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देवघर के मधुपुर प्रखंड स्थित पथार गांव का प्राचीन बजरंगबली मंदिर रामनवमी पर आस्था का केंद्र बना। जानें मंदिर का इतिहास, परंपरा और भक्तों की आस्था की कहानी।
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पथार गांव का प्राचीन बजरंगबली मंदिर बना आस्था का केंद्र, रामनवमी पर उमड़ा भक्तों का सैलाब
सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपरा आज भी जीवित, भगवा ध्वज और रोशनी से सजा मंदिर
संवाददाता | देवघर | 28 मार्च 2026

देवघर के मधुपुर प्रखंड स्थित पथार गांव का प्राचीन मनोकामना बजरंगबली मंदिर इन दिनों रामनवमी 2026 के पावन अवसर पर आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन गया है। पथार गांव का यह बजरंगबली मंदिर अपनी ऐतिहासिक विरासत, चमत्कारी मान्यताओं और जीवंत परंपराओं के कारण दूर-दराज के श्रद्धालुओं को भी आकर्षित कर रहा है। रामनवमी के मौके पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।
भगवा ध्वज और रोशनी से सजा मंदिर, भक्तिमय बना वातावरण
इस वर्ष रामनवमी के अवसर पर मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है। पूरे परिसर को भगवा ध्वजों से आच्छादित किया गया है, वहीं रंग-बिरंगी आकर्षक रोशनी ने मंदिर की भव्यता को और बढ़ा दिया है। शाम होते ही मंदिर का दृश्य किसी आध्यात्मिक उत्सव से कम नहीं लगता।
भक्तों की भारी भीड़, भजन-कीर्तन की गूंज और जयकारों से पूरा गांव गूंजायमान हो उठा। हर कोई बजरंगबली के दर्शन और आशीर्वाद के लिए आतुर नजर आया।
अखाड़ा और लाठी कला ने बढ़ाया आकर्षण
रामनवमी के दिन आयोजित अखाड़ा कार्यक्रम इस मंदिर की खास परंपरा का हिस्सा है। इस अवसर पर समाजसेवी सह भाजपा नेता गंगा नारायण सिंह सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए।
अखाड़ा में पारंपरिक लाठी कला का प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम के दौरान सभी ने एक-दूसरे को रामनवमी और दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं दीं।
बरगद के पेड़ से शुरू हुई थी पूजा की परंपरा
ग्रामीणों के अनुसार इस मंदिर का इतिहास बेहद प्राचीन और रोचक है। बताया जाता है कि पहले यहां एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे बजरंगबली की पूजा की जाती थी।
रामनवमी के अवसर पर उसी स्थान पर ध्वजारोहण और अखाड़ा खेल का आयोजन होता था। समय के साथ जब वह बरगद का पेड़ गिर गया, तब ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया गया।
आज यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि गांव की एकता और परंपरा का जीवंत उदाहरण भी बन चुका है।

तीन पीढ़ियों से निभाई जा रही सेवा परंपरा
मंदिर के पुजारी राजू मिश्रा बताते हैं कि उनके पूर्वजों से चली आ रही सेवा परंपरा को वे आज भी पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।
उनका कहना है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है। इसी का एक उदाहरण हाल ही में देखने को मिला, जब एक वृद्ध महिला ने अपनी मुराद पूरी होने पर मंदिर में ध्वज और प्रसाद अर्पित किया।
बताया गया कि महिला के परिवार में वर्षों बाद संतान की प्राप्ति हुई, जिसे बजरंगबली का आशीर्वाद माना जा रहा है।
100 वर्षों से अधिक पुरानी है रामनवमी परंपरा
स्थानीय ग्रामीण जयप्रकाश मिश्रा और दुलाल मिश्रा बताते हैं कि इस मंदिर में रामनवमी मनाने की परंपरा 100 वर्षों से भी अधिक पुरानी है।
हर साल नवरात्र के दौरान यहां भजन-कीर्तन, धार्मिक पाठ और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
यह परंपरा आज तीसरी पीढ़ी द्वारा भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है।
असामाजिक तत्वों से परंपरा पर खतरे की चिंता
ग्रामीणों ने बताया कि हाल के वर्षों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा धार्मिक आयोजनों में व्यवधान डालने की कोशिशें भी सामने आई हैं।
इससे न केवल धार्मिक माहौल प्रभावित होता है, बल्कि वर्षों पुरानी परंपरा पर भी असर पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसे तत्वों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही सभी लोगों से अपील की गई है कि वे शांति, सद्भाव और एकजुटता के साथ इस पावन पर्व को मनाएं।
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की रही सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर राधा-कृष्ण मंदिर के महंत, मुखिया मजदूर ललन मिश्रा सहित कई गणमान्य लोग और ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भक्तों की सेवा, प्रसाद वितरण और व्यवस्था में गांव के युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
निष्कर्ष
पथार गांव का प्राचीन बजरंगबली मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सामाजिक एकता, परंपरा और संस्कृति का भी प्रतीक बन चुका है। रामनवमी के अवसर पर यहां उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि आज भी लोगों की आस्था और विश्वास उतना ही मजबूत है।
Q1. पथार गांव का बजरंगबली मंदिर कहां स्थित है?
A. यह मंदिर झारखंड के देवघर जिले के मधुपुर प्रखंड स्थित पथार गांव में स्थित है।
Q2. इस मंदिर की खासियत क्या है?
A. यह मंदिर सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपरा और मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता के लिए प्रसिद्ध है।
Q3. रामनवमी पर यहां क्या विशेष होता है?
A. रामनवमी पर ध्वजारोहण, अखाड़ा खेल, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।
Q4. मंदिर का इतिहास कितना पुराना है?
A. ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा 100 वर्षों से भी अधिक पुरानी है और तीन पीढ़ियों से जारी है।
Q5. क्या यहां दूर-दराज से भी भक्त आते हैं?
A. हां, इस मंदिर की ख्याति के कारण आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।







