गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम में आस्था का महासंगम प्रेम मंदिर का उद्घाटन, राधा-कृष्ण व नर्मदेश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा से गुंजायमान हुआ देवघर

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गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन प्रेम मंदिर का उद्घाटन, राधा-कृष्ण व नर्मदेश्वर महादेव की स्थापना, 101 पंडितों का वेद-पाठ और वृंदावन की रासलीला से देवघर भक्ति में सराबोर।

 

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गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम में आस्था का महासंगम

प्रेम मंदिर का उद्घाटन, राधा-कृष्ण व नर्मदेश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा से गुंजायमान हुआ देवघर

Author: सुनील झा | Location: देवघर | Date: 20 फरवरी 2026

गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन देवघर की पावन भूमि भक्ति, वेद और वैराग्य के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। ठाढ़ीदुलमपुर स्थित धाम परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और घंटानाद के बीच नव-निर्मित प्रेम मंदिर का उद्घाटन हुआ तथा राधा-कृष्ण, मां जगदंबा और नर्मदेश्वर महादेव शिवलिंग की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित नजर आया।

 

प्रेम मंदिर का विधिवत उद्घाटन

गोड्डा लोकसभा क्षेत्र के सांसद निशिकांत दुबे ने वैदिक रीति से फीता काटकर प्रेम मंदिर का उद्घाटन किया। उद्घाटन के साथ ही प्रतिमाओं की स्थापना की पवित्र प्रक्रिया पूर्ण हुई।

जैसे ही आचार्यों ने मंत्रोच्चार के साथ प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई, श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दर्शन-पूजन के लिए लग गईं। भक्तों ने पुष्प, अक्षत और नैवेद्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की। मंदिर परिसर “राधे-राधे” और “हर हर महादेव” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

धाम के अध्यक्ष महेश प्रसाद राय के नेतृत्व में आयोजन समिति ने सभी अनुष्ठानों को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया।

101 विद्वान पंडितों का वेद और अष्टादश पुराण पाठ

महोत्सव की सबसे विशिष्ट झलक रही 101 विद्वान पंडितों द्वारा चारों वेद और अष्टादश पुराणों का सामूहिक पाठ। देवी भागवत, विष्णु पुराण, शिव पुराण, स्कंद पुराण, ब्रह्मांड पुराण, गरुड़ पुराण सहित अन्य ग्रंथों का पारायण धाम को जीवंत गुरुकुल का स्वरूप प्रदान कर रहा है।

सुबह छह बजे से आरंभ हुए अनुष्ठानों में बाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस, सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, दशमहाविद्या पूजा और यज्ञ नारायण का विधिवत आयोजन किया गया। उत्तराखंड से पधारे आचार्यों के मंत्रोच्चार ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया।

 

भागवत कथा: भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संगम

भागवत कथा के प्रवचन में परम सद्गुरु डॉ. दुर्गेश आचार्य ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सेतु है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रद्धा और समर्पण भाव से कथा सुनने वाला व्यक्ति बैकुंठधाम का अधिकारी बनता है। राजा परीक्षित की कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सात दिन के श्रवण से मोक्ष की प्राप्ति संभव है। कलियुग में नाम-स्मरण और कथा-श्रवण को मुक्ति का सर्वोत्तम साधन बताया गया।

 

संध्या आरती और वृंदावन की रासलीला ने बांधा समां

 

संध्या समय दीपमालाओं से सुसज्जित धाम परिसर का दृश्य मनमोहक था। सैकड़ों दीपों की ज्योति से आलोकित मंदिर में सामूहिक आरती हुई।

रात्रि साढ़े सात बजे से वृंदावन (उत्तर प्रदेश) से आए कलाकारों द्वारा राधा-कृष्ण की रासलीला प्रस्तुत की गई। जीवंत मंचन, मधुर संगीत और भावपूर्ण अभिनय ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भक्ति रस में डूबे दर्शकों ने तालियों और जयकारों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम के अंत में महाप्रसाद वितरण किया गया। प्रतिदिन सायं साढ़े सात बजे भंडारे की व्यवस्था है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।

 

श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्था

आयोजन समिति द्वारा विशाल पंडाल, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, प्रसाद वितरण केंद्र और सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं। बाहर से आने वाले भक्तों के लिए विशेष मार्गदर्शन और सहयोग की व्यवस्था की गई है।

मंदिर में चढ़ाने हेतु शुद्ध घी से निर्मित नैवेद्य सशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वयंसेवक अनुशासन बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

 

मुख्य यजमानों की सक्रिय भागीदारी

इस धार्मिक अनुष्ठान के मुख्य यजमान के रूप में अमरेश सिंह, कृष्ण कन्हैया राय, योगेंद्र प्रसाद सिन्हा, दिलीप कुमार, अजीत राय, रूपेश कुमार सिंह, पवन कुमार और विजय राय सपत्नीक सम्मिलित हैं।

समिति के अध्यक्ष महेश प्रसाद राय सहित संरक्षक मंडल, ट्रस्टीगण और कार्यकारिणी समिति के सदस्यों ने आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

देवघर की आध्यात्मिक पहचान को नई ऊंचाई

देवघर पहले से ही बाबा बैद्यनाथ की नगरी के रूप में विश्वविख्यात है। गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम में आयोजित यह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव शहर की आध्यात्मिक पहचान को और सशक्त कर रहा है।

नौ दिवसीय यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां प्रवाहित हो रही भक्ति की गंगा आने वाले समय में और भी व्यापक स्वरूप धारण करेगी।

प्रश्न 1: गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव कितने दिनों का है?

उत्तर: यह महोत्सव नौ दिवसीय है, जिसमें प्रतिदिन वेद-पाठ, कथा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।

प्रश्न 2: प्रेम मंदिर का उद्घाटन किसने किया?

उत्तर: प्रेम मंदिर का उद्घाटन सांसद निशिकांत दुबे ने विधिवत किया।

प्रश्न 3: महोत्सव की प्रमुख विशेषता क्या है?

उत्तर: 101 विद्वान पंडितों द्वारा चारों वेद और अष्टादश पुराणों का सामूहिक पाठ इसकी प्रमुख विशेषता है।

प्रश्न 4: क्या आम श्रद्धालु महाप्रसाद में शामिल हो सकते हैं?

उत्तर: हां, प्रतिदिन सायं आयोजित महाप्रसाद भंडारे में सभी श्रद्धालु शामिल हो सकते हैं।

 

निष्कर्ष

गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव देवघर की आध्यात्मिक चेतना को नई ऊंचाई दे रहा है। प्रेम मंदिर के उद्घाटन और दिव्य प्रतिमाओं की स्थापना के साथ यह आयोजन आस्था का विराट उत्सव बन गया है।

डिस्क्लेमर: यह समाचार आयोजन समिति एवं प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित है। धार्मिक मान्यताएं श्रद्धालुओं की आस्था पर निर्भर करती हैं।

 

 

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Author: Baba Wani

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