
देवघर आलोक कुमार हत्याकांड: जमानत खारिज होने पर राहुल चंद्रवंशी का बड़ा खुलासा, फेसबुक पर रखी पूरी कहानी
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देवघर के चर्चित आलोक कुमार हत्याकांड में अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद झामुमो नेता राहुल चंद्रवंशी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए साजिश, सीसीटीवी फुटेज, पैसे की मांग और सामाजिक भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए।
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देवघर आलोक कुमार हत्याकांड: अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद राहुल चंद्रवंशी का पलटवार, फेसबुक पर साजिश का आरोप
कोर्ट से राहत न मिलने के बाद सोशल मीडिया के जरिए रखी अपनी पूरी दलील
सीसीटीवी फुटेज, समय-सीमा और केस डायरी की छाया प्रति की सार्वजनिक
मृतक के भाई पर एक करोड़ रुपये की मांग और देवघर बंद कराने का आरोप
देवघर | संवाददाता

देवघर व्यवहार न्यायालय के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत द्वारा चर्चित आलोक कुमार हत्याकांड मामले में अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद फरार चल रहे आरोपी सह झामुमो नेता राहुल चंद्रवंशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर सामने आकर पूरे मामले को साजिश करार दिया है।
राहुल चंद्रवंशी ने अपनी पोस्ट में न सिर्फ खुद को निर्दोष बताया, बल्कि जांच प्रक्रिया, सीसीटीवी फुटेज, समय-सीमा और पैसे की कथित मांग को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने केस डायरी की छाया प्रति और सीसीटीवी से जुड़ी तस्वीरें भी फेसबुक पर साझा की हैं।
“यह हत्या नहीं, सड़क दुर्घटना थी” – राहुल चंद्रवंशी
राहुल चंद्रवंशी ने लिखा कि 09 दिसंबर 2025 को मॉडर्न पब्लिक स्कूल के पास एक सड़क दुर्घटना हुई थी, जिसमें आलोक कुमार की मौत हो गई। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए शोक व्यक्त किया, लेकिन दावा किया कि इस दुर्घटना को राजनीतिक दबाव में हत्या का रूप दे दिया गया।
उनका आरोप है कि स्थानीय भाजपा नेताओं की साजिश के तहत मृतक के भाई आशुतोष कुमार ने उन्हें हत्यारा बताकर फंसा दिया।
समय का हवाला देकर खुद को बताया निर्दोष
राहुल चंद्रवंशी ने प्रशासनिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए लिखा कि—
आलोक कुमार को प्रशासन द्वारा 22:53:48 बजे इलाज के लिए ले जाया गया
वह स्वयं 22:54:05 बजे, यानी लगभग 20 सेकंड बाद घटनास्थल पर पहुंचे
उन्होंने सवाल उठाया कि जब वह इलाज के लिए ले जाने के बाद पहुंचे, तो इलाज रोकने का आरोप उन पर कैसे लगाया जा सकता है।
सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने का आरोप
फेसबुक पोस्ट में राहुल चंद्रवंशी ने दावा किया कि घटनास्थल से 8 मिनट का सीसीटीवी फुटेज जानबूझकर मिटा दिया गया। उनके अनुसार, उसी फुटेज में—
स्कूल से जुड़े 4–5 लोगों द्वारा गाड़ी में बैठे बच्चों के साथ मारपीट
वाहन जलाने की कोशिश
उनके ऊपर रॉड से हमला करने की कोशिश
स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड था।

पिस्तौल निकालने की दी सफाई
उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने पिस्तौल निकाली थी, लेकिन कहा कि यह आत्मरक्षा के लिए किया गया था। राहुल चंद्रवंशी का दावा है कि भीड़ हिंसक हो चुकी थी और उनकी जान को खतरा था, जिसकी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया।
मृतक के स्कूल में रुकने के दावे को बताया गलत
राहुल चंद्रवंशी ने यह भी कहा कि मृतक आलोक कुमार के मॉडर्न पब्लिक स्कूल में रुकने की बात गलत है। उनके अनुसार, आलोक कुमार स्कूल में कार्यरत थे और यह जानकारी खुद स्कूल के मालिक ने प्रशासन को दी है।

एक करोड़ रुपये की मांग का गंभीर आरोप
पोस्ट में सबसे गंभीर आरोप मृतक के भाई आशुतोष कुमार पर लगाए गए हैं। राहुल चंद्रवंशी के अनुसार—
केस को मैनेज करने के नाम पर एक करोड़ रुपये की मांग की गई
उन्होंने 35 लाख रुपये का इंश्योरेंस दिलवाने की बात कही
इसके बाद 23 दिसंबर 2025 को देवघर बंद करवाने, लोगों को उकसाने और डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया
उन्होंने यह भी दावा किया कि देवघर बंद का उद्देश्य उन्हें डराकर पैसे वसूलना था।
सामाजिक भेदभाव और साजिश का दावा
राहुल चंद्रवंशी ने पूरे मामले को सामाजिक साजिश बताते हुए कहा कि वह चंद्रवंशी समाज से आते हैं और राजनीति में उनका आगे बढ़ना कुछ प्रभावशाली लोगों को स्वीकार नहीं है। इसी कारण उन्हें जानबूझकर फंसाया गया है।
“न्यायालय और बाबा पर भरोसा”
पोस्ट के अंत में राहुल चंद्रवंशी ने लिखा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि यह बाबा बैद्यनाथ की नगरी है, जहां कभी अन्याय नहीं होता और उन्हें पूरा विश्वास है कि सच्चाई सामने आएगी।









