नगर पुस्तकालय के समीप अचेत अवस्था में पड़े वृद्ध को समाजसेवियों की तत्परता से मिली नई जिंदगी

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देवघर नगर पुस्तकालय के पास अचेत पड़े वृद्ध को समाजसेवियों ने एम्बुलेंस बुलाकर सदर अस्पताल में भर्ती कराया। समय पर मिले सहयोग से जान बची।

 

 

 

नगर पुस्तकालय के समीप अचेत अवस्था में पड़े वृद्ध को समाजसेवियों की तत्परता से मिली नई जिंदगी

 

युवा समाजसेवी दशरथ राय व साथियों ने एम्बुलेंस बुलाकर सदर अस्पताल में कराया भर्ती

 

देवघर।

देवघर शहर में मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करने वाली एक घटना शनिवार को तब सामने आई, जब नगर पुस्तकालय के समीप पिछले पांच से छह दिनों से अचेत अवस्था में पड़े एक वृद्ध को समाजसेवियों की सक्रियता ने नई जिंदगी दे दी। राहगीरों और स्थानीय लोगों के अनुसार वृद्ध कई दिनों से सड़क किनारे पड़े थे और उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। स्थिति यह थी कि उनके पूरे शरीर पर चींटियां लग चुकी थीं, फिर भी वे जीवित थे और मदद की जरूरत में थे।

 

पांच–छह दिनों से सड़क किनारे पड़े थे वृद्ध, हालत हो चुकी थी नाजुक

 

स्थानीय नागरिकों ने बताया कि वृद्ध व्यक्ति की हालत प्रतिदिन खराब होती जा रही थी। कई लोग उन्हें देखकर चिंतित थे, लेकिन किसी ने पहल नहीं की। शनिवार को जब उनकी स्थिति गंभीर होने लगी, तब कुछ राहगीरों ने यह सूचना शहर के युवा समाजसेवियों को दी। सूचना मिलते ही समाजसेवी दशरथ राय, जय नारायण दास और अजय कुमार तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति को समझते हुए तत्काल मदद के लिए कदम उठाए।

 

समाजसेवियों ने बुलवाई एम्बुलेंस, तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू

 

घटनास्थल की गंभीरता देखते हुए समाजसेवियों ने बिना देर किए आपातकालीन सेवा 108 एम्बुलेंस पर कॉल किया। कुछ ही देर में एम्बुलेंस टीम मौके पर पहुंच गई। वृद्ध की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया और तत्काल सदर अस्पताल देवघर के लिए रवाना किया गया।

 

एम्बुलेंस टीम में शामिल तकनीकी सहायक मो. नौशाद, विपिन कुमार ठाकुर, वार्ड बॉय ललन, अभिषेक और बबलू ने मिलकर वृद्ध को सावधानीपूर्वक स्ट्रेचर पर स्थानांतरित किया और सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाया।

 

सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने की तत्परता की सराहना

 

सदर अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम ने वृद्ध का तुरंत उपचार शुरू कर दिया। चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि मरीज की स्थिति बेहद चिंताजनक थी और यदि सहायता कुछ देर और न मिलती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

 

डॉक्टरों ने समाजसेवियों और एम्बुलेंस कर्मियों की तत्परता की प्रशंसा करते हुए कहा कि—

 

> “समय पर मिली सहायता ने मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे मानवीय प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं।”

 

 

 

अस्पताल सूत्रों के अनुसार वृद्ध की स्थिति फिलहाल निगरानी में है और उपचार जारी है।

 

छात्र नेताओं और स्थानीय युवाओं ने निभाई बड़ी भूमिका

 

रेस्क्यू अभियान के दौरान समाजसेवियों के साथ कई स्थानीय युवा और छात्र नेता मौजूद रहे। इनमें सत्यम झा, राकेश मंडल सहित दर्जनों लोग शामिल थे, जिन्होंने मौके पर भीड़ को नियंत्रित करने, एम्बुलेंस के लिए जगह बनाने और वृद्ध को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 

समाजसेवियों का कहना है कि—

 

> “मानवता सबसे बड़ा धर्म है। किसी जरूरतमंद की मदद कर पाना ही सबसे बड़ा पुण्य है।”

 

 

 

शहर के सामाजिक संगठनों ने की सराहना

 

इस मानवीय पहल की खबर फैलते ही देवघर के कई सामाजिक संगठनों ने युवा समाजसेवियों के कार्य की सराहना की। संगठनों का कहना है कि ऐसी घटनाएं समाज में जागरूकता और एम्बुलेंस सेवाओं की महत्ता को फिर से रेखांकित करती हैं।

 

कई संगठनों ने यह भी सुझाव दिया कि शहर में ऐसे असहाय लोगों की पहचान कर उनके लिए भोजन, दवा और आश्रय की व्यवस्था करने की दिशा में संयुक्त अभियान चलाया जाना चाहिए।

 

मानवता की मिसाल पेश करती घटना

 

यह पूरी घटना न सिर्फ समाज में जागरूकता बढ़ाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि यदि समय पर किसी जरूरतमंद को मदद मिल जाए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। कठिन परिस्थितियों और भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्र के बीच समाजसेवियों और एम्बुलेंस कर्मियों ने जिस तत्परता और संवेदनशीलता का परिचय दिया, वह सराहनीय है।

 

देवघर जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर में मानवता का यह उदाहरण एक सकारात्मक संदेश देता है कि समाज अभी भी संवेदनशील है और सही समय पर सही दिशा में कदम उठाया जाए तो कोई भी जिंदगी बच सकती है।

 

 

 

देवघर समाजसेवी

 

नगर पुस्तकालय देवघर

 

अचेत अवस्था में वृद्ध

 

सदर अस्पताल देवघर

 

108 एम्बुलेंस सेवा

 

युवा समाजसेवी देवघर

Baba Wani
Author: Baba Wani

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