विराट हिंदू सम्मेलन में सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण पर हुआ मंथन

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देवघर के बंधा बैजनाथपुर दुर्गा मंदिर प्रांगण में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण पर मंथन हुआ। वक्ताओं ने युवाओं से संस्कृति व संस्कारों को अपनाने की अपील की।

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विराट हिंदू सम्मेलन में सनातन संस्कृति, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण पर हुआ मंथन

वेद विद्यालय के विद्यार्थियों के स्वस्ति वाचन से हुआ शुभारंभ, अतिथियों का अंगवस्त्र व श्रीफल देकर सम्मान

न्यूज़ डेस्क | देवघर | 15 मार्च 2026

देवघर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में वेद विद्यालय के बच्चों का स्वास्ति वाचन

देवघर शहर के विद्यापति बस्ती स्थित बंधा बैजनाथपुर दुर्गा मंदिर प्रांगण में रविवार को आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश देने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन बन गया। इस सम्मेलन में सनातन संस्कृति के संरक्षण, हिंदू समाज की एकता और राष्ट्र निर्माण में समाज की भूमिका जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजसेवी, धर्माचार्य, युवा और स्थानीय नागरिक शामिल हुए, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर उठा।

सम्मेलन का उद्देश्य समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाना, लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ना और नई पीढ़ी को सनातन मूल्यों के प्रति प्रेरित करना था। वक्ताओं ने अपने संबोधनों में कहा कि जब समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझकर उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेता है, तब समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत होते हैं।

वैदिक मंत्रोच्चार से बना आध्यात्मिक वातावरण

कार्यक्रम का शुभारंभ स्थानीय वेद विद्यालय के नन्हे विद्यार्थियों द्वारा किए गए स्वस्ति वाचन से हुआ। वैदिक मंत्रों की ध्वनि से पूरे मंदिर प्रांगण में आध्यात्मिक वातावरण बन गया और उपस्थित लोगों ने श्रद्धा भाव से कार्यक्रम की शुरुआत का स्वागत किया।
इसके बाद मंचासीन अतिथियों ने भारत माता और राम दरबार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। दीप प्रज्वलन के साथ ही सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई। कार्यक्रम स्थल पर भारत माता के जयकारों और धार्मिक नारों से वातावरण उत्साहपूर्ण हो गया।

सनातन संस्कृति भारत की आत्मा : विरेंद्र विमल

सम्मेलन के मुख्य वक्ता विरेंद्र विमल ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन संस्कृति भारत की पहचान और आत्मा है। हजारों वर्षों से चली आ रही यह संस्कृति आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज के सामने कई प्रकार की चुनौतियां हैं, ऐसे में आवश्यक है कि लोग अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को समझें तथा उन्हें आगे बढ़ाने का कार्य करें। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से अपील करते हुए कहा कि वे अपने इतिहास और संस्कृति के प्रति जागरूक बनें और समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

सनातन धर्म जीवन जीने की समग्र पद्धति : डॉ गोपाल जी शरण

कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए डॉ गोपाल जी शरण ने कहा कि हिंदू समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विविधता है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक संतुलित और समग्र पद्धति है।

उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में प्रकृति, मानवता और समाज के प्रति सम्मान का भाव निहित है। यदि लोग अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाएं तो समाज में भाईचारा और समरसता स्वतः मजबूत हो जाएगी।

धर्म जीवन का आधार : स्वामी सीताराम शरण जी महाराज

स्वामी सीताराम शरण जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि धर्म केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन का आधार है। जब समाज में धर्म, संस्कार और नैतिकता का विकास होता है, तब समाज मजबूत बनता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन समाज को जागरूक करने और लोगों को एक मंच पर लाने का कार्य करते हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में धर्म, सेवा और सदाचार को अपनाएं।

नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाना जरूरी : बाल विदुषी लाडली शरण

बाल विदुषी लाडली शरण ने कहा कि सनातन संस्कृति का मूल आधार ज्ञान, भक्ति और सेवा है। उन्होंने कहा कि आज की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को बचपन से ही संस्कृति और परंपरा की शिक्षा दी जाए तो समाज का भविष्य उज्ज्वल होगा। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को गर्व के साथ अपनाने का आह्वान किया।

समाज की शक्ति उसकी एकता में : डॉ आनंद वर्धन

संघ के नगर कार्यवाह डॉ आनंद वर्धन ने अपने संबोधन में कहा कि समाज की शक्ति उसकी एकता और संगठन में निहित होती है। ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा देने का कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि जब समाज के लोग एक साथ आकर अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का संकल्प लेते हैं, तब समाज में नई चेतना का संचार होता है। उन्होंने युवाओं से समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी करने की अपील की।

समाज को जोड़ने का उद्देश्य : महातम सिंह

कार्यक्रम के संयोजक महातम सिंह ने कहा कि विराट हिंदू सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता लाना और लोगों को सनातन संस्कृति से जोड़ना है। इस प्रकार के आयोजन समाज में एकजुटता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
सह संयोजक डॉ राजीव रंजन ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि समाज को संगठित करने में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होता है, तब राष्ट्र भी मजबूत बनता है।

अतिथियों का अंगवस्त्र व श्रीफल देकर सम्मान

सम्मेलन के दौरान अतिथियों का सम्मान भी किया गया। डॉ पूजा राय एवं संघ के स्वयंसेवकों द्वारा सभी अतिथियों को अंगवस्त्र और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अतिथियों का स्वागत किया।
सम्मान समारोह ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया और उपस्थित लोगों ने इसे एक प्रेरणादायक क्षण के रूप में अनुभव किया।

बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित

सम्मेलन में स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ युवाओं और महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी रही। कार्यक्रम में रामनरेश सिंह, राजकुमार, रुपेश कुमार, अशोक चौधरी, अशोक भगत, अनुज झा, मनोज सिंह, सुनील गुप्ता, सुभाष चौधरी, मुरली कुमार, कल्याण कुमार, सूरज कुमार, राजीव पांडेय, बिंदु पाठक, डॉ पूजा राय, पुण्य श्लोक आर, नीरज कुमार, विनोद कुमार, ओम प्रकाश कुमार, विनायक कुमार, जितेंद्र सिंह, विष्णुकांत झा, गौरी शंकर शर्मा, देवकरण चौधरी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना रहा और लोगों ने सम्मेलन को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग दिया।

समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने का संदेश

सम्मेलन के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सांस्कृतिक जागरूकता, एकता और सकारात्मक सोच को मजबूत करने का कार्य करते हैं।

वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर सनातन संस्कृति के संरक्षण और उसके प्रचार-प्रसार के लिए कार्य करना चाहिए। समाज में जागरूकता और एकता के माध्यम से ही सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

प्रश्न: विराट हिंदू सम्मेलन कहां आयोजित हुआ?

उत्तर: देवघर के विद्यापति बस्ती स्थित बंधा बैजनाथपुर दुर्गा मंदिर प्रांगण में।

प्रश्न: सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उत्तर: सनातन संस्कृति के संरक्षण, हिंदू समाज की एकता और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना।

प्रश्न: कार्यक्रम में मुख्य वक्ता कौन थे?

उत्तर: विरेंद्र विमल, डॉ गोपाल जी शरण, स्वामी सीताराम शरण जी महाराज और बाल विदुषी लाडली शरण सहित अन्य वक्ता।

प्रश्न: कार्यक्रम की शुरुआत कैसे हुई?

उत्तर: वेद विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा स्वस्ति वाचन और वैदिक मंत्रोच्चार से।

देवघर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में वक्ताओं का संबोधन

देवघर के बंधा बैजनाथपुर दुर्गा मंदिर प्रांगण में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में मौजूद श्रद्धालु और अतिथि।

निष्कर्ष

देवघर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक एकता का संदेश देने वाला मंच साबित हुआ। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि जब समाज अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को समझकर आगे बढ़ाने का संकल्प लेता है, तब सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।

Disclaimer:
यह समाचार उपलब्ध जानकारी और आयोजन स्थल से प्राप्त विवरण के आधार पर तैयार किया गया है। आयोजन से संबंधित तथ्य आयोजकों व उपस्थित लोगों के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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