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झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 21 प्रत्याशियों की सूची जारी की। इंडिया गठबंधन में दरार, कांग्रेस से सीट बंटवारे पर विवाद और राष्ट्रीय विस्तार की रणनीति पर बड़ा फैसला।
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असम चुनाव 2026: JMM का बड़ा दांव, INDIA गठबंधन में दरार के बीच 21 प्रत्याशी घोषित
कांग्रेस से सीट विवाद के बाद JMM का अकेला मैदान, राष्ट्रीय राजनीति में विस्तार की रणनीति तेज
सुनील झा | देवघर | 23 मार्च 2026

असम विधानसभा चुनाव में JMM की एंट्री, जारी की 21 उम्मीदवारों की सूची
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपने 21 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। पार्टी की केंद्रीय समिति की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं।
यह कदम केवल चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
INDIA गठबंधन में दरार, कांग्रेस-JMM का साथ टूटा
सूत्रों के अनुसार, असम चुनाव को लेकर INDIA गठबंधन के भीतर गंभीर मतभेद उभरकर सामने आए। कांग्रेस और JMM के बीच सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस JMM को सीमित 7 सीटें देने के पक्ष में थी, जबकि JMM इतनी सीटों की पर मानने वाली नहीं थी। बातचीत विफल होने के बाद JMM ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्णय से INDIA गठबंधन को बड़ा झटका लगा है और विपक्षी एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रत्याशियों की सूची जारी, कई नए चेहरों को मौका
जारी सूची में JMM ने कई नए और स्थानीय चेहरों को मौका दिया है। प्रमुख उम्मीदवारों में प्रीति रेखा बरला, तेहारू गौर, अमित नाग, भुबेन मुरारी, पाबन साउतल, भारत नायक और साहिल मुंडा जैसे नाम शामिल हैं।
इस सूची में आदिवासी और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को खास प्राथमिकता दी गई है, जिससे पार्टी का सामाजिक संतुलन साधने का प्रयास साफ दिखता है।

पार्टी नेताओं ने प्रत्याशियों को बांटे सिंबल, दिया जीत का संदेश
पार्टी महासचिव विनोद कुमार पांडेय और मंत्री चमरा लिंडा ने प्रत्याशियों को सिंबल (चुनाव चिन्ह) बांटकर चुनाव अभियान की शुरुआत कराई।
इस पहल को जमीनी जुड़ाव और संघर्षशील राजनीति का प्रतीक बताया जा रहा है। पार्टी का संदेश स्पष्ट है कि JMM आम जनता के साथ खड़ी पार्टी है और उसी के मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरी है।
हेमंत सोरेन का बड़ा फैसला, राष्ट्रीय विस्तार की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में JMM अब झारखंड से बाहर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
असम चुनाव में उतरना पार्टी की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। यह संकेत है कि JMM अब केवल क्षेत्रीय पार्टी नहीं रहना चाहती, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहती है।
कांग्रेस के लिए चुनौती, गौरव गोगोई की राह मुश्किल
JMM के इस फैसले से असम में कांग्रेस के लिए चुनावी समीकरण जटिल हो गए हैं।
विशेष रूप से कांग्रेस नेता गौरव गोगोई के लिए मुकाबला कठिन होता दिख रहा है, क्योंकि JMM के अलग चुनाव लड़ने से विपक्षी वोटों का बंटवारा तय माना जा रहा है।
भाजपा को फायदा, हेमंत बिस्वा शर्मा की राह आसान
राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, विपक्ष के बिखराव का सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है।
मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा के नेतृत्व में भाजपा पहले से मजबूत स्थिति में है, और अब विपक्षी एकता के टूटने से उनकी राह और आसान होती दिख रही है।
बिहार चुनाव का बदला असम में?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और राजद द्वारा JMM को अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण यह कदम उठाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, JMM इस बार अपने राजनीतिक निर्णयों में पूरी तरह स्वतंत्र रुख अपना रही है और इसे “राजनीतिक जवाब” के तौर पर भी देखा जा रहा है।
सामाजिक समीकरण पर फोकस, आदिवासी वोट बैंक पर नजर
JMM की सूची से साफ है कि पार्टी ने असम के आदिवासी और पिछड़े वर्गों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है।
यह रणनीति भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती बन सकती है, क्योंकि यह वर्ग चुनाव परिणामों में निर्णायक भूमिका निभाता है।
क्या कहती है JMM की रणनीति?
JMM का यह कदम कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है:
राष्ट्रीय राजनीति में विस्तार
गठबंधन राजनीति से दूरी
क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करना
आदिवासी वोट बैंक को साधना
यह रणनीति पार्टी को भविष्य में एक बड़े राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित कर सकती है।

निष्कर्ष
असम विधानसभा चुनाव 2026 में JMM का उतरना केवल एक चुनावी फैसला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है।
INDIA गठबंधन में दरार, कांग्रेस से टकराव और स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश JMM को आने वाले समय में बड़ी ताकत बना सकती है।
हालांकि, इसका सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है, जिससे चुनावी मुकाबला और रोचक होने वाला है।
Q1. JMM ने असम चुनाव 2026 में कितने उम्मीदवार उतारे हैं?
A. JMM ने कुल 21 प्रत्याशियों की सूची जारी की है।
Q2. क्या JMM और कांग्रेस का गठबंधन टूट गया है?
A. हाँ, सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बनने के कारण दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं।
Q3. JMM ने असम चुनाव में उतरने का फैसला क्यों लिया?
A. पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार और अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करना चाहती है।
Q4. इससे किस पार्टी को फायदा होगा?
A. विश्लेषकों के अनुसार, विपक्ष के बिखराव से भाजपा को फायदा मिल सकता है।
Q5. क्या यह फैसला बिहार चुनाव से जुड़ा है?
A. सूत्रों के अनुसार, बिहार चुनाव में सहयोग नहीं मिलने के कारण JMM ने स्वतंत्र रुख अपनाया है।
(Disclaimer: यह खबर उपलब्ध दस्तावेज़ और सूत्रों के आधार पर तैयार की गई है। राजनीतिक परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं।)








