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श्रावणी मेला 2026 होगा हाईटेक, 900 से अधिक CCTV कैमरों से होगी निगरानी, लाइव डैशबोर्ड से मिलेगी हर जानकारी
देवघर श्रावणी मेला 2026 को हाईटेक बनाने की तैयारी पूरी। 900 से अधिक CCTV, 200 AI कैमरे, इंटीग्रेटेड मेला कंट्रोल रूम, लाइव डैशबोर्ड, डिजिटल खोया-पाया व्यवस्था और गर्भगृह में मोबाइल प्रतिबंध पर बड़ा अपडेट।
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श्रावणी मेला 2026 होगा पूरी तरह हाईटेक, 900 से अधिक CCTV कैमरों से होगी चौबीसों घंटे निगरानी : एसडीओ रवि कुमार
इंटीग्रेटेड मेला कंट्रोल रूम, AI कैमरे, लाइव डैशबोर्ड और डिजिटल खोया-पाया व्यवस्था से श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत, गर्भगृह में मोबाइल प्रतिबंध पर भी चल रहा मंथन
सुनील झा: देवघर: 10. 07. 2026

विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में 29 जुलाई से आरंभ होने वाले श्रावणी मेला-2026 को इस बार पूरी तरह हाईटेक बनाने की तैयारी अंतिम चरण में है। हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के इस महापर्व को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक रणनीति तैयार की है। इस बार श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, सूचना प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है, ताकि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए आने वाले शिवभक्तों को पहले से अधिक सुविधाएं मिल सकें।
शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए देवघर के अनुमंडल पदाधिकारी सह बाबा मंदिर प्रभारी रवि कुमार ने बताया कि श्रावणी मेला-2026 में कई नई डिजिटल व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। इनका उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सहज और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
इंटीग्रेटेड मेला कंट्रोल रूम से होगी पल-पल की निगरानी
एसडीओ रवि कुमार ने बताया कि इस वर्ष मेला क्षेत्र के संचालन के लिए अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड मेला कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। पिछले वर्ष इसका सफल परीक्षण किया गया था, जिसके बेहतर परिणाम सामने आए थे। इस बार कंट्रोल रूम को और अधिक उन्नत बनाया गया है, जहां से पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, अग्निशमन सेवा तथा अन्य विभाग संयुक्त रूप से पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी करेंगे।
किसी भी आपात स्थिति, भीड़ बढ़ने, दुर्घटना या अन्य घटनाओं की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी और संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई कर सकेंगे।
900 से अधिक CCTV और 200 AI कैमरों का सुरक्षा कवच
श्रावणी मेला में इस बार सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया जा रहा है। एसडीओ ने बताया कि पूरे मेला क्षेत्र में 900 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा 200 से अधिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित स्मार्ट कैमरे भी लगाए जाएंगे।
ये कैमरे केवल रिकॉर्डिंग ही नहीं करेंगे, बल्कि भीड़ का घनत्व, संदिग्ध गतिविधियों और संवेदनशील क्षेत्रों पर स्वतः नजर रखेंगे। कंट्रोल रूम में बैठी टीम रियल टाइम फुटेज के आधार पर तत्काल निर्णय ले सकेगी।
अब टोकन नहीं, तकनीक से होगी कांवरियों की गणना
पहले दुम्मा स्थित झारखंड प्रवेश द्वार पर कांवरियों की संख्या टोकन एवं मैनुअल प्रणाली से दर्ज की जाती थी। इस बार यह व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी।
ऑनलाइन सर्विलांस और स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से श्रद्धालुओं की संख्या का स्वतः आकलन किया जाएगा। इससे प्रशासन को भीड़ प्रबंधन में काफी मदद मिलेगी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जा सकेगी।
लाइव डैशबोर्ड देगा हर जरूरी अपडेट
इस बार श्रद्धालुओं के लिए लाइव डैशबोर्ड सबसे बड़ी सुविधा साबित होगा।
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर श्रद्धालु अपने मोबाइल या अन्य माध्यम से यह जानकारी प्राप्त कर सकेंगे—
- बाबा मंदिर में दर्शन के लिए अनुमानित प्रतीक्षा समय।
- कितने श्रद्धालु जलार्पण कर चुके हैं।
- कतार में कितने श्रद्धालु मौजूद हैं।
- रेलवे की ट्रेनों की समय-सारिणी।
- देवघर एयरपोर्ट की उड़ानों की जानकारी।
- होटल, धर्मशाला और लॉज में उपलब्ध कमरों एवं बेड की स्थिति।
- प्रशासन द्वारा जारी आवश्यक दिशा-निर्देश एवं अलर्ट।
इससे श्रद्धालु अपनी यात्रा की बेहतर योजना बना सकेंगे और अनावश्यक भीड़ भी कम होगी।
डिजिटल होगी खोया-पाया व्यवस्था
हर वर्ष श्रावणी मेला में बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने परिजनों से बिछड़ जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए इस बार खोया-पाया व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है।
अब केवल सूचना केंद्रों से घोषणा करने के बजाय ऑनलाइन माध्यम से भी बिछड़े लोगों की जानकारी साझा की जाएगी। इससे परिजनों को कम समय में मिलाने में सफलता मिलने की उम्मीद है।
गर्भगृह में मोबाइल प्रतिबंध पर अंतिम निर्णय जल्द
बाबा मंदिर के गर्भगृह में मोबाइल फोन ले जाने पर संभावित प्रतिबंध के संबंध में एसडीओ रवि कुमार ने कहा कि इस विषय पर अभी चर्चा चल रही है।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा और अत्यधिक भीड़ को देखते हुए यह निर्णय लिया जा सकता है। कई श्रद्धालु गर्भगृह में मोबाइल से फोटो और वीडियो बनाने में अधिक समय लेते हैं, जिससे जलार्पण की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और कतार लंबी हो जाती है।
हालांकि यदि मोबाइल प्रतिबंध लागू किया जाता है तो श्रद्धालुओं के मोबाइल सुरक्षित रखने के लिए अलग व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए एक सुरक्षित कक्ष तैयार किया गया है, जहां श्रद्धालु अपने मोबाइल जमा कर सकेंगे।
श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता
एसडीओ ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराना भी है। तकनीक के माध्यम से भीड़ नियंत्रण, सूचना प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर युद्धस्तर पर तैयारियां चल रही हैं ताकि देश-विदेश से आने वाले लाखों शिवभक्तों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रमुख बातें (Highlights)
- 29 जुलाई से शुरू होगा श्रावणी मेला-2026।
- 900 से अधिक CCTV कैमरे और 200 AI कैमरे लगाए जाएंगे।
- इंटीग्रेटेड मेला कंट्रोल रूम से होगी 24×7 निगरानी।
- लाइव डैशबोर्ड पर मिलेगी दर्शन, भीड़, ट्रेन, फ्लाइट और होटल की जानकारी।
- खोया-पाया व्यवस्था होगी पूरी तरह डिजिटल।
- गर्भगृह में मोबाइल प्रतिबंध पर प्रशासन कर रहा विचार।
- मोबाइल सुरक्षित रखने के लिए अलग कक्ष तैयार।
प्रश्न 1: श्रावणी मेला-2026 कब से शुरू होगा?
उत्तर: श्रावणी मेला 29 जुलाई 2026 से शुरू होगा।
प्रश्न 2: इस बार कितने CCTV कैमरे लगाए जाएंगे?
उत्तर: पूरे मेला क्षेत्र में 900 से अधिक CCTV कैमरे और 200 से अधिक AI आधारित स्मार्ट कैमरे लगाए जाएंगे।
प्रश्न 3: लाइव डैशबोर्ड से क्या जानकारी मिलेगी?
उत्तर: दर्शन का अनुमानित समय, भीड़ की स्थिति, जलार्पण करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या, ट्रेन-फ्लाइट की जानकारी और होटल में उपलब्ध कमरों की जानकारी मिलेगी।
प्रश्न 4: क्या गर्भगृह में मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध लगेगा?
उत्तर: इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। प्रशासन सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए विचार कर रहा है।
निष्कर्ष
श्रावणी मेला-2026 में पहली बार आधुनिक तकनीक का इतने व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा रहा है। AI कैमरे, इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम, लाइव डैशबोर्ड और डिजिटल खोया-पाया जैसी व्यवस्थाएं न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा को मजबूत करेंगी, बल्कि उनकी यात्रा को भी अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाएंगी। यदि सभी तैयारियां तय समय पर पूरी हो जाती हैं, तो इस बार का श्रावणी मेला देश के सबसे आधुनिक और तकनीक-संचालित धार्मिक आयोजनों में शामिल हो सकता है।










