
📰 दैवी संपद मंडल द्वारा अतिरुद्र महायज्ञ व श्रीमद् भागवत कथा 26 नवंबर से, तैयारी अंतिम चरण में
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देवघर में दैवी संपद मंडल के तत्वावधान में 26 नवंबर से 4 दिसंबर तक अतिरुद्र महायज्ञ व श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन होगा। 25 नवंबर को शोभा यात्रा सह नगर निमंत्रण और 26 को कलश यात्रा निकलेगी। महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन में तैयारियाँ अंतिम चरण में।
देवघर में 26 नवंबर से शुरू होगा अतिरुद्र महायज्ञ और श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ
देवघर।
बाबा बैद्यनाथ की पावन नगरी देवघर में दैवी संपद मंडल के तत्वावधान में आयोजित अतिरुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ की तैयारियाँ अंतिम चरण में पहुँच चुकी हैं। यह वृहद धार्मिक आयोजन 26 नवंबर से 4 दिसंबर तक रामेश्वर लाल सर्राफ स्कूल के पीछे मैदान में संपन्न होगा। आयोजन का उद्देश्य—सद्गुरुदेव ब्रह्मलीन परमहंस स्वामी शारदानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा संकल्पित इस दिव्य महायज्ञ को उनके पावन स्मृति में भव्य रूप देना है।
इस महोत्सव की संपूर्ण तैयारियाँ महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन में की जा रही हैं। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि “गुरुदेव के संकल्प को देवघर में पूर्ण करने का यह अवसर मेरे लिए सौभाग्य और आनंद का विषय है।” उन्होंने सभी धर्मप्रेमियों और मीडिया प्रतिनिधियों से इस विराट आयोजन में शामिल होने की अपील की।
25 नवंबर को निकलेगी विशाल शोभायात्रा सह नगर निमंत्रण
आयोजन की भव्यता और धार्मिक उत्साह का संदेश शहरभर में पहुँचाने के उद्देश्य से 25 नवंबर को एक विशाल शोभा यात्रा सह नगर निमंत्रण निकलेगा। यह यात्रा बैद्यनाथ धाम गौशाला, झौसागढ़ी से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए यज्ञ स्थल पर पहुँचेगी।
इस शोभायात्रा में—
झारखंड
छत्तीसगढ़
उड़ीसा
उत्तर प्रदेश
आदि राज्यों के लोक नृत्य दल, लोक वाद्य कलाकार, और लोक संगीत समूह शामिल होंगे, जो आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
महामंडलेश्वर हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज अपने शिष्यों, परिकर और शाही सवारी के साथ शोभायात्रा में शामिल होकर नगर वासियों को यज्ञ में उपस्थित होने का विशेष निमंत्रण देंगे।
26 नवंबर को सुबह 7:30 बजे निकलेगी कलश यात्रा
यज्ञ की विधिवत शुरुआत 26 नवंबर सुबह 7:30 बजे होगी, जब गोपाल कृष्ण मंदिर, डीएवी स्कूल के पास से दिव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा विभिन्न मार्गों से होकर यज्ञ स्थल पहुँचेगी।
कलश यात्रा के पश्चात—
वरुण देव का आवाहन
विधिवत पंचांग पूजन
अरणी मंथन द्वारा अग्नि प्रज्वलन
मुख्य कुंड सहित 108 सहायक कुंडों में अग्नि स्थापना
की जाएगी। इसी के साथ अतिरुद्र महायज्ञ औपचारिक रूप से प्रारंभ हो जाएगा।
देशभर के संत, महंत और भक्त होने वाले हैं शामिल
आयोजन समिति के अनुसार, इस भव्य महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से—
अनेक महामंडलेश्वर
श्रीमहंत
पूज्य संत
विद्वान व्यास
आध्यात्मिक गुरु
का आगमन सुनिश्चित हो चुका है।
देशभर से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। उनके लिए—
भोजन
आवास
सुरक्षा
परिवहन
चिकित्सा
पार्किंग
सत्संग व्यवस्था
आयोजन समिति द्वारा अलग-अलग विभाग बनाकर की जा रही है। समिति ने बताया कि प्रत्येक टीम अपने दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा से कर रही है।
4 दिसंबर को होगी यज्ञ की पूर्णाहुति
लगातार नौ दिनों तक चलने वाले इस महायज्ञ की पूर्णाहुति 4 दिसंबर को की जाएगी। यज्ञ स्थल पर सुबह से शाम तक धार्मिक अनुष्ठान, कथा-प्रवचन, भजन-कीर्तन और विशिष्ट संतों के दर्शन का सौभाग्य भक्तों को प्राप्त होगा।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि देवघर में अध्यात्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता का भी संदेश फैलाएगा।
प्रेसवार्ता में रखी गई विस्तृत जानकारी
प्रेसवार्ता के दौरान स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज ने मीडिया कर्मियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि—
“इस महायज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में एकता, शांति और आध्यात्मिकता का संदेश देना है।”
इस अवसर पर आयोजन समिति के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित थे, जिनमें—
विनोद सुल्तानिया (अध्यक्ष)
रमेश कुमार बाजला (महामंत्री)
प्रेम कुमार सिंघानिया (संयोजक)
डॉ. गिरधारी अग्रवाल
मुख्य यजमान राजेश सतनालिवाला
पंकज कुमार पचेरीवाला (प्रचार-प्रसार प्रमुख)
सहित समाज के कई प्रतिष्ठित लोग शामिल थे।
समापन
अतिरुद्र महायज्ञ और श्रीमद् भागवत कथा का यह भव्य आयोजन देवघर के आध्यात्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने वाला है। तैयारी की व्यापकता और संत समाज की उपस्थिति इसे और अधिक विशेष बनाती है। भक्तों और श्रद्धालुओं के लिए यह नौ दिनों का दिव्य अवसर है जिसमें वे धर्म, अध्यात्म और भक्ति की अनूठी अनुभूति कर सकेंगे।










