पांच फरवरी तक मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन करेगा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ

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पांच फरवरी तक मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन करेगा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ

लंबित भुगतान, सेवा शर्तों और तकनीकी प्रभार को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों में आक्रोश

देवघर में हुई झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की अहम बैठक

 

https://jharkhand/deoghar/health-employees-union-warning-protest-5-february-2026

 

5 फरवरी तक मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन | देवघर स्वास्थ्य कर्मचारी संघ

 

देवघर में झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की बैठक में लंबित मानदेय, एमएसीपी-एसीपी भुगतान और सेवा शर्तों को लेकर नाराजगी। 5 फरवरी तक समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी।

 

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देवघर/संवाददाता।

झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की एक अहम बैठक रविवार को देवघर के कुष्ठ आश्रम रोड स्थित संघ कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र ने की। इस बैठक में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से आए कर्मचारियों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं और लंबित मांगों पर गंभीर चिंता जताई।

बैठक का मुख्य फोकस लंबे समय से लंबित भुगतान, सेवा शर्तों में व्याप्त असमानता और तकनीकी कार्यों के उचित वितरण पर रहा। कर्मचारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उनकी मांगों का समाधान तय समय सीमा तक नहीं हुआ, तो संघ आंदोलन करने को बाध्य होगा।

 

बैठक में उठे प्रमुख मुद्दे

बैठक के दौरान कर्मचारियों ने एक-एक कर अपनी समस्याएं रखीं। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा वित्तीय भुगतान से जुड़ा रहा। संघ का कहना है कि कर्मचारियों को मिलने वाले वैधानिक लाभ वर्षों से लंबित हैं, जिससे उनका आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न हो रहा है।

संघ की प्रमुख मांगों में शामिल हैं—

सभी योग्य कर्मचारियों को पत्र निर्गत की तिथि से एमएसीपी एवं एसीपी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

भुगतान में अनावश्यक देरी के लिए जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत सभी कर्मचारियों के लंबित मानदेय का भुगतान कोषागार के माध्यम से अविलंब कराया जाए।

आउटसोर्सिंग कर्मियों का पुरानी एजेंसी के पास लंबित दो से तीन माह का पारिश्रमिक शीघ्र भुगतान हो।

बॉन्ड सेवा में कार्यरत कर्मियों के बकाया मानदेय का तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

 

तकनीकी कार्यों के प्रभार को लेकर भी नाराजगी

बैठक में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठा कि नियमावली के अनुसार भंडार गृह, पोस्टमार्टम और ज़ख्म प्रतिवेदन जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी कार्यों का प्रभार फार्मासिस्ट को सौंपा जाना चाहिए। कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान में नियमों की अनदेखी कर अन्य कर्मियों से यह कार्य लिया जा रहा है, जिससे कार्यकुशलता और जवाबदेही दोनों प्रभावित हो रही हैं।

संघ ने इस व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने की मांग की और कहा कि नियमों के अनुसार ही कार्य विभाजन होना चाहिए।

 

गणतंत्र दिवस कार्यक्रम पर भी बनी सहमति

बैठक में यह भी सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडोत्तोलन कार्यक्रम धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी सदस्यों से आर्थिक सहयोग की अपील की गई, जिस पर सभी ने सहमति जताई।

 

आंदोलन की चेतावनी

लंबे विचार-विमर्श के बाद संघ ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उपरोक्त मांगों का समाधान पांच फरवरी तक नहीं किया गया, तो झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।

संघ पदाधिकारियों ने कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। यदि सरकार और संबंधित विभाग गंभीर नहीं हुए, तो स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारी मजबूरन सड़क पर उतरने को विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

 

बैठक में ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित

बैठक में जिला सचिव अरुण प्रसाद यादव, अनुबंध एएनएम संघ की जिलाध्यक्ष कुमारी अल्का, जिला सचिव आरती कुमारी, बुद्धि नाथ झा, ज्योति पंडित, पिंकी कुमारी, अनिता कुमारी, किरण, नीलू शेट्टी, डोली कुमारी, पुरण पंडित, शैलेश कुमार, अजित कुमार, राहुल किस्कू, चंदन मिर्धा, सुशन चंद्र टुडू सहित बड़ी संख्या में संघ के सदस्य उपस्थित थे।

 

कर्मचारियों का कहना

स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि वे वर्षों से स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनकर काम कर रहे हैं, लेकिन उनके अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है। समय पर वेतन और मानदेय न मिलने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। अब संघ आर-पार की लड़ाई के मूड में है।

 

 

निष्कर्ष

देवघर में हुई इस बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य कर्मचारी अब और इंतजार के मूड में नहीं हैं। यदि पांच फरवरी तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आने वाले दिनों में जिले में बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है, जिसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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