देवघर में विराट हिंदू सम्मेलन: शंख-घंटा ध्वनि के बीच हनुमान चालीसा का पाठ, समाज को संगठित होने का संदेश

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देवघर के बरियारबांधी शिव मंदिर परिसर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में समाज की एकता, संगठन और महिलाओं की सुरक्षा पर जोर दिया गया। मुख्य वक्ता अनिल ठाकुर ने लोगों को संगठित होने का संदेश दिया।

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देवघर में विराट हिंदू सम्मेलन: शंख-घंटा ध्वनि के बीच हनुमान चालीसा का पाठ, समाज को संगठित होने का संदेश

मुख्य वक्ता अनिल ठाकुर ने एकता पर दिया जोर, महिला दिवस पर महिलाओं को दी शुभकामनाएं

Author: Sunil Jha | Location: Deoghar | Date: 8 March 2026

 

देवघर शहर के सुभाष बस्ती स्थित बरियारबांधी शिव मंदिर परिसर, बम्पास टाउन में रविवार को सर्व हिंदू समाज के तत्वावधान में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में समाज की एकता, सनातन संस्कृति के संरक्षण और संगठन की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में संत-महात्माओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज में जागरूकता बढ़ाना, सामाजिक समरसता को मजबूत करना और युवाओं को अपनी संस्कृति व परंपराओं से जोड़ना था। इस अवसर पर वक्ताओं ने समाज में बढ़ती चुनौतियों पर चर्चा करते हुए संगठित होकर कार्य करने का संदेश दिया।

 

शंख ध्वनि और दीप प्रज्वलन से हुआ सम्मेलन का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत शंख ध्वनि और घंटा नाद के बीच भारत माता और राम दरबार के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई। इस अवसर पर पूरे परिसर में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।

दीप प्रज्वलन के बाद कार्यक्रम में उपस्थित महिला और पुरुषों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। भक्तिमय माहौल में पूरा मंदिर परिसर हनुमान चालीसा की ध्वनि से गुंजायमान हो उठा।

आयोजकों ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं बल्कि समाज को जागरूक और संगठित करना भी है, ताकि सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।

देवघर के बरियारबांधी शिव मंदिर परिसर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में मौजूद लोग

देवघर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन के दौरान उपस्थित संत-महात्मा और श्रद्धालु

मुख्य वक्ता अनिल ठाकुर ने दिया संगठन का संदेश

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर-पूर्व क्षेत्र (बिहार-झारखंड) के क्षेत्र संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर, केंद्र रांची उपस्थित थे।

उन्होंने अपने बौद्धिक वक्तव्य में समाज की एकता और संगठन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती के लिए लोगों को आपसी सहयोग और समन्वय के साथ आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने कहा कि जब समाज संगठित होता है तो वह किसी भी चुनौती का सामना मजबूती से कर सकता है। उन्होंने युवाओं से भी समाज और संस्कृति के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

इस अवसर पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उपस्थित महिलाओं को शुभकामनाएं दीं और कहा कि समाज की प्रगति में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा पर भी जोर दिया।

संतों के आशीर्वचन से मिला मार्गदर्शन

कार्यक्रम में चांदपुर स्थित मोनी बाबा आश्रम के महंत आचार्य मांडवी अनुपचारी जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि समाज को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कार और परंपराएं ही किसी भी समाज की असली पहचान होती हैं।

विश्व हिंदू परिषद देवघर के जिला अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में जागरूकता और एकता बहुत जरूरी है। उन्होंने लोगों से सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

 

सामाजिक मुद्दों पर भी हुई चर्चा

सम्मेलन के दौरान विभिन्न सामाजिक विषयों पर भी चर्चा की गई। गायत्री परिवार की ओर से समाज को जागरूक रहने का आह्वान करते हुए लव जिहाद और महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार जैसे मुद्दों पर चिंता व्यक्त की गई।

वक्ताओं ने कहा कि समाज को इन चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से संगठित होकर समाज में जागरूकता फैलाने और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

इसके साथ ही सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा और युवाओं की सकारात्मक भूमिका जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

अतिथियों का तिलक और अंगवस्त्र से किया गया सम्मान

कार्यक्रम में उपस्थित सभी संत-महात्माओं और अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। आयोजकों की ओर से अतिथियों को तिलक लगाकर और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक उत्साह का माहौल देखने को मिला।

कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित

सम्मेलन में जिला संघ चालक गणेश बरनवाल, नगर कार्यवाह डॉ. आनंद वर्धन, डॉ. एनडी. मिश्रा, अरुण कुमार झा, विनायक कुमार, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. पूजा राय, राजेश अग्रवाल, दीपक दुबे, राजेश कुमार और प्रियदर्शन दुबे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इसके अलावा शहर के कई सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

बड़ी संख्या में लोगों की रही भागीदारी

सम्मेलन में देवघर और आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों की बड़ी संख्या देखने को मिली। आयोजकों के अनुसार इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में जागरूकता और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम के अंत में भारत माता की आरती और धन्यवाद ज्ञापन के साथ सम्मेलन का समापन किया गया। आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर समाज को जागरूक और संगठित करने का प्रयास किया जाएगा।

निष्कर्ष

देवघर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता और संगठन का मंच भी बना। सम्मेलन में दिए गए संदेशों से यह स्पष्ट हुआ कि समाज की मजबूती के लिए एकता, जागरूकता और आपसी सहयोग बेहद जरूरी है।

संतों और वक्ताओं ने अपने विचारों के माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास किया और लोगों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।

 

प्रश्न 1: देवघर में विराट हिंदू सम्मेलन कहां आयोजित हुआ?

उत्तर: यह सम्मेलन देवघर के सुभाष बस्ती स्थित बरियारबांधी शिव मंदिर परिसर, बम्पास टाउन में आयोजित किया गया।

प्रश्न 2: सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उत्तर: सम्मेलन का उद्देश्य समाज में एकता, संगठन और सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

प्रश्न 3: कार्यक्रम में मुख्य वक्ता कौन थे?

उत्तर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर-पूर्व क्षेत्र (बिहार-झारखंड) के क्षेत्र संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर मुख्य वक्ता थे।

प्रश्न 4: कार्यक्रम की शुरुआत कैसे हुई?

उत्तर: कार्यक्रम की शुरुआत शंख ध्वनि और घंटा नाद के बीच भारत माता और राम दरबार के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई।

Disclaimer: यह समाचार उपलब्ध जानकारी और कार्यक्रम में दिए गए वक्तव्यों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें व्यक्त विचार संबंधित वक्ताओं के हैं।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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