देवघर में नौ दिवसीय अतिरुद्र महायज्ञ का भव्य समापन, स्वामी हरिहरानंद जी ने सहयोगकर्ताओं को सम्मानित किया। 2026 में दिल्ली में होगा अगला विशाल आयोजन।

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देवघर में अतिरुद्र महायज्ञ का भव्य समापन, 2026 में दिल्ली में आयोजन

 

 

 

 

 

देवघर में नौ दिवसीय अतिरुद्र महायज्ञ का भव्य समापन, स्वामी हरिहरानंद जी ने सहयोगकर्ताओं को सम्मानित किया। 2026 में दिल्ली में होगा अगला विशाल आयोजन।

 

 

 

 

 

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देवघर में अतिरुद्र महायज्ञ का भव्य समापन, सहयोगकर्ताओं का सम्मान; 2026 में दिल्ली में होगा और भी विराट आयोजन

 

देवघर। आरएल सर्राफ स्कूल प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय अतिरुद्र महायज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन अत्यंत दिव्यता, श्रद्धा और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। दैवी सम्पत मंडल द्वारा आयोजित इस महान अनुष्ठान में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर संपूर्ण देवघर को आध्यात्मिकता की धारा में सराबोर कर दिया।

 

समापन अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद जी महाराज ने यज्ञ की सफलता में प्रत्यक्ष–परोक्ष रूप से सहयोग करने वाले व्यक्तियों, सेवकों, संस्थाओं, सामाजिक संगठनों तथा मीडिया प्रतिनिधियों को प्रशस्ति पत्र और प्रसाद देकर सम्मानित किया।

 

 

 

स्वामी हरिहरानंद जी का आशीर्वचन: “यह यज्ञ ब्रह्मलीन गुरु के संकल्प का फल है”

 

समापन समारोह को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि यह महायज्ञ उनके ब्रह्मलीन गुरुदेव स्वामी शारदानंद जी महाराज के संकल्प का प्रतिफल है। श्रद्धा, अनुशासन, सेवा और गुरु भाइयों के अथक प्रयासों से यह विराट आयोजन दिव्य रूप से संपन्न हुआ।

 

उन्होंने देवघर की जनता, देश–विदेश से आए भक्तों और सभी सेवकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। स्वामी जी ने कहा—

 

> “देवघरवासियों का प्रेम और समर्पण अद्भुत है। इस शहर ने जिस भक्तिभाव से आयोजन को सफल बनाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।”

 

 

 

 

 

 

नौ दिनों तक छाया आध्यात्मिक उत्सव का रंग

 

इस अतिरुद्र महायज्ञ की शुरुआत 26 नवंबर 2025 को हुई थी। नौ दिनों तक यज्ञशाला में मंत्रोच्चार, वैदिक अनुष्ठान, शंखनाद, ढोल–नगाड़ों की ध्वनि और श्रीमद्भागवत कथा की दिव्य गूंज छाई रही।

 

संपूर्ण वातावरण में भक्ति चिंतन, साधना और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत संगम दिखाई दिया। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यज्ञ मंडप में परिक्रमा करने आए, जहां ऐसा प्रतीत होता था कि मानो देवघर में कोई आध्यात्मिक कुंभ साकार हो गया हो।

 

पूर्णाहुति के दिन 20,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया, जो इस आयोजन की व्यापकता और लोकप्रियता का साक्ष्य है। अनेक भक्तों ने यज्ञ भभूति, कलश का जल और पवित्र धूल अपने घर ले जाकर संजोया। उनके चेहरे पर दिखती शांति और संतोष आयोजन की दिव्यता को दर्शाती थी।

 

 

 

 

5 दिसंबर को आशीर्वाद समारोह: मीडिया, सेवकों व संस्थाओं का सम्मान

 

समापन के अगले दिन 5 दिसंबर को ‘आशीर्वाद समारोह’ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्वामी हरिहरानंद जी महाराज की विशेष इच्छा पर आयोजित हुआ, जिसमें—

 

देवघर के प्रिंट मीडिया,

 

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,

 

डिजिटल/सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर,

 

स्थानीय सामाजिक संस्थाएँ,

 

मारवाड़ी समाज,

 

महिला समितियाँ,

 

गुरु भाई–बहन,

 

कार्यकर्ता एवं सेवक

 

 

सभी को सम्मानित किया गया।

 

सम्मानित प्रमुख संस्थाएँ

 

श्री बैद्यनाथ धाम गौशाला

 

मारवाड़ी सम्मेलन

 

मारवाड़ी युवा मंच

 

श्री श्याम कीर्तन मंडल

 

महिला समिति एवं महिला विकास मंडल

आदि को विशेष रूप से प्रशस्ति पत्र और प्रसाद प्रदान किया गया।

 

 

स्वामी जी ने स्वयं प्रसाद देकर सभी प्रतिनिधियों को आशीष प्रदान किया, जिससे वातावरण और अधिक पावन हो उठा।

 

 

 

संत समाज और दैवी सम्पत मंडल की भावनाएँ

 

दैवी सम्पत मंडल के प्रमुख पदाधिकारियों ने अपनी भावनाएँ रखते हुए कहा कि यह आयोजन गुरु की कृपा और समाज के सहयोग से ही संभव हो पाया।

 

प्रमुख सलाहकार डॉ गिरधारी अग्रवाल ने कहा—

 

> “जो भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस महायज्ञ की किसी भी सेवा में जुड़े, वे सभी इस दिव्य फल के अधिकारी हैं।”

 

 

 

अध्यक्ष विनोद कुमार सुल्तानिया और महामंत्री रमेश कुमार बाजला ने भी अत्यंत भक्ति भाव से धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

महामंत्री बाजला ने गिरधारी अग्रवाल जी की सराहना करते हुए कहा—

 

> “वे रामभक्त हनुमान की तरह हर कार्य में तत्पर रहे। उनकी प्रतिबद्धता के कारण ही महायज्ञ अत्यंत सफल रहा।”

 

 

 

प्रचार–प्रसार विभाग के पंकज कुमार पचेरीवाला ने कहा—

 

> “प्रत्येक सेवक का योगदान किसी आहुति से कम नहीं। सभी को इस पूण्य फल का लाभ अवश्य मिलेगा।”

 

 

 

 

 

मीडिया की भूमिका की सराहना

 

स्वामी हरिहरानंद जी ने कहा कि मीडिया ने रात्रि–दिन परिश्रम कर यज्ञ की गतिविधियों को जन-जन तक पहुँचाया, जिसके कारण यह आयोजन केवल देवघर ही नहीं, बल्कि देश–विदेश में चर्चा का विषय बन गया।

 

उन्होंने स्थानीय संवाददाताओं को ‘सच्चा धर्म–सेवक’ बताते हुए सम्मानित किया।

 

 

 

 

1999 के बाद पहली बार इतना विराट आयोजन

 

देवघर में इस स्तर का अतिरुद्र महायज्ञ लगभग 26 वर्षों बाद हुआ है। 1999 के बाद यह पहली बार था जब इतना भव्य अनुष्ठान देवघर की धरती पर सम्पन्न हुआ। स्थानीय लोगों के लिए यह आध्यात्मिक धरोहर का अमूल्य अवसर साबित हुआ।

 

 

 

 

2026 में दिल्ली में होगा और भी विशाल अतिरुद्र महायज्ञ – बड़ी घोषणा

 

समापन समारोह की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए स्वामी हरिहरानंद जी महाराज ने बताया कि—

 

> “अतिरुद्र महायज्ञ की नई श्रृंखला अब देवघर से प्रारंभ हो चुकी है। इसकी अगली कड़ी नवंबर 2026 में दिल्ली में आयोजित होगी, और यह आयोजन देवघर से भी अधिक भव्य और विराट होगा।”

 

 

 

इस घोषणा के बाद श्रद्धालुओं में उत्साह और उल्लास भर गया। दिल्ली में होने वाले इस आयोजन को लेकर दैवी सम्पत मंडल ने अभी से तैयारियों का संकेत दिया है।

 

 

 

 

देवघर की आध्यात्मिक स्मृति में रहेगा यह आयोजन

 

यह महायज्ञ न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण था, बल्कि सामाजिक एकता, सेवा–भाव, सदाचार और संत संस्कृति के संरक्षण का भी संदेश लेकर आया।

 

देवघर में 2025 का यह महायज्ञ आने वाले वर्षों तक आध्यात्मिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।

 

 

 

 

निष्कर्ष

 

देवघर में संपन्न नौ दिवसीय अतिरुद्र महायज्ञ ने साबित किया कि जब गुरु की कृपा, सेवकों की निष्ठा और समाज का सहयोग एकत्र होता है, तो दिव्यता स्वयं प्रकट होती है।

अब सभी की निगाहें नवंबर 2026 के दिल्ली महायज्ञ पर टिकी हैं, जिसकी तैयारियाँ शुरू कर दी गई हैं और जो निश्चय ही और भी भव्य रूप में आयोजित होगा।

 

 

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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