
इलेक्शन कमीशन बीजेपी कमीशन के रूप में काम कर रही है: वृंदा करात
देवघर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की वरिष्ठ नेता और देश की जानी-मानी वामपंथी हस्ती वृंदा करात ने देवघर पहुंचकर केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि “आज की तारीख में इलेक्शन कमीशन अपनी संवैधानिक भूमिका से हटकर बीजेपी कमीशन के रूप में काम कर रहा है। यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।”
उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। करात ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को जिस तरीके से नियंत्रित किया जा रहा है, वह जनता की आवाज़ दबाने की कोशिश है और जनता इसके खिलाफ सड़क पर उतरकर जवाब दे रही है।
चुनाव आयोग पर सवाल, लोकतंत्र पर खतरे की चेतावनी
वृंदा करात ने कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका अब पक्षपातपूर्ण दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्यों में चुनावी प्रक्रियाओं के दौरान ऐसी घटनाएँ सामने आईं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है।
उनके अनुसार, जब चुनाव कराने वाली संस्था ही निष्पक्ष न रहे, तो आम जनता का विश्वास डगमगाना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का नाम बदलकर “बीजेपी कमीशन” कर देना ही उचित होगा, क्योंकि उसकी कार्यशैली पूरी तरह से सत्तारूढ़ दल के हित में दिखाई देती है।
करात ने कहा कि यह स्थिति लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए ऐसे संस्थानों का निष्पक्ष और मजबूत होना जरूरी है, मगर आज इनकी स्वतंत्रता को खत्म किया जा रहा है।
SIR नीति को बताया गरीबों-आदिवासियों के खिलाफ साजिश
झारखंड में लागू SIR (सामाजिक प्रभाव सर्वेक्षण आधारित भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया) को उन्होंने गरीबों और आदिवासियों के खिलाफ “बड़ी साजिश” बताया।
उन्होंने कहा कि गरीब, किसान, मजदूर और आदिवासी पहले से ही विस्थापन, बेरोजगारी और संसाधनों की लूट झेल रहे हैं, ऐसे में SIR जैसी नीतियाँ उनके अधिकारों को और छीनने का काम कर रही हैं।
करात ने कहा कि उनकी पार्टी माकपा सिर्फ चुनाव आधारित संगठन नहीं है, बल्कि संघर्ष आधारित पार्टी है। “हम पांच साल लगातार जनता के मुद्दों को उठाते हैं, चाहे सड़क पर हों या सदन में। लड़ाई जनता की है और जनता के साथ मिलकर हम इसे जारी रखेंगे।”
बिहार में विपक्ष नहीं, लेकिन सड़कों पर बड़ा विपक्ष मौजूद: करात
बिहार की राजनीतिक स्थिति पर बोलते हुए करात ने कहा कि विधानसभा में भले ही विपक्ष की कमी है, लेकिन सड़कों पर विपक्ष बहुत मजबूत है।
उन्होंने कहा, “किसान और मजदूर आज इस देश का सबसे बड़ा विपक्ष हैं। वे सड़कों पर सरकार की गलत नीतियों का विरोध कर रहे हैं और भविष्य में भी विरोध जारी रहेगा। जो संसद में नहीं दिख रहा, वो जनआंदोलन के रूप में पूरे देश में दिख रहा है।”
करात के अनुसार, सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, जनता की ताकत को दबाया नहीं जा सकता।
कोयला खदानों को निजी हाथों में देना गलत: करात
वृंदा करात ने झारखंड में कोयला खदानों के संचालन को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने कोयला खदानों को अपनी पसंदीदा निजी कंपनियों को सौंप दिया है, जबकि यह देश की संपत्ति है और इससे जुड़े फैसले ग्राम सभाओं की मंजूरी के बिना नहीं होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि झारखंड के कई गांवों में ग्राम सभा की बैठकों तक नहीं हो रही हैं और स्थानीय लोगों को उनकी भूमि व अधिकारों से बेदखल किया जा रहा है।
उन्होंने इसे संविधान की पांचवीं अनुसूची और PESA कानून का उल्लंघन बताया।
करात ने कहा कि आदिवासी इलाकों में संसाधनों की लूट रोकने के लिए राज्य सरकार को केंद्र के खिलाफ मजबूत रुख अपनाना चाहिए।
राज्य सरकार से मजबूत विरोध की मांग
वृंदा करात ने स्पष्ट कहा कि झारखंड सरकार को निजीकरण और भूमि अधिग्रहण की इन नीतियों का कड़ा विरोध करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार जनता के अधिकारों की रक्षा के प्रति गंभीर है, तो उसे SIR नीति और कोयला खदानों की निजीकरण प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।
“गरीबों और आदिवासियों को विस्थापित कर विकास नहीं किया जा सकता। विकास का असली मतलब होता है लोगों को उनकी भूमि, जंगल, पानी और पहचान के साथ सुरक्षित रखना।”
माकपा की भूमिका और जनसंघर्ष पर जोर
वृंदा करात ने कहा कि माकपा हमेशा जनता के साथ खड़ी रही है और आगे भी जनसंघर्ष में सबसे आगे रहेगी। उन्होंने बताया कि पार्टी लगातार ग्राम सभाओं, मजदूर संगठनों, किसान यूनियनों और आदिवासी समुदायों के बीच जाकर नीतियों को समझा रही है और आंदोलन को मजबूत कर रही है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से मजदूरों और किसानों की आवाज़ देशभर में उठ रही है, वह आने वाले समय में बड़े जनांदोलन का रूप ले सकती है।
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देवघर में वृंदा करात ने कहा कि इलेक्शन कमीशन बीजेपी कमीशन की तरह काम कर रही है। SIR नीति को गरीबों-आदिवासियों के खिलाफ साजिश बताया और सरकार पर निशाना साधा।











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