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झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में परिमल नाथवानी का नामांकन वैध घोषित कर दिया गया है। कांग्रेस की आपत्ति खारिज होने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। जानिए पूरा मामला।
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बड़ी खबर: परिमल नाथवानी का नामांकन वैध, कांग्रेस की आपत्ति खारिज
राज्यसभा चुनाव में बढ़ा सियासी रोमांच, अब दिल्ली तक जा सकती है कांग्रेस की लड़ाई
Sunil Jha | Ranchi/Deoghar | 10 June 2026

झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रहा सस्पेंस बुधवार शाम समाप्त हो गया। लंबे समय तक चली कानूनी और तकनीकी बहस के बाद भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी का नामांकन वैध घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के प्रस्तावक की ओर से दर्ज कराई गई आपत्ति को भी रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज कर दिया।
शाम करीब 6 बजे आए इस फैसले के बाद राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। जहां भाजपा और नाथवानी समर्थकों ने राहत की सांस ली है, वहीं कांग्रेस ने फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर भी निशाना साधा है।
क्या था पूरा विवाद?
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान परिमल नाथवानी के नाम को लेकर तकनीकी आपत्ति सामने आई थी। कुछ दस्तावेजों में उनका नाम “परिमल नाथवानी” दर्ज था, जबकि कुछ अभिलेखों में “नाथवानी परिमल” लिखा गया था।
कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के प्रस्तावक ने इसी नामगत अंतर को आधार बनाकर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका तर्क था कि नाम में असमानता के कारण नामांकन पत्र की वैधता पर सवाल खड़े होते हैं और इसकी गहन जांच की जानी चाहिए।
आपत्ति के बाद मामला रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष पहुंचा, जहां दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क रखे। कई घंटों तक चली बहस के बाद निर्वाचन अधिकारियों ने उपलब्ध दस्तावेजों और कानूनी प्रावधानों की समीक्षा की।
अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया कि नाम के प्रस्तुतीकरण में अंतर होने के बावजूद उम्मीदवार की पहचान को लेकर कोई भ्रम या कानूनी बाधा नहीं है। इसी आधार पर नामांकन को वैध माना गया।
कांग्रेस की आपत्ति क्यों हुई खारिज?
सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारियों ने पाया कि नामांकन पत्रों और अन्य अभिलेखों में उल्लिखित व्यक्ति एक ही हैं तथा दस्तावेजों में ऐसा कोई विरोधाभास नहीं है जिससे उम्मीदवार की पहचान संदिग्ध हो।
इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस की आपत्ति को अस्वीकार करते हुए नामांकन को स्वीकार कर लिया। इस फैसले के साथ चुनाव मैदान में परिमल नाथवानी की दावेदारी पूरी तरह बरकरार हो गई है।
कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल
फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि अन्य राज्यों में इसी प्रकार की शिकायतों के आधार पर नामांकन रद्द किए गए हैं, जबकि झारखंड में अलग रवैया अपनाया गया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि दस्तावेजों में विसंगतियां थीं तो उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए था। पार्टी का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए और सभी उम्मीदवारों के लिए समान मानदंड लागू होने चाहिए।
पार्टी नेताओं ने यह भी संकेत दिया है कि वे इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय के समक्ष विरोध दर्ज कराया जा सकता है।
चुनाव आयोग की भूमिका पर भी उठे सवाल
कांग्रेस ने फैसले के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होती है और किसी भी विवाद को पूरी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
हालांकि निर्वाचन अधिकारियों की ओर से नामांकन को वैध घोषित किए जाने के बाद फिलहाल चुनावी प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
राज्यसभा चुनाव में क्यों बढ़ गई है दिलचस्पी?
झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होना है, लेकिन मैदान में तीन उम्मीदवार होने के कारण मुकाबला बेहद रोचक हो गया है।
चुनावी मैदान में महागठबंधन समर्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा के बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी शामिल हैं।
दो सीटों पर तीन उम्मीदवारों की मौजूदगी ने राजनीतिक समीकरणों को जटिल बना दिया है। यही वजह है कि नामांकन प्रक्रिया से लेकर मतदान तक हर चरण पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चाएं
नाथवानी के नामांकन को वैध घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।
अब सभी की निगाहें आगामी चुनावी गतिविधियों, विधायकों की राजनीतिक रणनीति और दलों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। कांग्रेस द्वारा आगे की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ने के संकेतों ने भी इस चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है।
आगे क्या?
नामांकन वैध घोषित होने के बाद अब चुनावी मुकाबला और अधिक रोमांचक होने की संभावना है। राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष को मजबूत करने में जुट गए हैं।
आने वाले दिनों में राज्यसभा चुनाव को लेकर बयानबाजी, रणनीतिक बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों में तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा संदेश यही है कि परिमल नाथवानी चुनावी मैदान में बने हुए हैं और कांग्रेस की आपत्ति को निर्वाचन अधिकारियों ने स्वीकार नहीं किया है।
निष्कर्ष
झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में परिमल नाथवानी के नामांकन को वैध घोषित किए जाने से चुनावी समीकरणों में नया मोड़ आ गया है। कांग्रेस की आपत्ति खारिज होने के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे को किस स्तर तक ले जाती है और आगामी चुनावी प्रक्रिया में इसका क्या असर पड़ता है।
Q1. परिमल नाथवानी का नामांकन क्यों चर्चा में था?
A. उनके नाम के अलग-अलग दस्तावेजों में अलग प्रारूप दर्ज होने के कारण कांग्रेस की ओर से आपत्ति दर्ज की गई थी।
Q2. क्या परिमल नाथवानी का नामांकन रद्द हुआ?
A. नहीं। निर्वाचन अधिकारियों ने नामांकन को वैध घोषित कर दिया है।
Q3. कांग्रेस की आपत्ति क्या थी?
A. कांग्रेस ने नाम संबंधी दस्तावेजों में अंतर को आधार बनाकर नामांकन की वैधता पर सवाल उठाया था।
Q4. झारखंड में राज्यसभा की कितनी सीटों पर चुनाव हो रहा है?
A. झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव हो रहा है।
Q5. चुनाव मैदान में कितने उम्मीदवार हैं?
A. बैद्यनाथ राम, प्रणव झा और परिमल नाथवानी सहित कुल तीन उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं।










