जरमुंडी में पीपल वृक्ष शुभ विवाह महोत्सव: भक्ति जागरण से गूंजा सूर्य मंदिर केसरी प्रांगण, बादल पत्रलेख हुए शामिल

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देवघर जिले के जरमुंडी स्थित सूर्य मंदिर केसरी प्रांगण में आयोजित पीपल वृक्ष शुभ विवाह महोत्सव भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख सहित हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

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जरमुंडी में पीपल वृक्ष शुभ विवाह महोत्सव: भक्ति जागरण से गूंजा सूर्य मंदिर केसरी प्रांगण, बादल पत्रलेख हुए शामिल

धार्मिक परंपरा और प्रकृति प्रेम का अद्भुत संगम, हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में संपन्न हुआ भव्य आयोजन

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न्यूज़ डेस्क | जरमुंडी (दुमका) | 10 मार्च 2026

 

दुमका जिले के जरमुंडी प्रखंड स्थित सूर्य मंदिर, केसरी प्रांगण में आयोजित पीपल वृक्ष शुभ विवाह महोत्सव भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक उल्लास के साथ संपन्न हो गया। इस पावन अवसर पर झारखंड सरकार के पूर्व कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख मुख्य रूप से उपस्थित हुए और कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया।

पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्ति जागरण, धार्मिक अनुष्ठान और पीपल विवाह की पारंपरिक रस्मों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक वातावरण से भर दिया। देर रात तक भक्ति गीतों और जागरण के माध्यम से भगवान की आराधना की गई, जिससे पूरा केसरी प्रांगण श्रद्धा और भक्ति में डूबा रहा।

दीप प्रज्वलन और फीता काटकर हुआ भक्ति जागरण का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत भक्ति जागरण से हुई। पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख ने अन्य सम्मानित अतिथियों के साथ फीता काटकर तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।

दीप प्रज्वलन के साथ ही पूरे प्रांगण में आध्यात्मिक वातावरण बन गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान सूर्य और पीपल वृक्ष की आराधना की।

भक्ति जागरण के दौरान स्थानीय कलाकारों और भजन मंडलियों ने एक से बढ़कर एक भक्ति गीत प्रस्तुत किए, जिससे उपस्थित श्रद्धालु देर रात तक कार्यक्रम में डटे रहे।

परंपरा और संस्कृति को जीवित रखते हैं ऐसे आयोजन: बादल पत्रलेख

इस अवसर पर अपने संबोधन में बादल पत्रलेख ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और पेड़-पौधों को भी पूजनीय माना गया है। पीपल वृक्ष का विवाह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश भी देता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी परंपराओं को जीवित रखते हैं और समाज में भाईचारा, एकता तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

पूर्व मंत्री ने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समाज को जोड़ने वाले इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन समय-समय पर होना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रहें।

 

पीपल विवाह और प्रकृति संरक्षण का संदेश

पीपल वृक्ष हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पीपल में भगवान विष्णु और ब्रह्मा का वास होता है। इसी कारण पीपल वृक्ष की पूजा और उससे जुड़े अनुष्ठानों का विशेष महत्व है।

जरमुंडी में आयोजित इस पीपल विवाह महोत्सव के माध्यम से प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया गया। आयोजकों ने बताया कि पेड़-पौधों के संरक्षण के बिना जीवन संभव नहीं है, इसलिए ऐसे आयोजनों के जरिए लोगों को प्रकृति से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

इस दौरान सूर्य भगवान की आराधना पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। श्रद्धालुओं को बताया गया कि सूर्य देव जीवन और ऊर्जा के स्रोत हैं और प्रकृति के संतुलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी से भव्य बना आयोजन

महोत्सव में क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु, गणमान्य लोग और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। हजारों की संख्या में लोगों की मौजूदगी से पूरा आयोजन अत्यंत भव्य और यादगार बन गया।

कार्यक्रम में अभय कांत प्रसाद, अमरेंद्र यादव, आयोजन समिति के अध्यक्ष बिंदेश्वरी बाबू, गौरी शंकर मंडल, सुभोध यादव, मणिकांत यादव (मंच संचालन), सूर्यमोहन शाह, रमेश दरवे, रंजीत दरवे, जेपी यादव, करमन मिर्धा, पंडा सुरेश, मोहन, सुदाम, सुभोध तथा नंदलाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

सभी ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।

आयोजन समिति ने व्यक्त किया आभार

कार्यक्रम के समापन पर आयोजन समिति की ओर से सभी अतिथियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया गया।

आयोजकों ने कहा कि लोगों के सहयोग और उत्साह के कारण ही यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन जारी रखने की बात कही।

पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता की अद्भुत झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को मजबूत करने वाला आयोजन बताया।

 

प्रश्न 1. पीपल विवाह महोत्सव क्या होता है?

उत्तर: पीपल विवाह एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें पीपल वृक्ष को पवित्र मानकर विवाह की रस्में निभाई जाती हैं। यह प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।

प्रश्न 2. यह कार्यक्रम कहां आयोजित हुआ?

उत्तर: यह कार्यक्रम देवघर जिले के जरमुंडी स्थित सूर्य मंदिर के केसरी प्रांगण में आयोजित किया गया।

प्रश्न 3. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कौन थे?

उत्तर: कार्यक्रम में झारखंड सरकार के पूर्व कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख मुख्य रूप से उपस्थित थे।

प्रश्न 4. कार्यक्रम में कितने लोग शामिल हुए?

उत्तर: पीपल विवाह महोत्सव में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।

निष्कर्ष:

जरमुंडी में आयोजित पीपल वृक्ष शुभ विवाह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि प्रकृति प्रेम, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा। भक्ति जागरण, धार्मिक अनुष्ठान और हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

Disclaimer:

यह समाचार उपलब्ध स्थानीय जानकारी और आयोजन समिति से प्राप्त विवरण के आधार पर तैयार किया गया है। कार्यक्रम से संबंधित तथ्य आयोजकों और उपस्थित लोगों के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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