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देवघर नगर निगम मेयर चुनाव की मतगणना पर बवाल। भाजपा समर्थित प्रत्याशी रीता चौरसिया ने 30 मिनट गिनती रोके जाने और परिणाम पलटने पर गंभीर सवाल उठाए, निष्पक्ष जांच की मांग।
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मतगणना पर बवाल: रीता चौरसिया ने उठाए गंभीर सवाल
“मतगणना 30 मिनट क्यों रोकी गई?” – 21 सौ वोट से आगे चल रहीं रीता चौरसिया ने प्रशासन पर साधा निशाना
संवाददाता | देवघर | 28 फरवरी 2026

देवघर नगर निगम चुनाव मतगणना के दौरान रीता चौरसिया
मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाती मेयर प्रत्याशी रीता चौरसिया।
देवघर नगर निगम के मेयर पद के लिए संपन्न चुनाव की मतगणना के बाद शहर की सियासत में उबाल आ गया है। भाजपा समर्थित प्रत्याशी रीता चौरसिया ने मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए जिला प्रशासन पर पक्षपात और अनियमितता के आरोप लगाए हैं।
रीता चौरसिया का आरोप है कि मतगणना के दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी के मतगणना केंद्र में प्रवेश करने के बाद लगभग 30 मिनट तक गिनती रोक दी गई। उन्होंने इस घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए कहा कि इसी के बाद चुनाव परिणाम का रुख अचानक बदल गया।
30 मिनट का विराम बना विवाद की जड़
रीता चौरसिया के अनुसार, वे प्रारंभिक राउंड की मतगणना में लगभग 21 सौ वोटों से आगे चल रही थीं। लेकिन अचानक दो राउंड की गिनती में भारी अंतर सामने आया और नवनिर्वाचित मेयर रवि कुमार राउत को 3 हजार से अधिक मत मिल गए, जिससे परिणाम पलट गया।
उन्होंने कहा, “जब हम स्पष्ट बढ़त में थे, तभी मतगणना लगभग आधे घंटे के लिए रोक दी गई। इसके बाद अचानक वोटों का अंतर बदल गया। यह पूरे मामले को संदेहास्पद बनाता है।”
उनका दावा है कि यदि मतगणना बिना किसी व्यवधान के होती, तो परिणाम अलग हो सकता था।
लिखित शिकायत, लेकिन कार्रवाई शून्य
रीता चौरसिया ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में संबंधित निर्वाचित पदाधिकारी को लिखित शिकायत सौंप दी है। शिकायत में मतगणना की वीडियो फुटेज की जांच, सीसीटीवी रिकॉर्ड की समीक्षा और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने की बात कही गई है।
हालांकि खबर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इससे समर्थकों में असंतोष और बढ़ गया है।
“न्यायालय जाने से नहीं हिचकेंगे”
रीता चौरसिया ने स्पष्ट कहा है कि यदि प्रशासन स्तर पर निष्पक्ष जांच नहीं होती है, तो वे न्यायालय की शरण लेने से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनाव प्रक्रिया का पारदर्शी होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “यह केवल मेरी व्यक्तिगत हार-जीत का प्रश्न नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता का मुद्दा है।”
राजनीतिक माहौल गरमाया
चुनाव परिणाम आने के बाद से ही शहर में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। समर्थकों के बीच मतगणना केंद्र पर हुई गतिविधियों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सोशल मीडिया पर भी इस विषय को लेकर बहस जारी है।
वहीं दूसरी ओर, नवनिर्वाचित मेयर रवि कुमार राउत की ओर से इस आरोप पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके समर्थकों का कहना है कि परिणाम पूरी तरह से निष्पक्ष और विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत घोषित किया गया है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशासन की ओर से स्पष्ट बयान न आना विवाद को और गहरा सकता है। यदि समय रहते तथ्यों को सार्वजनिक नहीं किया गया, तो मामला कानूनी रूप ले सकता है।
मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। ऐसे में 30 मिनट तक गिनती रोके जाने की घटना की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी माना जा रहा है।
कानूनी मोड़ लेने की संभावना
सूत्रों के अनुसार, यदि आने वाले दिनों में जांच की मांग पर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो मामला उच्च न्यायालय तक पहुंच सकता है। चुनावी याचिका दाखिल कर मतगणना प्रक्रिया को चुनौती दी जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने देवघर नगर निगम की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
प्रमुख बिंदु (Quick Facts)
मतगणना 30 मिनट रोके जाने का आरोप
प्रारंभिक राउंड में 21 सौ वोट से आगे होने का दावा
दो राउंड में अचानक 3 हजार से अधिक वोट का अंतर
लिखित शिकायत सौंपी गई
न्यायालय जाने की चेतावनी
प्रश्न 1: विवाद किस मुद्दे पर है?
उत्तर: मतगणना के दौरान 30 मिनट तक गिनती रोके जाने और उसके बाद परिणाम पलटने के आरोप पर विवाद है।
प्रश्न 2: किसने आरोप लगाए हैं?
उत्तर: भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशी रीता चौरसिया ने।
प्रश्न 3: क्या प्रशासन की ओर से कोई बयान आया है?
उत्तर: खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
प्रश्न 4: आगे क्या हो सकता है?
उत्तर: यदि निष्पक्ष जांच नहीं होती है, तो मामला न्यायालय तक जा सकता है।
निष्कर्ष
देवघर नगर निगम चुनाव की मतगणना पर उठे सवालों ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। रीता चौरसिया द्वारा लगाए गए आरोपों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन पारदर्शिता साबित करने के लिए क्या कदम उठाता है और क्या यह मामला कानूनी दायरे में प्रवेश करता है।
Disclaimer: यह खबर प्रत्याशी द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आधिकारिक जांच या प्रशासनिक प्रतिक्रिया आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।







