देवघर हवाई अड्डे पर यात्री सुरक्षा को नई मजबूती, एम्स देवघर ने कराया व्यापक सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम

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देवघर हवाई अड्डे पर यात्री सुरक्षा को नई मजबूती, एम्स देवघर ने कराया व्यापक सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम

 

आपात स्थिति में जीवनरक्षा के लिए अग्रिम पंक्ति के कर्मियों को मिला विशेष प्रशिक्षण

 

हृदयाघात की स्थिति में आम नागरिक भी निभा सकेंगे निर्णायक भूमिका

 

हवाई अड्डा जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थल पर स्वास्थ्य व विमानन प्रशासन का प्रभावी सहयोग

 

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देवघर हवाई अड्डे पर यात्री सुरक्षा और आपातकालीन तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए एम्स देवघर द्वारा सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जानिए कैसे यह पहल आपात स्थिति में जीवन बचाने में सहायक बनेगी।

 

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देवघर/संवाददाता।

देवघर हवाई अड्डे पर यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारी को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, देवघर द्वारा हवाई अड्डा परिसर में व्यापक हृदय एवं फेफड़ा पुनर्जीवन (सीपीआर) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम हवाई अड्डा निदेशक एवं संचालन से जुड़े अधिकारियों के सहयोग से संपन्न हुआ, जो यह दर्शाता है कि हवाई अड्डा प्रशासन यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।

 

 

यात्रियों की बढ़ती आवाजाही के बीच सुरक्षा पर विशेष ध्यान

देवघर हवाई अड्डा झारखंड के प्रमुख हवाई अड्डों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री आवागमन करते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की चिकित्सीय आपात स्थिति, विशेषकर अचानक हृदयाघात, के दौरान त्वरित सहायता उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए एम्स देवघर ने यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया, ताकि हवाई अड्डे पर कार्यरत कर्मी आपात स्थिति में घबराने के बजाय सही और त्वरित निर्णय ले सकें।

 

अग्रिम पंक्ति के कर्मियों को मिला जीवनरक्षक कौशल

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हवाई अड्डे से जुड़ी विभिन्न इकाइयों और विभागों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। अग्निशमन एवं बचाव विभाग, भूमि संचालन से जुड़े कर्मी, निजी विमान सेवा के कर्मचारी तथा अन्य सहायक स्टाफ ने पूरे उत्साह के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अग्रिम पंक्ति में कार्यरत कर्मियों को ऐसे जीवनरक्षक कौशल से लैस करना था, जिससे वे अचानक हृदयाघात, बेहोशी या सांस रुकने जैसी स्थितियों में पीड़ित को तत्काल प्राथमिक सहायता प्रदान कर सकें।

एम्स देवघर और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की संयुक्त पहल

यह सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम एम्स देवघर और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के सहयोग से चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियान का हिस्सा है। एम्स देवघर की टीम ने बताया कि अस्पताल से बाहर होने वाले हृदयाघात के मामलों में यदि समय पर छाती पर दबाव देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए, तो पीड़ित के जीवन बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

कार्यक्रम का आयोजन एम्स देवघर के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रो. (डॉ.) नितिन गंगाने के मार्गदर्शन में किया गया। प्रशिक्षण सत्र का संचालन परियोजना प्रमुख एवं नर्सिंग महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ. राखी गौर ने किया। इस दौरान परियोजना समन्वयक अंजलि कुमारी शॉ और नर्सिंग अधिकारी प्रेरणा रावत ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

 

हैंड्स-ओनली सीपीआर से आम नागरिक भी बनेंगे जीवन रक्षक

हैंड्स-ओनली सीपीआर प्रशिक्षण विशेष रूप से 12 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए तैयार किया गया है। इसमें पीड़ित को मुंह से सांस दिए बिना केवल छाती पर दबाव देने की सही विधि सिखाई जाती है। यह तकनीक सरल होने के कारण आम नागरिक भी आसानी से सीख सकते हैं और आपात स्थिति में बिना किसी उपकरण के इसका उपयोग कर सकते हैं।

डॉ. राखी गौर ने बताया कि यह प्रशिक्षण केवल तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के मन से डर निकालकर उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे आने के लिए प्रेरित करता है। कई बार मौके पर मौजूद व्यक्ति ही पीड़ित के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बन सकता है।

 

व्यावहारिक अभ्यास से बढ़ा आत्मविश्वास

प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को विशेष अभ्यास पुतलों पर स्वयं अभ्यास करने का अवसर दिया गया। विशेषज्ञों की निगरानी में किए गए इस अभ्यास से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव मिला। संवादात्मक प्रशिक्षण शैली के कारण प्रतिभागियों ने खुलकर प्रश्न पूछे और अपनी शंकाओं का समाधान पाया।

इस व्यावहारिक अनुभव से कर्मियों में न केवल तकनीकी दक्षता बढ़ी, बल्कि आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी विकसित हुआ।

 

हवाई अड्डा प्रशासन ने जताया आभार

हवाई अड्डा प्रशासन की ओर से एम्स देवघर की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया गया। अधिकारियों ने कहा कि हवाई अड्डा जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थल पर इस प्रकार के क्षमता-विकास कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। समय पर और सही तरीके से किया गया चिकित्सीय हस्तक्षेप कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है।

 

सुरक्षित सार्वजनिक स्थलों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

देवघर हवाई अड्डे पर आयोजित यह सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्य संस्थानों और विमानन प्रशासन के बीच मजबूत समन्वय का उदाहरण है। यह पहल न केवल हवाई अड्डे को अधिक सुरक्षित बनाती है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा देती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं, तो आम नागरिक भी आपात स्थिति में जीवनरक्षक की भूमिका निभा सकते हैं। देवघर हवाई अड्डे पर हुई यह पहल निश्चित रूप से अन्य सार्वजनिक स्थलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी और सुरक्षित समाज के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगी।

 

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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