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देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर में गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। 26 फरवरी को पूर्णाहुति, वैदिक मंत्रोच्चार, रासलीला और महाप्रसाद वितरण।
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भक्ति, वेद और वैराग्य की त्रिवेणी में डूबा ठाढ़ीदुलमपुर
गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, 26 फरवरी को पूर्णाहुति
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संवाददाता | देवघर | 22 फरवरी 2026

देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर स्थित मां जगदंबा कॉलोनी इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। वैदिक मंत्रोच्चार, हरि-नाम संकीर्तन और “हर-हर महादेव” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा।
नौ दिवसीय यह धार्मिक अनुष्ठान 26 फरवरी को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा। आयोजन स्थल पर सुबह से ही दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतारें देखी गईं, विशेषकर महिलाओं और कन्याओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।

वैदिक मंत्रों से गुंजायमान हुआ यज्ञ मंडप
दोपहर में उत्तराखंड से पधारे आचार्यों ने विधि-विधान से हवनकुंड में अग्नि प्रज्ज्वलित कर चारों वेदों एवं अठारह पुराणों के मंत्रों का उच्चारण किया। दुर्गा सप्तशती का पाठ भी संपन्न हुआ। श्रद्धालु लोककल्याण और विश्वशांति की कामना के साथ आहुतियां देते नजर आए।
यज्ञ मंडप में अनुशासित व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आस्था ने आयोजन को दिव्य स्वरूप प्रदान किया।
नव-निर्मित मंदिरों में उमड़ी आस्था
सुबह से ही नव-निर्मित श्री श्री राधा-कृष्ण, मां जगदंबा और भगवान शिव मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। पूजन-अर्चन के बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए, जिसके बाद पूरे दिन दर्शन का क्रम जारी रहा।
वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत राधा-कृष्ण की रासलीला ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रेम मंदिर में भगवान को 56 भोग अर्पित किए गए, जो आयोजन का विशेष आकर्षण रहा।
गंगा का उद्गम भगवान विष्णु के चरणों से हुआ : डॉ दुर्गेश आचार्य
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान राष्ट्रीय संत डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज ने गंगा अष्टादश महापुराण का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि दिव्य चेतना का प्रवाह हैं।
उन्होंने बताया कि पुराणों के अनुसार गंगा का उद्गम भगवान विष्णु के चरणों से हुआ, जिसे ब्रह्मा ने अपने कमंडल में धारण किया। भगीरथ की तपस्या से गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ और भगवान शिव ने उनके प्रचंड वेग को अपनी जटाओं में समाहित किया।
उन्होंने कहा कि गंगा स्नान पापों का नाश करता है तथा मकर संक्रांति, गंगा दशहरा, अमावस्या और पूर्णिमा पर स्नान विशेष फलदायी माना गया है। हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी और गंगासागर जैसे तीर्थों का उल्लेख करते हुए उन्होंने गंगा को “त्रिपथगा” बताया, जो स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल तीनों लोकों में प्रवाहित होती हैं।
महाप्रसाद वितरण में दिखी सेवा भावना
संध्या होते-होते महाप्रसाद वितरण प्रारंभ हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। शुद्ध घी से बने लड्डू नवैद्यम स्वरूप उपलब्ध किए गए हैं, जबकि रात्रि आरती के पश्चात खीर का महाप्रसाद बांटा गया।
भीड़ के बावजूद आयोजन स्थल पर अनुशासन और सुव्यवस्था बनी रही। समिति के अध्यक्ष महेश प्रसाद राय के नेतृत्व में पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने सेवा-भाव से व्यवस्थाएं संभालीं।

गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ में शामिल परम सदगुरु डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज व अन्य
संस्कार और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बना ठाढ़ीदुलमपुर
गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम में चल रहा यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सेवा और सांस्कृतिक जागरण का संदेश भी दे रहा है। ठाढ़ीदुलमपुर इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है।
26 फरवरी को पूर्णाहुति के साथ आयोजन का समापन होगा, किंतु यहां से मिली भक्ति और सेवा की प्रेरणा लंबे समय तक जनमानस को आलोकित करती रहेगी।
प्रश्न 1: गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ कब तक चलेगा?
उत्तर: यह नौ दिवसीय आयोजन 26 फरवरी को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा।
प्रश्न 2: आयोजन स्थल कहां है?
उत्तर: देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर स्थित मां जगदंबा कॉलोनी, गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम परिसर में।
प्रश्न 3: मुख्य आकर्षण क्या रहा?
उत्तर: वैदिक हवन, दुर्गा सप्तशती पाठ, रासलीला, 56 भोग और महाप्रसाद वितरण।
निष्कर्ष
देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर में चल रहा गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा न केवल आध्यात्मिक अनुष्ठान है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा, संस्कार और सेवा भावना का संचार करने वाला महाआयोजन बन चुका है। पूर्णाहुति तक श्रद्धालुओं की आस्था इसी प्रकार उमड़ती रहने की संभावना है।
Disclaimer: यह समाचार धार्मिक आयोजन से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी पर आधारित है। आयोजन से जुड़ी तिथियां और विवरण समिति द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार हैं।









