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देवघर में पीएम आवास योजना के तहत सैकड़ों लाभुकों को सात साल बाद भी घर नहीं मिला। सवा चार लाख रुपये जमा करने के बावजूद लाभुक नगर निगम का चक्कर लगा रहे हैं।
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PM Awas Yojana Deoghar: सात साल बाद भी अधूरा सपना, सवा चार लाख जमा करने के बाद भी नहीं मिला घर
PM आवास योजना में फंसे सैकड़ों लाभुक, समाधान की मांग लेकर नगर निगम पहुंचे लोग
Author: Sunil Jha | Location: Deoghar | Date: 6 March 2026

देवघर नगर निगम क्षेत्र में शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) के तहत घर पाने का सपना देख रहे सैकड़ों लाभुकों का इंतजार सात साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है। योजना के तहत लाखों रुपये जमा करने के बावजूद कई लाभुकों को अब तक अपना घर नहीं मिल पाया है। परेशान लाभुकों ने शुक्रवार को नगर निगम पहुंचकर अपनी समस्या रखी और जल्द समाधान की मांग की।
लाभुकों का कहना है कि योजना की शुरुआत में उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि करीब डेढ़ से दो साल के भीतर उन्हें पक्का घर मिल जाएगा। लेकिन समय बीतता गया और सात साल गुजर जाने के बाद भी उन्हें घर का कब्जा नहीं मिल सका। इससे लाभुकों में निराशा और आक्रोश दोनों बढ़ता जा रहा है।
665 लाभुकों को मिलना था आवास, अब भी अधूरा इंतजार
जानकारी के अनुसार देवघर नगर निगम क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत लगभग 665 लाभुकों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की योजना शुरू की गई थी। योजना के तहत लाभुकों से लगभग सवा चार लाख रुपये तक की राशि लेकर फ्लैट देने का वादा किया गया था।
योजना की शुरुआत में निर्माण कार्य को करीब 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, ताकि जल्द से जल्द जरूरतमंद परिवारों को अपना घर मिल सके। लेकिन अब सात साल बीत जाने के बाद भी कई लाभुकों को न तो घर मिला है और न ही उन्हें स्पष्ट रूप से बताया जा रहा है कि आखिर कब तक उन्हें घर का कब्जा मिलेगा।
लाभुकों का कहना है कि उन्होंने अपनी वर्षों की जमा पूंजी और बैंक से कर्ज लेकर योजना के लिए पैसा जमा किया था। लेकिन आज भी वे अपने घर के इंतजार में नगर निगम और संबंधित विभागों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
बिजली कनेक्शन तक की प्रक्रिया अधूरी
नगर निगम पहुंचे लाभुकों ने बताया कि जब उन्होंने फ्लैट में रहने की तैयारी के लिए बिजली कनेक्शन की जानकारी लेने की कोशिश की, तो पता चला कि अब तक बिजली कनेक्शन के लिए कोई औपचारिक आवेदन ही नहीं किया गया है।
लाभुकों का कहना है कि जब तक बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक घर मिलने के बाद भी उसमें रहना संभव नहीं होगा। इस कारण योजना के पूरा होने को लेकर लाभुकों की चिंता और बढ़ गई है।
किराया और बैंक कर्ज दोनों का बोझ
इस योजना से जुड़े कई लाभुकों ने बताया कि घर की उम्मीद में उन्होंने अपनी जमा पूंजी के साथ बैंक से कर्ज लेकर भुगतान किया था। लेकिन घर नहीं मिलने के कारण उन्हें आज भी किराए के मकान में रहना पड़ रहा है।
इसका परिणाम यह है कि एक ओर बैंक की ईएमआई चुकानी पड़ रही है और दूसरी ओर किराए का खर्च भी उठाना पड़ रहा है। इससे कई परिवारों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसी योजना में लंबे समय तक देरी होती है तो उसका सबसे ज्यादा असर उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ता है, जिनके लिए यह योजना बनाई जाती है।
लाभुकों ने सुनाई अपनी परेशानी
लाभुक अजय कुमार पांडेय ने बताया कि सस्ते आवास की योजना ने उन्हें अपना घर होने का सपना दिखाया था। उन्होंने अपनी जमा पूंजी के साथ बैंक से कर्ज लेकर सारी किश्तें जमा कर दीं। लेकिन सात साल बाद भी उन्हें घर नहीं मिला। मजबूरी में आज भी किराए के मकान में रहना पड़ रहा है।
वहीं राजू केसरी का कहना है कि योजना की शुरुआत में भरोसा दिलाया गया था कि दो साल के भीतर घर मिल जाएगा। लेकिन आज तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। वे लगातार नगर निगम कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल रहा।
लाभुक राकेश वर्मा ने बताया कि उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर एजेंसी को पूरा भुगतान कर दिया था। इसके बावजूद अब तक उन्हें घर नहीं मिला। बैंक की ईएमआई और किराए का खर्च दोनों उठाना पड़ रहा है।
इसी तरह तारा शेखर ने कहा कि योजना की शुरुआत में जो उम्मीदें दिखाई गई थीं, वे आज तक पूरी नहीं हुई हैं। सात साल बाद भी कोई स्पष्ट समय सीमा नहीं बताई जा रही है।
नगर निगम से समाधान की मांग
नगर निगम पहुंचे लाभुकों ने प्रशासन से मांग की है कि योजना की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए और जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कर उन्हें घर का कब्जा दिया जाए।
लाभुकों का कहना है कि उन्होंने सरकारी योजना पर भरोसा करके अपनी मेहनत की कमाई निवेश की थी। ऐसे में अगर वर्षों तक घर नहीं मिलता है तो यह उनके साथ अन्याय के समान है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आगे बड़े स्तर पर अपनी आवाज उठाने के लिए मजबूर होंगे।
प्रधानमंत्री आवास योजना क्या है
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) केंद्र सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, निम्न आय वर्ग और मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ते दर पर पक्का घर उपलब्ध कराना है।
इस योजना के तहत लाभुकों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे अपना घर बना सकें या फ्लैट खरीद सकें। देश के कई शहरों में इस योजना के तहत लाखों लोगों को घर मिल चुके हैं।
हालांकि कई जगहों पर निर्माण में देरी या प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण लाभुकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
स्थानीय स्तर पर निगरानी की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी योजनाओं की सफलता के लिए स्थानीय प्रशासन और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। अगर समय-समय पर निगरानी और समीक्षा की जाए तो परियोजनाओं में देरी को काफी हद तक रोका जा सकता है।
देवघर के मामले में भी लाभुकों की समस्या को देखते हुए प्रशासन को जल्द समाधान की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।
निष्कर्ष
देवघर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर पाने का सपना देख रहे सैकड़ों परिवार आज भी इंतजार कर रहे हैं। सात साल बाद भी घर नहीं मिलने से लाभुकों में निराशा बढ़ रही है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए जरूरी है कि वे जल्द इस योजना को पूरा कर लाभुकों को उनका हक दिलाएं।
प्रश्न 1. देवघर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कितने लाभुकों को घर मिलना था?
उत्तर: देवघर नगर निगम क्षेत्र में करीब 665 लाभुकों को आवास उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई थी।
प्रश्न 2. लाभुकों से कितनी राशि ली गई थी?
उत्तर: लाभुकों से लगभग सवा चार लाख रुपये तक की राशि लेकर फ्लैट देने का वादा किया गया था।
प्रश्न 3. योजना पूरी होने में कितना समय तय किया गया था?
उत्तर: योजना को करीब 18 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
प्रश्न 4. लाभुकों को अब तक घर क्यों नहीं मिला?
उत्तर: निर्माण कार्य में देरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण कई लाभुकों को अभी तक घर का कब्जा नहीं मिल पाया है।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और लाभुकों के बयानों के आधार पर तैयार की गई है। योजना से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित विभाग से संपर्क किया जा सकता है।






