https://thadidulampur-shrimad-bhagwat-katha-ganga-vishwashanti-dham-deoghar
देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर स्थित गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम में श्रीमद् भागवत कथा, गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ और 35 कन्याओं के आदर्श विवाह ने आस्था का महासंगम रचा। पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।
ठाढ़ीदुलमपुर भागवत कथा, गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम, डॉ दुर्गेश आचार्य, देवघर धार्मिक आयोजन, आदर्श विवाह, राधा कृष्ण मंदिर देवघर, महायज्ञ 2026
श्रद्धा की अविरल धारा में डूबा ठाढ़ीदुलमपुर: श्रीमद् भागवत कथा में उमड़ी आस्था, 35 कन्याओं का आदर्श विवाह बना आकर्षण
गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम में नव-निर्मित राधा-कृष्ण, मां जगदंबा और शिव मंदिर में अनवरत पूजा; डॉ दुर्गेश आचार्य ने दिया कर्म और संस्कार का संदेश
Author | Location | Date
सुनील झा | देवघर | 21 फरवरी 2026

गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम देवघर में नये अतिथिशाला भवन का भूमिपूजन
देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर स्थित मां जगदंबा कॉलोनी इन दिनों भक्ति, वेद और वैराग्य की त्रिवेणी में सराबोर है। यहां स्थित गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम परिसर में आयोजित नौ दिवसीय गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत पुराण कथा ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है। आयोजन के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरा परिसर हरि-नाम और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
18 फरवरी को भव्य कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुआ यह महायज्ञ 26 फरवरी को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा। प्रतिदिन सुबह से लेकर देर शाम तक कथा, यज्ञ, आरती और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का क्रम जारी है, जिससे ठाढ़ीदुलमपुर आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बन गया है।

वेद-मंत्रों से गूंजा यज्ञ मंडप, आस्था का अद्भुत दृश्य
चौथे दिन दोपहर में उत्तराखंड से पधारे विद्वान आचार्यों ने विधि-विधान से हवन कुंड में अग्नि प्रज्ज्वलित की। चारों वेद और अठारह पुराणों के मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न हुआ। दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया गया। मंत्रों की गूंज और आहुतियों की सुगंध से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
श्रद्धालु परिवार सहित यज्ञ मंडप में उपस्थित होकर लोककल्याण और विश्वशांति की कामना करते दिखे। महिलाएं और कन्याएं पारंपरिक वेशभूषा में बड़ी संख्या में शामिल हुईं। नव-निर्मित श्री श्री राधा-कृष्ण, मां जगदंबा और भगवान शिव मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए सुबह से लंबी कतारें लगी रहीं।
मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे दिन दर्शन का क्रम जारी रहा। समिति की ओर से सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई, जिससे भीड़ के बावजूद अनुशासन बना रहा।
40 कमरों के विश्रामालय का भूमि पूजन
धाम परिसर में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 40 कमरों के विश्रामालय निर्माण का भूमि पूजन भी संपन्न हुआ। कोलकाता के गौभक्त बृज मोहन गाडोदिया ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शंखध्वनि के साथ भूमि पूजन किया।
प्रस्तावित विश्रामालय से भविष्य में धाम आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने की बेहतर सुविधा मिलेगी। आयोजन समिति ने इसे धाम के विस्तार और सेवा भावना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
35 कन्याओं का आदर्श विवाह, 101 जोड़ों का संकल्प
इस आध्यात्मिक आयोजन का सामाजिक आयाम भी विशेष आकर्षण का केंद्र बना। परम सद्गुरु डॉ दुर्गेश आचार्य के सान्निध्य में 35 आर्थिक रूप से कमजोर कन्याओं का आदर्श विवाह कांवरिया पथ बिहार के बांका जिले में गौ माता के सेवक कोलकाता के बृजमोहन गाड़ोदिया के सौजन्य से संपन्न कराया गया।
विवाह समारोह में कन्याओं को गृहस्थ जीवन के लिए आवश्यक सामग्री प्रदान की गई। समाज के सहयोग से पूरे विधि-विधान के साथ वैवाहिक संस्कार संपन्न हुए।
आचार्य ने बताया कि धाम द्वारा कुल 101 जोड़ों का आदर्श विवाह कराने का संकल्प लिया गया है। यह पहल सामाजिक समरसता और सेवा भावना का अनूठा उदाहरण बन रही है। आयोजन में उपस्थित लोगों ने इसे समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

“कर्म ही जीवन का आधार” – डॉ दुर्गेश आचार्य
दोपहर बाद श्रीमद् भागवत कथा के प्रवचन में डॉ दुर्गेश आचार्य ने कहा कि मनुष्य को अपने कर्म का फल अवश्य भोगना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सत्कर्म का फल सात जन्मों तक मिलता है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को भक्ति, सेवा और सदाचार का मार्ग अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस घर में स्वच्छता, संस्कार और बड़ों का सम्मान होता है, वहां देवताओं का निवास होता है। ईशान कोण को भगवान शिव का स्थान बताते हुए उन्होंने बच्चों को शिव पूजन की शिक्षा देने की बात कही।
आचार्य ने कहा कि गृहस्थ जीवन में शुचिता और अनुशासन ही सुख-समृद्धि का आधार है। परमात्मा की शरण में जाने से मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का मार्ग मिलता है।
महाप्रसाद वितरण में उमड़ा जनसैलाब
संध्या आरती के बाद महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। व्यवस्था इतनी सुव्यवस्थित रही कि भीड़ के बावजूद अनुशासन कायम रहा।
धाम के अध्यक्ष महेश प्रसाद राय के नेतृत्व में पूरी आयोजन समिति सक्रिय रही। उपाध्यक्ष अजीत राय, संयोजक बिहार-झारखंड कृष्ण कन्हैया राय, सचिव अमरेश कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष रंजीत झा सहित अन्य सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आस्था, सेवा और संस्कार का संगम बना धाम
गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम में चल रहा यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और संस्कार निर्माण का माध्यम भी बन रहा है।
एक ओर जहां भागवत कथा के माध्यम से भक्ति और ज्ञान का प्रसार हो रहा है, वहीं आदर्श विवाह और विश्रामालय निर्माण जैसे कार्य समाज के प्रति दायित्व का संदेश दे रहे हैं।
ठाढ़ीदुलमपुर का यह क्षेत्र इन दिनों आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना हुआ है। प्रतिदिन बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या यह प्रमाणित कर रही है कि समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति आस्था आज भी सशक्त है।
26 फरवरी को पूर्णाहुति के साथ आयोजन संपन्न होगा, लेकिन यहां से मिली भक्ति, सेवा और संस्कार की प्रेरणा लंबे समय तक लोगों के जीवन को आलोकित करती रहेगी।

प्रश्न 1: आयोजन कब से कब तक चलेगा?
उत्तर: 18 फरवरी से प्रारंभ हुआ यह नौ दिवसीय महायज्ञ 26 फरवरी को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा।
प्रश्न 2: आयोजन स्थल कहां है?
उत्तर: देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर स्थित गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम परिसर में।
प्रश्न 3: आदर्श विवाह में कितनी कन्याओं का विवाह हुआ?
उत्तर: अब तक 35 कन्याओं का विवाह संपन्न हुआ है, जबकि कुल 101 जोड़ों का संकल्प लिया गया है।
प्रश्न 4: विश्रामालय में कितने कमरे बनेंगे?
उत्तर: धाम परिसर में 40 कमरों के विश्रामालय का निर्माण प्रस्तावित है।
निष्कर्ष
ठाढ़ीदुलमपुर में आयोजित यह श्रीमद् भागवत कथा और महायज्ञ केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, सेवा और संस्कार का व्यापक अभियान बन गया है। आस्था और आयोजन की भव्यता ने इसे देवघर के प्रमुख आध्यात्मिक आयोजनों में शामिल कर दिया है।
Disclaimer: यह समाचार आयोजन समिति और स्थल पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आयोजन की तिथियों या कार्यक्रम में परिवर्तन संभव है।








