संस्थान के सचिव उमेश कुमार,
और देश के जाने-माने पक्षी विज्ञानी रजत मुखर्जी।
इन सभी ने संयुक्त रूप से पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र, तथा ‘वतनपरस्त’ पुस्तक की प्रति भेंट की और गांधी विचार, इतिहास संरक्षण और झारखंडीय शोध पर विस्तृत संवाद का शुभारंभ किया।
देवघर से गांधी के संबंधों के ऐतिहासिक प्रमाण
अपने संबोधन में डॉ. विजय कुमार ने बताया कि इस बात के दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं कि कभी गांधीजी के कुछ बंगाली साथियों ने उन्हें बैद्यनाथ धाम (देवघर) में बसाने का मन बनाया था।
हालांकि कई ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण वे यहाँ स्थायी रूप से नहीं रह सके, लेकिन इसके बावजूद इस शहर के साथ गांधी के विचारात्मक, दार्शनिक, और भौतिक संबंधों के कई आयाम मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि—
> “देवघर से जुड़ी गांधी की स्मृतियों को सुव्यवस्थित तरीके से संजोया जाना चाहिए। इसके लिए गांधी संग्रहालय अथवा इतिहासघर की स्थापना अत्यंत उपयोगी उपक्रम होगा।”
गांधी संग्रहालय क्यों हो आवश्यक?
डॉ. विजय कुमार ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि देवघर न केवल एक धार्मिक नगरी है, बल्कि यह ऐतिहासिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण शहर है। देश की स्वतंत्रता, राष्ट्र निर्माण और गांधीवादी विचारधारा की गूंज यहां कई दशकों तक महसूस की गई है।
उन्होंने कहा कि—
गांधीजी की यात्राओं,
पत्राचार,
आंदोलन से जुड़े दस्तावेज,
स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों की भागीदारी,
तथा गांधीजी के आदर्शों का अनुसरण करने वाली संस्थाओं का इतिहास,
देवघर में संग्रहणीय धरोहर है। इन सभी को जनमानस तक पहुँचाने के लिए एक आधुनिक गांधी संग्रहालय की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
उन्होंने झारखंड शोध संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव रंजन को इस दिशा में सार्थक पहल करने का निर्देश भी दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि—
> “यदि देवघर में गांधी संग्रहालय बनता है, तो संस्थान को मेरा पूरा मार्गदर्शन और सहयोग मिलेगा।”
संग्रहालय शहर को देगा एक नई पहचान
गांधी संग्रहालय बनने से देवघर को एक नई दर्शनीय पहचान भी मिलेगी।
यहां पर—
गांधीजी से जुड़े पुरावशेष,
उनके जीवन से संबंधित फोटो और दस्तावेज,
आंदोलनकालीन साहित्य,
चरखा,
ग्राम स्वराज और सत्याग्रह के मॉडल,
तथा अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सामग्री
प्रदर्शित की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि इससे न केवल स्थानीय लोगों को लाभ होगा बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए देवघर एक वैचारिक पर्यटन स्थल (Heritage & Ideological Tourism Spot) भी बन जाएगा।
पक्षी विज्ञानी रजत मुखर्जी ने भी दिया सहयोग का आश्वासन
कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी रजत मुखर्जी ने भी अपनी ओर से अनमोल सहयोग देने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि उनके पास—
गांधीजी से जुड़े दुर्लभ डाक टिकट,
विभिन्न कालखंडों की करेंसी,
मूल्यवान सिक्के,
और कई संग्रह योग्य चरखे
मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि—
> “उचित मंच मिलने पर मैं अपने संग्रह को नई पीढ़ी के लिए साझा करूंगा। गांधी को समझने और अपनाने में यह संग्रह अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि वे हमेशा झारखंड शोध संस्थान के प्रयासों के साथ खड़े रहेंगे।
नयी पीढ़ी के लिए गांधी को समझने का नया अवसर
डॉ. विजय कुमार, डॉ. राजीव रंजन, रजत मुखर्जी और संस्था के सचिव उमेश कुमार के बीच हुई यह चर्चा देवघर में गांधी विचारधारा के पुनर्स्थापन की दिशा में एक मजबूत कदम है।
यदि यह पहल साकार होती है, तो आने वाली पीढ़ियां गांधी को केवल किताबों में नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभवों, संग्रहालयीय वस्तुओं, और व्याख्यात्मक प्रदर्शनियों के माध्यम से समझ पाएंगी।
निष्कर्ष
देवघर में गांधी संग्रहालय की आवश्यकता पर पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार का वक्तव्य न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहर को सांस्कृतिक रूप से और भी समृद्ध बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी विचार है।
यदि इस पहल पर शीघ्रता से कार्य आरंभ होता है, तो देवघर निकट भविष्य में देश का एक प्रमुख गांधी अध्ययन एवं विरासत केंद्र बन सकता है।











