अंतिम दिन भक्ति में डूबा भयहरण: मानस कथा और जागरण से सजी नौवें दिन की अलौकिक शाम

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देवघर के भयहरण गांव स्थित दुबे बाबा मंदिर में नौ दिवसीय मानस पाठ महायज्ञ के अंतिम दिन भक्ति, कथा और जागरण का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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अंतिम दिन भक्ति में डूबा भयहरण: मानस कथा और जागरण से सजी नौवें दिन की अलौकिक शाम

राम नाम के जयकारों से गूंजा दुबे बाबा मंदिर परिसर, श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में बिताई रात

संवाददाता | देवघर | 03 अप्रैल 2026

देवघर जिले के देवीपुर प्रखंड अंतर्गत महुआडांड़ पंचायत के भयहरण (बेहरन) गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्री श्री 108 नवाह्न पारायण मानस पाठ महायज्ञ का अंतिम दिन आस्था, श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम के रूप में संपन्न हुआ। प्राचीन दुबे बाबा मंदिर परिसर में आयोजित इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति के साथ ही पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया।

महायज्ञ का यह 40वां वर्ष था, जो 25 मार्च से प्रारंभ होकर 2 अप्रैल तक चला। नौ दिनों तक चले इस आयोजन में प्रतिदिन पूजन, रामचरित मानस पाठ, हवन और संध्या आरती के माध्यम से पूरे गांव का वातावरण भक्तिमय बना रहा। अंतिम दिन मंदिर परिसर में “जय श्री राम” के गगनभेदी जयकारों ने माहौल को पूरी तरह दिव्य बना दिया।

सुबह से ही गूंजे शंख और मंत्र, वातावरण हुआ पावन

महायज्ञ के अंतिम दिन सुबह की शुरुआत शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। जैसे ही सूरज की पहली किरण मंदिर परिसर में पड़ी, श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना में जुटे नजर आए।

पूरे दिन हवन और अनुष्ठान चलते रहे, जिससे वातावरण में यज्ञ की पवित्र सुगंध फैलती रही। ग्रामीणों का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और एकता का प्रतीक है।

अयोध्या से आए आचार्य ने सुनाई भावविभोर कर देने वाली कथा

अंतिम दिन की संध्या विशेष रूप से आध्यात्मिक रही। अयोध्या से पधारे आचार्य शुभम जी महाराज ने रामचरित मानस की कथा का रसपान कराया। उनके मधुर और ओजस्वी वचनों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

जब उन्होंने भगवान राम के आदर्श, त्याग और मर्यादा का वर्णन किया, तो कई श्रद्धालु भावुक हो उठे। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि “रामचरित मानस केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।”

उनके इस संदेश ने उपस्थित लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ी। कथा समाप्त होते ही पूरा परिसर “सीता-राम” के जयकारों से गूंज उठा।

जागरण में भोजपुरी भजनों पर झूमे श्रद्धालु

रात्रि होते-होते आयोजन का स्वरूप और भी भव्य हो गया। रात 10 बजे से शुरू हुए जागरण कार्यक्रम में भोजपुरी गायक चंदन यादव और गायिका अदिति राज ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय बना दिया।

भजनों की धुन पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और देर रात तक पूरा मंदिर परिसर भक्ति संगीत में डूबा रहा।
रामगढ़ से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत राम दरबार की आकर्षक झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। झांकी के दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण साक्षात उपस्थित हों।

भक्ति, सुगंध और दीपों की रोशनी से सजा अलौकिक दृश्य

मंदिर परिसर में फैली अगरबत्ती और हवन की सुगंध, दीपों की जगमगाहट और भजनों की मधुर ध्वनि ने ऐसा वातावरण तैयार किया, जिसने हर किसी को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

ग्रामीणों के अनुसार, इस आयोजन में अयोध्या, काशी और वृंदावन जैसी धार्मिक स्थलों की झलक देखने को मिली। हर व्यक्ति के चेहरे पर शांति और संतोष साफ झलक रहा था।

आयोजन की सफलता में ग्रामीणों और समिति की अहम भूमिका

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में आचार्य मुरलीधर पांडेय के सान्निध्य में मुख्य यजमान किशोर झा एवं उनकी धर्मपत्नी पूर्व मुखिया दुर्गा देवी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

दुबे बाबा पूजा सह यज्ञ समिति के अध्यक्ष शिवानंद शाही प्रधान जी सहित सभी सदस्यों और ग्रामीणों ने आयोजन को सफल बनाने में अहम योगदान दिया।
आयोजन समिति ने बताया कि यह परंपरा पूर्वजों के समय से चली आ रही है और हर वर्ष इसे और भव्य रूप देने का प्रयास किया जाता है।

पूर्णाहुति के साथ भावुक विदाई, अगले वर्ष फिर मिलने का संकल्प

महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद यज्ञाचार्य, कथावाचक और अन्य ब्राह्मणों को विधिवत दान-दक्षिणा देकर विदाई दी गई। इस दौरान वातावरण भावुक हो गया।
श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर से इसी उत्साह और भक्ति के साथ आयोजन करने का संकल्प लिया।
भयहरण गांव का यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश देता है कि जब आस्था, परंपरा और सामूहिक सहयोग एक साथ आते हैं, तो हर आयोजन दिव्यता का रूप ले लेता है।

निष्कर्ष

दुबे बाबा मंदिर में आयोजित यह नौ दिवसीय मानस पाठ महायज्ञ न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह गांव की एकता, आस्था और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक बनकर उभरा। अंतिम दिन का भक्ति से सराबोर माहौल श्रद्धालुओं के दिलों में लंबे समय तक यादों के रूप में जीवित रहेगा।

Q1. यह महायज्ञ कितने दिनों तक चला?

A. यह महायज्ञ 9 दिनों तक चला, जिसकी शुरुआत 25 मार्च और समापन 2 अप्रैल को हुआ।

Q2. आयोजन कहां हुआ था?

A. यह आयोजन देवघर जिले के भयहरण गांव स्थित दुबे बाबा मंदिर परिसर में हुआ।

Q3. कथा किसने सुनाई?

A. अयोध्या से आए आचार्य शुभम जी महाराज ने रामचरित मानस की कथा सुनाई।

Q4. जागरण में कौन-कौन कलाकार शामिल हुए?

A. जागरण में भोजपुरी गायक चंदन यादव और गायिका अदिति राज ने भजन प्रस्तुत किए।

Q5. इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

A. इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक आस्था को मजबूत करना और गांव की एकता को बनाए रखना है।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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