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✅ स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी सावित्री देवी का निधन | बादल पत्रलेख ने दी श्रद्धांजलि
✅ सारवां, देवघर में स्वतंत्रता सेनानी स्व. श्याम सुंदर साह की पत्नी सावित्री देवी का 97 वर्ष की आयु में निधन। पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख सहित कई गणमान्यों ने दी श्रद्धांजलि।
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⭐ स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी सावित्री देवी का 97 वर्ष की आयु में निधन
पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख सहित कई गणमान्यों ने दी श्रद्धांजलि
देवघर। झारखंड के देवघर जिले के सारवां प्रखंड स्थित गोलाबाजार में बुधवार को एक दुखद घटना घटित हुई, जब प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी स्व. श्याम सुंदर साह की धर्मपत्नी सावित्री देवी का 97 वर्ष की आयु में उनके पैतृक आवास पर निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और स्थानीय लोगों में गहरा दुःख व्याप्त हो गया।
परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सावित्री देवी अपने पीछे नाती–पोते से भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनका अंतिम संस्कार सुल्तानगंज गंगा घाट पर विधि-विधान से किया गया, जहां परिजन, रिश्तेदार और क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे। उनके अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा, जो उनके प्रति लोगों के सम्मान और प्रेम को दर्शाता है।
सावित्री देवी के निधन की सूचना मिलते ही कई गणमान्य लोग देर रात गोलाबाजार स्थित उनके आवास पहुंचे। इनमें पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख और समाजसेवी रामकिशोर सिंह प्रमुख रूप से शामिल थे। उन्होंने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवार को सांत्वना प्रदान की। उपस्थित लोगों ने स्वतंत्रता सेनानी स्व. श्याम सुंदर साह और उनकी धर्मपत्नी के संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए कहा कि उनका योगदान समाज और इतिहास के लिए अमूल्य रहा है।
शोक व्यक्त करते हुए पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि “जीवन और मृत्यु प्रकृति का अटल सत्य है, लेकिन देश को आजाद कराने में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान सदैव स्मरणीय रहता है।” उन्होंने आगे कहा कि सारवां क्षेत्र स्वतंत्रता आंदोलन के कई अनाम-गुमनाम योद्धाओं की भूमि रही है, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परंतु समय के साथ इन महान विभूतियों की संख्या कम होती जा रही है, जो समाज के लिए बड़ी क्षति है।
पत्रलेख ने यह भी कहा कि स्व. श्याम सुंदर साह जैसे वीर स्वतंत्रता सेनानी और उनकी धर्मपत्नी सावित्री देवी जैसे प्रेरणास्रोत लोगों की जीवन-गाथा से समाज को सीख लेनी चाहिए। “इनके त्याग, तपस्या और संघर्षों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सबका नैतिक दायित्व है,” उन्होंने कहा और ईश्वर से सावित्री देवी की आत्मा की शांति एवं परिवार को धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की।
स्थानीय ग्रामीणों ने भी सावित्री देवी के निधन को क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उनका कहना था कि वे सरल, मिलनसार और सदैव समाजहित में सोच रखने वाली महिला थीं। स्वतंत्रता सेनानी के परिवार से होने के कारण उन्हें समाज में विशेष सम्मान प्राप्त था। ग्रामीणों ने बताया कि सावित्री देवी हमेशा लोगों के सुख-दुख में साथ खड़ी रहती थीं और उनकी सादगी व जीवन मूल्यों से हर व्यक्ति प्रभावित हुआ है।
सारवां प्रखंड के गोलाबाजार में इस समय शोक का माहौल है, लेकिन साथ ही लोगों में यह भाव भी है कि सावित्री देवी जैसे धैर्य, त्याग और संघर्ष के प्रतीक व्यक्तित्व हमेशा समाज को प्रेरणा देते रहेंगे। स्वतंत्रता सेनानी स्व. श्याम सुंदर साह के परिवार का यह इतिहास आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम और कर्तव्यबोध की प्रेरणा देता रहेगा।











