जननायक हरिशंकर पत्रलेख की प्रथम पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब

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जननायक हरिशंकर पत्रलेख की प्रथम पुण्यतिथि पर देवघर के कुशवाहा गांव में भावभीनी श्रद्धांजलि सभा आयोजित, जनसैलाब उमड़ा और लोगों ने नम आंखों से किया स्मरण।

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जननायक हरिशंकर पत्रलेख की प्रथम पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब

कुसुमेश्वरी मंदिर परिसर में भावभीनी श्रद्धांजलि, नम आंखों से लोगों ने किया स्मरण

सुनील झा | देवघर | 02 अप्रैल 2026

कुसुमेश्वरी मंदिर परिसर में हरिशंकर पत्रलेख की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा
श्रद्धांजलि सभा में उमड़ी भीड़ और भावुक माहौल

देवघर जिले के सारवां प्रखंड अंतर्गत कुशवाहा गांव गुरुवार को भावनाओं के सागर में डूबा नजर आया, जब जननेता और जननायक स्वर्गीय हरिशंकर पत्रलेख की प्रथम पुण्यतिथि पर कुसुमेश्वरी मंदिर परिसर में एक भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जनसैलाब उमड़ पड़ा और हर आंख नम दिखाई दी। गांव से लेकर आसपास के क्षेत्रों तक के लोग बड़ी संख्या में जुटे और अपने प्रिय नेता को श्रद्धा-सुमन अर्पित कर याद किया।

कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह भावुक रहा। मंच पर रखे स्वर्गीय पत्रलेख के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए। हर चेहरे पर एक ही भाव था—एक ऐसे जननायक को खो देने का, जिसने जीवनभर समाज सेवा को अपना धर्म माना।

हर दिल में बसते थे पत्रलेख, हर जुबान पर उनकी चर्चा
सभा में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि हरिशंकर पत्रलेख सिर्फ एक नेता नहीं थे, बल्कि जन-जन के नेता थे। उन्होंने अपने जीवन को आम लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया था। वक्ताओं ने कहा कि उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना बेहद कठिन है।

लोगों ने याद करते हुए कहा कि वे हर जरूरतमंद के साथ खड़े रहते थे—चाहे वह किसी भी वर्ग या समाज से क्यों न हो। उनकी पहचान एक सुलभ, सहज और संघर्षशील नेता के रूप में थी। यही कारण है कि आज भी उनके प्रति लोगों का प्रेम और सम्मान कम नहीं हुआ है।

बेंगलुरु से पहुंचीं लेखिका पूजा उपाध्याय, साझा की यादें

कार्यक्रम की सूचना मिलते ही बेंगलुरु से लेखिका पूजा उपाध्याय विशेष रूप से कुशवाहा गांव पहुंचीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हरिशंकर पत्रलेख का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि उनसे जुड़ा हर व्यक्ति आज भी उनकी यादों में जीता है।

उन्होंने कहा, “यहां मौजूद हर व्यक्ति के पास उनसे जुड़ी कोई न कोई प्रेरणादायक कहानी है। यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है, जो उन्हें आज भी लोगों के दिलों में जीवित रखे हुए है।”

उनके शब्दों ने सभा में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और वातावरण और भी मार्मिक हो उठा।

जेपी आंदोलन से शुरू हुआ संघर्ष का सफर

सभा के दौरान उनके बचपन के मित्र गोविंद लस्कर ने उनके जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन से ही पत्रलेख का झुकाव जनसेवा की ओर था।

पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले ऐतिहासिक जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने पुलिस की लाठियां खाईं, जेल गए, लेकिन अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
यह संघर्षशीलता ही उन्हें एक मजबूत जननेता बनाती थी, जिसे लोग आज भी याद करते हैं।

परिवार की आंखों में आंसू, पर गर्व भी कम नहीं

श्रद्धांजलि सभा में स्वर्गीय पत्रलेख के परिजन भी मौजूद रहे। उनके छोटे भाई श्याम किशोर पत्रलेख और उनके साथी दुर्गा प्रसाद लस्कर ने सबसे पहले पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

इस मौके पर उनके पुत्र—पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख और विक्रम पत्रलेख  सहित परिवार के सदस्य भी उपस्थित रहे। जहां पुत्र ने भावुक होकर अपने पिता को याद किया। वहीं अन्य सदस्य भी भावुक हो गए।

उन्होंने कहा कि उनके पिता ने हमेशा समाज और संगठन को प्राथमिकता दी। लोगों की सेवा ही उनका सबसे बड़ा धर्म था। आज भी वे उसी रास्ते पर चलने का प्रयास कर रहे हैं।

राजनीति में सादगी और सेवा का प्रतीक थे पत्रलेख
सभा में वक्ताओं ने कहा कि हरिशंकर पत्रलेख ने अपने राजनीतिक जीवन में कांग्रेस पार्टी के साथ रहकर संगठन को मजबूत किया।

वे पूर्व जिला बीस सूत्री उपाध्यक्ष और जगमनडीह पंचायत के मुखिया भी रहे। अपने पदों पर रहते हुए उन्होंने हमेशा आम लोगों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी।

उनकी कार्यशैली में सादगी, ईमानदारी और जनसेवा का अद्भुत संगम था। यही वजह है कि वे लोगों के दिलों में आज भी जिंदा हैं।

“पटना में रहते तो बड़े नेता बनते” – वक्ताओं की राय

सभा के दौरान कई वक्ताओं ने कहा कि अगर हरिशंकर पत्रलेख आज जीवित होते और पटना जैसे बड़े राजनीतिक केंद्र में सक्रिय रहते, तो वे न केवल झारखंड बल्कि बिहार की राजनीति में भी एक बड़ा नाम होते।

उनका व्यक्तित्व, संघर्ष और जनसेवा की भावना उन्हें एक अलग पहचान दिलाती।

लोगों ने कहा कि वे सिर्फ स्थानीय नेता नहीं थे, बल्कि उनमें राज्य स्तर की राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल करने की पूरी क्षमता थी।

कविता के जरिए दी गई श्रद्धांजलि

कार्यक्रम का मंच संचालन कर रहे नीलम कुमार निशांत ने कविता के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी भावनात्मक प्रस्तुति ने माहौल को और भी मार्मिक बना दिया।

सभा में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ उनकी प्रस्तुति का स्वागत किया, लेकिन आंखों में आंसू भी साफ झलक रहे थे।

बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों की उपस्थिति

इस श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, समाजसेवियों, चिकित्सकों, बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

मुख्य रूप से राजेंद्र दास, दिनेशानंद झा, अवधेश प्रजापति, उदय प्रकाश, पंजाबी राउत, राजेश कुमार सिंह, डॉ अतनु चक्रवर्ती, डॉ अजय कुमार सिंह, राजेश साह, डॉ बीके सिन्हा, पूजा उपाध्याय, नजाबुल अंसारी, बृजभूषण राम, मुबारक अंसारी, सुलेखा देवी, दिवाकर पासवान, सत्येंद्र हाजरा, अर्जुन हाजरा, भूपाल प्रसाद सिंह, प्रदीप नटराज, पिंटू शेख, परशुराम वर्मा, विनोद वर्मा, त्रिलोचन राम, अजय कुमार सिंह, अनंत मिश्रा, दीपक झा, मोहम्मद फिरोज, रियासत अली, संजय राणा, कृष्णा सिंह, मुकेश यादव, बाबुराम मुर्मु, अजय कुमार पंडित, प्रभात चरण मिश्रा, राजेश साह, मुकेश यादव, राजेश यादव, प्रकाश यादव, त्रिलोचन राम सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

सभी ने एक स्वर में कहा कि पत्रलेख का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

निष्कर्ष

स्वर्गीय हरिशंकर पत्रलेख की प्रथम पुण्यतिथि सिर्फ एक श्रद्धांजलि सभा नहीं थी, बल्कि यह उनके जीवन, संघर्ष और विचारों को याद करने का एक अवसर था।
उनकी सादगी, सेवा और समर्पण की भावना आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।

भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनके आदर्श और उनकी प्रेरणाएं हमेशा समाज को दिशा देती रहेंगी।

Q1. हरिशंकर पत्रलेख की पुण्यतिथि कहां मनाई गई?

A. कुसुमेश्वरी मंदिर परिसर, कुशवाहा गांव (सारवां प्रखंड, देवघर) में।

Q2. कार्यक्रम में किन-किन लोगों ने भाग लिया?

A. राजनीतिक नेताओं, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए।

Q3. पूजा उपाध्याय कहां से आई थीं?

A. वे बेंगलुरु से विशेष रूप से श्रद्धांजलि देने पहुंचीं।

Q4. हरिशंकर पत्रलेख की प्रमुख पहचान क्या थी?

A. वे एक जननायक, समाजसेवी और कांग्रेस से जुड़े सक्रिय नेता थे।

Q5. लोगों ने उन्हें किस रूप में याद किया?

A. एक सादगीपूर्ण, संघर्षशील और जनसेवा के प्रति समर्पित नेता के रूप में।

Disclaimer: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर तैयार किया गया है।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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