फाइलों में धूल फांक रहा रामपुर आवास प्रोजेक्ट, छह साल बाद भी लाभुकों को नहीं मिला आशियाना

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**फाइलों में धूल फांक रहा रामपुर आवास प्रोजेक्ट, छह साल बाद भी लाभुकों को नहीं मिला आशियाना

 

नगर आयुक्त को सौंपा मांग पत्र, लाभुक बोले—कर्ज चुका दिया, पर घर अब भी सपना**

 

 

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देवघर के मोहनपुर स्थित रामपुर आवास योजना छह साल बाद भी अधर में लटकी। 665 लाभुकों ने 25 हजार जमा कर बैंक से ऋण तक लिया, लेकिन घर अब तक नहीं मिला। लाभुकों ने नगर आयुक्त से गृह प्रवेश की मांग की।

 

 

 

 

**फाइलों में धूल फांक रहा रामपुर में बन रहा गरीबों का घर, छह साल बाद भी नहीं मिला आशियाना

 

लाभुकों का दल नगर आयुक्त से मिला, सौंपा मांग पत्र**

 

सुनील झा, देवघर।

गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को अपना पक्का घर देने का सपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकल्प के रूप में देश के सामने रखा था। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत झारखंड के कई जिलों में फ्लैट बनकर लाभुकों को सौंपे भी जा चुके हैं, लेकिन देवघर जिले के मोहनपुर प्रखंड के रामपुर स्थित आवास परियोजना आज भी अधर में लटकी पड़ी है। छह साल बीत जाने के बावजूद यहां चयनित लाभार्थी अपने सपनों का घर देखने तक को तरस रहे हैं।

 

इसी समस्या को लेकर सोमवार को रामपुर आवास योजना के लाभुकों का एक दल देवघर नगर निगम कार्यालय पहुंचा। उन्होंने नगर आयुक्त-सह-प्रशासक रोहित कुमार सिन्हा से मुलाकात कर जल्द से जल्द आवंटित फ्लैट में गृह प्रवेश कराने की मांग को लेकर मांग पत्र सौंपा। दल का नेतृत्व अमृत मिश्रा समेत अन्य लाभुक कर रहे थे। नगर आयुक्त ने लाभुकों की समस्याएं सुनने के बाद उन्हें मंगलवार को पुनः विस्तृत चर्चा के लिए बुलाया है।

 

 

 

 

2018 में भूमि पूजन, 18 महीने में पूरा होने का वादा — पर 6 साल बाद भी अधूरा काम

 

लाभुक अमृत मिश्रा ने बताया कि रामपुर फ्लैट योजना का भूमि पूजन वर्ष 2018 में बड़े स्तर पर किया गया था। उस समय स्पष्ट घोषणा की गई थी कि निर्माण कार्य 18 माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा और लाभुकों को चाबी सौंप दी जाएगी।

 

लेकिन हकीकत यह है कि 18 महीनों की समय सीमा आज छह साल में बदल चुकी है। इस दौरान निर्माण एजेंसी JUDCO (जुडको) ने f और g bolck ब्लॉक में लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा कर भी दिया, लेकिन शेष फ्लैटों का निर्माण आधा-अधूरा छोड़ दिया गया है।

 

लाभुकों ने बताया कि—

 

फ्लैटों के टॉयलेट तक की खिड़कियां उखड़ी हुई हैं,

 

कई जगह प्लास्टर झड़ चुका है,

 

बिजली-पानी की लाइनें अधूरी पड़ी हैं,

 

सुरक्षा व्यवस्था और फिनिशिंग का काम अधर में है।

 

 

इस हालत में यह कहना मुश्किल है कि योजना कब पूरी होगी और लाभुक कब अपने घरों में प्रवेश कर सकेंगे।

 

 

 

 

2022 तक पूरा होना था ड्रीम प्रोजेक्ट, पर आज भी सिर्फ फाइलों में अटका

 

केंद्र सरकार का यह एक ड्रीम प्रोजेक्ट था, जिसके तहत 2022 तक देश के हर गरीब को पक्का घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। इसी क्रम में देवघर में भी करीब 42 करोड़ रुपये की लागत से 665 फ्लैट बनाए जाने की स्वीकृति दी गई।

 

लगभग 3000 आवेदकों में से लॉटरी सिस्टम के जरिए लाभुकों का चयन किया गया।

 

आवेदन के समय लाभुकों से 5000 रुपये और चयनित होने पर 20 हजार रुपये जमा कराए गए।

 

कुल 25,000 रुपये लाभुकों को अग्रिम भुगतान करना पड़ा।

 

कई लाभुकों ने बैंक से ऋण लेकर 4.50 लाख रुपये तक की किस्त भी नगर निगम को जमा कर दी।

 

 

इसके बावजूद उन्हें आज तक उनके घर की एक चाबी तक नहीं सौंपी गई है।

इससे लाभुकों में बड़ी चिंता है कि उनका पैसा कहीं फंस तो नहीं गया और क्या वे कभी अपने घर में प्रवेश कर पाएंगे।

 

 

 

 

विभाग ने ठीकरा ठेकेदार के सिर फोड़ा—जुडको ने हैंडओवर नहीं किया

 

जब इस मामले में विभागीय अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने पूरा ठीकरा निर्माण एजेंसी जुडको के ऊपर फोड़ दिया।

 

अधिकारियों का कहना है कि—

 

अभी तक जुडको ने एफ और जी ब्लॉक सहित अन्य फ्लैटों का हैंडओवर पूरा नहीं किया है।

 

कई जगहों पर काम बचा है, जिस कारण नगर निगम लाभुकों को चाबी उपलब्ध नहीं करा सकता।

 

 

यह जवाब सुनकर लाभुकों का सवाल और गहरा हो गया कि आखिर छह साल में जुडको ने काम पूरा क्यों नहीं किया?

अगर निर्माण एजेंसी देरी कर रही है, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

सरकारी धन का नुकसान किसके जिम्मे जाएगा?

 

 

 

 

लाभुकों की चिंता—कहीं ऋण और जमा राशि फंस न जाए

 

लाभुकों ने बताया कि उन्होंने बड़ी उम्मीदों से यह योजना चुनी थी। कई लोग किराए के घरों में रहते हुए वर्षों से बैंक का EMI जमा कर रहे हैं। कुछ ने बेटी-बेटे की शादी के लिए बचाई रकम भी इस फ्लैट में लगा दी, लेकिन बदले में कुछ नहीं मिला।

 

अब स्थिति यह है कि—

 

लाभुकों को डर है कि क्या उन्हें घर मिलेगा भी या नहीं!

 

बैंक का EMI बढ़ता जा रहा है।

 

जमा की गई 25 हजार की राशि और 4.50 लाख की किस्त का क्या होगा, इसकी चिंता अलग।

 

 

लाभुकों ने नगर आयुक्त से स्पष्ट कहा कि यदि जल्द ही आवास नहीं मिला तो वे बड़े आंदोलन को मजबूर होंगे।

 

 

 

 

सबसे बड़ा सवाल — 6 साल में घर क्यों नहीं मिला, दोषी कौन?

 

छह साल की लगातार देरी ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं :

 

1. 665 फ्लैट तैयार होकर भी लाभार्थियों को चाबी क्यों नहीं मिली?

 

 

2. 42 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी योजना अधूरी क्यों है?

 

 

3. जुडको के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

 

 

4. लाभुकों से ली गई राशि और बैंक ऋण का जिम्मेदार कौन होगा?

 

 

5. सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

 

 

 

विभाग के अधिकारी सिर्फ यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि “काम जल्द ही पूरा करा दिया जाएगा”, लेकिन छह साल से यही आश्वासन मिलता आ रहा है।

 

 

 

 

लाभुकों की मांग — फौरन गृह प्रवेश कराया जाए या स्पष्ट समयसीमा दी जाए

 

लाभुकों का कहना है कि—

 

नगर निगम उन्हें स्पष्ट बताए कि काम कब तक पूरा होगा।

 

जुडको से तुरंत हैंडओवर लेकर आवंटित फ्लैटों की चाबी सौंपी जाए।

 

अधूरे कार्यों की सूची जारी कर जिम्मेदार एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई हो।

 

लाभुकों के जमा पैसे और ऋण का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

 

 

उन्होंने नगर आयुक्त से मांग की है कि उन्हें और देर न कराते हुए अपने आवंटित घरों में प्रवेश करने दिया जाए।

 

 

 

 

नगर आयुक्त की प्रतिक्रिया

 

नगर आयुक्त रोहित कुमार सिन्हा ने लाभुकों की समस्याएं गंभीरता से सुनते हुए कहा है कि—

 

वे इस मामले पर अलग से बैठक करेंगे,

 

निर्माण एजेंसी से रिपोर्ट तलब की जाएगी,

 

और मंगलवार को लाभुकों को विस्तृत अपडेट दिया जाएगा।

 

 

लाभुकों को उम्मीद है कि इस बार उनकी आवाज सुनी जाएगी और उन्हें न्याय मिलेगा।

 

 

 

 

निष्कर्ष

 

रामपुर आवास योजना देवघर जिले के लिए एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था, लेकिन छह साल की देरी और अधूरे निर्माण ने इसे उपेक्षा का प्रतीक बना दिया है। लाभुकों का विश्वास टूट चुका है और उनके सामने आर्थिक संकट गहरा रहा है। सरकार और विभाग को जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि गरीबों को वह छत मिल सके जिसकी उन्हें वर्षों से प्रतीक्षा है।

Baba Wani
Author: Baba Wani

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