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✅ देवघर अति रुद्र महायज्ञ: सातवें दिन रुक्मणी विवाह बना मुख्य आकर्षण
✅ देवघर में अति रुद्र महायज्ञ के सातवें दिन रुक्मणी विवाह, भव्य झांकियां, वैदिक अनुष्ठान, हवन, भागवत कथा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को दिव्य बना दिया।
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अति रुद्र महायज्ञ देवघर का सातवां दिन: रुक्मणी विवाह बना मुख्य आकर्षण, उमड़ी आस्था की अविरल धारा

देवघर।
देवी संपत मंडल के तत्वावधान में बाबानगरी देवघर में चल रहे नौ दिवसीय अति रुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। आर.एल. सर्राफ स्कूल मैदान एवं आसपास का संपूर्ण क्षेत्र सुबह से ही आध्यात्मिक स्पंदन से गूंज उठा।
शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और 108 हवन-कुंडों से उठती हवि-सुगंध ने ऐसा दिव्य वातावरण निर्मित कर दिया कि मानो पूरा नगर देवलोक में परिवर्तित हो गया हो।
सुबह से ही भक्तगण यज्ञ मंडप की परिक्रमा करते, ‘हर हर महादेव’, ‘जय श्रीराम’, ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के उद्घोष से वातावरण को पवित्र करते नजर आए। महिलाओं के पारंपरिक वेश-भूषा, पूजा-थालियों की सजावट और भजन-कीर्तन की स्वर-लहरियों ने परिसर को और भी दिव्य बना दिया।
सातवें दिन की शुरुआत—वैदिक ऋचाओं और 108 हवन कुंडों से उठा पवित्र धुआँ
सुबह की शुरुआत परंपरागत वैदिक विधि-विधान से हुई। 108 हवन कुंडों के सामने बैठे ब्राह्मणों ने वैदिक ऋषियों की परंपरा को जीवंत करते हुए यज्ञीय अनुष्ठानों की आहुति दी। उठते धूप-धुएँ और मंत्रोच्चार ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।
इस अवसर पर देशभर से आए संत-महात्माओं ने उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें प्रमुख रूप से —
आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 108 विशेश्वरानंद भारती जी
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद जी महाराज
महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी महाराज (पटौदी, हरियाणा)
स्वामी राम भूषण दास जी महाराज (अमरकंटक)
महामंडलेश्वर स्वामी आनंद चैतन्य जी महाराज
महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद जी महाराज
स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज
स्वामी विवेकानंद जी महाराज
सभी संतों ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, सेवा, समर्पण, मानवता और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला।
मंच का संचालन स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती एवं आचार्य शुभेष शर्मा ने गरिमापूर्ण ढंग से किया।

दो दिनों बाद पूर्ण होगा स्वामी शारदानंद का संकल्प—देवघर रचेगा धार्मिक इतिहास
आने वाले दो दिनों में अति रुद्र महायज्ञ अपने चरम पर पहुंचेगा।
महामंडलेश्वर स्वामी शारदानंद जी महाराज के संकल्प को उनके शिष्य स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज पूर्ण करेंगे।
इस भव्य आयोजन को धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी ने अपने गुरु के संकल्प को पूरा करने के लिए सभी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद इसे बाबा बैद्यनाथ की कृपा बताते हुए कहा कि यह संगम आने वाले युगों तक याद किया जाएगा। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, हरिद्वार, दिल्ली और पूरे देश के सनातन प्रेमियों द्वारा इस आयोजन को अद्वितीय बताया गया है।

भव्य रुक्मणी विवाह बना सातवें दिन का मुख्य आकर्षण
सातवें दिन की सबसे विशेष झलक रही—रुक्मणी विवाह की दिव्य झांकी।
बारात का शानदार स्वागत
बारात महामंडलेश्वर के आश्रम से धूमधाम से निकली।
आगे “छव नाच” और पीछे ‘राधे–राधे’ की सुंदर झांकियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मंच तक पहुंचते-पहुंचते भक्त झूमते-नाचते रहे।
बारात संचालन में
डा. गिरधारी अग्रवाल, पवन गर्ग, केशव गर्ग सहित कई गुरुभक्तों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कलाकारों ने भरी जान
कृष्ण की भूमिका: आकांक्षा सिंह (देवघर, कास्टर टाउन)
रुक्मणी की भूमिका: प्राची गर्ग (काठगोधा, छत्तीसगढ़)
दोनों की दिव्य अभिनय प्रस्तुति ने दर्शकों को ऐसा अनुभव कराया, मानो रुक्मणी विवाह का वास्तविक दृश्य उनके सामने घट रहा हो। उनकी भाव-भंगिमाएं, पोशाकें और हाव-भाव ने सभी को मोहित कर लिया।

सांध्यकालीन कार्यक्रम—बाबा सत्यनारायण मौर्य और बड़े दिनेश जी का राष्ट्रवादी संदेश
शाम 7 बजे से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में
प्रखर वक्ता व राष्ट्रवादी चिंतक बाबा सत्यनारायण मौर्य और
विहिप के बड़े दिनेश जी ने अपने शक्तिशाली संबोधन से श्रोताओं में नई ऊर्जा का संचार किया।
दोनों ने संदेश दिया कि—
राष्ट्रीय एकता और अखंडता सनातन संस्कृति की मूल शक्ति है
धर्म, मानवता और साहस के साथ समाज को मजबूत बनाना हर सनातनी का कर्तव्य है
उनके वक्तव्य के दौरान तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।
महिलाओं की विशेष भागीदारी — कार्यक्रम की शोभा बनीं पारंपरिक आभा
आज की सभा में महिलाओं की असाधारण उपस्थिति रही।
माथे पर सुहाग की रेखा
हाथों में पूजा की थाली
पारंपरिक परिधान
भजन-कीर्तन की स्वर लहरियां
इन सभी ने मिलकर यज्ञ परिसर को भक्ति और सौंदर्य की अनूठी रोशनी से भर दिया।
कई स्थानों पर महिलाओं ने समूह में नृत्य और भजन प्रस्तुत किए, जिसने पूरे आयोजन को विशेष ऊर्जा और नई दिशा प्रदान की।
अति रुद्र महायज्ञ—देवघर का आध्यात्मिक केंद्र बना
देवघर इन दिनों पूर्णतः धार्मिक माहौल में डूबा हुआ है।
हर ओर—
मंदिरों की घंटियाँ
गलियों में भजन
मंडपों में पूजन-अभिषेक
श्रद्धालुओं का अविरल सैलाब
श्रद्धालु इसे जीवन का सबसे उत्कृष्ट धार्मिक आयोजन बताते हुए कह रहे हैं कि यह अनुभव देवताओं की उपस्थिति का साक्षात दर्शन है।
आयोजन समिति—सफलता के स्तंभ
नौ दिवसीय महायज्ञ की सफलता में निम्न सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा:
मुख्य सलाहकार: डॉ. गिरधारी अग्रवाल
संयोजक: प्रेम कुमार सिंघानिया
मुख्य यजमान: राजेश सतनालीवाला
अध्यक्ष: विनोद कुमार सुल्तानिया
महामंत्री: रमेश कुमार बाजला
कोषाध्यक्ष: C A गोपाल चौधरी
प्रचार-प्रसार प्रमुख: पंकज कुमार पचेरीवाला
साथ ही
रोहित सुल्तानिया, बजरंग बथवाल, संजय बाजला, हरीश तोलासरिया, अक्षत सिंघानिया, सुनील मोदी, प्रत्यूष सुल्तानिया, कृष्ण सुल्तानिया, अनिल टेकरीवाल, दिलीप सिंघानिया, पवन गर्ग, रितेश पचेरीवाला, सुनील भोपालपुरिया, शुभकरण सुल्तानिया, रेनू सिंघानिया सहित अन्य सदस्यों की भूमिका सराहनीय रही।
डॉ. गिरधारी अग्रवाल ने कहा—
“अति रुद्र महायज्ञ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, यह मानवता, विश्व-शांति और कल्याण का संदेश है।”
कल (बुधवार) का मुख्य कार्यक्रम
यज्ञ मंडप में परिक्रमा और आहुतियाँ
भागवत कथा में रूक्मिणी विवाह के दिव्य प्रसंग
भव्य झांकियों का प्रदर्शन
शाम 7 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम
स्वामी बाबा सत्यनारायण मौर्य का विशेष प्रबोधन
कृष्ण–सुदामा प्रसंग
जरासंध वध का दिव्य दर्शन

अध्यात्म, भक्ति और वैदिक परंपरा का अद्भुत रूप
देवघर में चल रहा अति रुद्र महायज्ञ वर्ष 2025 का सबसे बड़ा धार्मिक संगम साबित हो रहा है।
यह आयोजन सिद्ध करता है कि—
जहां श्रद्धा, वैदिक परंपरा और दिव्य अनुष्ठान साथ आते हैं, वहां धरती स्वयं देवभूमि बन जाती है।
आने वाले दो दिनों में देवघर और भी कई दिव्य अनुभूतियों का केंद्र बनने जा रहा है।









