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देवघर | स्थानीय समाचार | सामाजिक कार्यक्रम
विभाजन की त्रासदी को याद कर लिया अखंड भारत का संकल्प, देवघर में आरएसएस का कार्यक्रम
देवघर के खोरादह स्थित मोहन विला में विभाजन विभीषिका स्मरण सह अखंड भारत संकल्प दिवस पर आरएसएस ने कार्यक्रम आयोजित किया। रंगोली से बनाया गया अखंड भारत का आकर्षक नक्शा।
विभाजन विभीषिका स्मरण सह अखंड भारत संकल्प दिवस
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देवघर में विभाजन विभीषिका स्मरण सह अखंड भारत संकल्प दिवस पर रंगोली से बनाया गया अखंड भारत का नक्शा
खोरादह स्थित मोहन विला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान रंगोली से तैयार अखंड भारत का आकर्षक नक्शा।
संवाददाता : देवघर : 14 अगस्त 2026
लगभग 5 मिनट
विभाजन की त्रासदी को याद कर लिया अखंड भारत का संकल्प
विभाजन विभीषिका स्मरण सह अखंड भारत संकल्प दिवस पर आरएसएस का आयोजन, सह प्रांत प्रचारक राजीव कांत ने 1947 की त्रासदी के सामाजिक और मानवीय प्रभावों पर डाला प्रकाश; रंगोली से तैयार अखंड भारत का नक्शा रहा आकर्षण का केंद्र
देवघर। विभाजन विभीषिका स्मरण सह अखंड भारत संकल्प दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से शुक्रवार को देवघर के स्थानीय खोरादह स्थित मोहन विला में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वर्ष 1947 में हुए भारत विभाजन की त्रासदी को स्मरण करते हुए उसके सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय प्रभावों पर चर्चा की गई। साथ ही देश की सांस्कृतिक एकता, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में संघ के सब प्रांत प्रचारक राजीव कांत मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने उपस्थित लोगों को भारत विभाजन से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम और उसके दौरान आम लोगों को झेलनी पड़ी कठिन परिस्थितियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इतिहास के इस अध्याय को केवल एक राजनीतिक घटना के रूप में नहीं, बल्कि उससे जुड़े मानवीय पक्ष और सामाजिक पीड़ा के संदर्भ में भी समझने की आवश्यकता है।
1947 की त्रासदी को कभी नहीं भुलाया जा सकता
मुख्य वक्ता राजीव कांत ने कहा कि 14 अगस्त 1947 भारतीय इतिहास की उन घटनाओं में शामिल है, जिसे देश कभी भुला नहीं सकता। विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-परिवार और परिचित परिवेश छोड़कर विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। हिंसा और असुरक्षा के वातावरण ने लाखों परिवारों को प्रभावित किया।
उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी का प्रभाव केवल तत्कालीन समय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव लंबे समय तक महसूस किए गए। ऐसे में नई पीढ़ी को इतिहास के इस अध्याय से परिचित कराना जरूरी है, ताकि वह उस दौर की परिस्थितियों और आम लोगों की पीड़ा को समझ सके।
राजीव कांत ने कहा कि इतिहास की घटनाओं का स्मरण समाज को अतीत से सीख लेने का अवसर देता है। उन्होंने सामाजिक एकता, आपसी सद्भाव और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।
भारत माता की आरती और दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ सब प्रांत प्रचारक राजीव कांत, जिला संघचालक गणेश बरनवाल एवं नगर कार्यवाह डॉ. आनंदवर्धन ने भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। इसके बाद आरती और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई।
कार्यक्रम में विभाजन विभीषिका के स्मरण के साथ अखंड भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक एकता के भाव को केंद्र में रखते हुए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। वक्ताओं ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता के साथ-साथ उसकी व्यापक सांस्कृतिक परंपराओं और साझा विरासत से भी जुड़ी रही है।
रंगोली से तैयार अखंड भारत का नक्शा रहा आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण संघ की मातृशक्ति द्वारा रंगोली के माध्यम से तैयार किया गया अखंड भारत का आकर्षक नक्शा रहा। रंग-बिरंगी रंगोली से तैयार नक्शे ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसे देखने के लिए लोगों में विशेष उत्सुकता देखी गई।
रंगोली के माध्यम से तैयार किए गए नक्शे के जरिए अखंड भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अवधारणा को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया। उपस्थित लोगों ने मातृशक्ति के इस प्रयास की सराहना की। कार्यक्रम में शामिल स्वयंसेवकों और अन्य लोगों ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी भावनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में उपयोगी हो सकती हैं।
इतिहास के साथ सामाजिक एकता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत का इतिहास केवल वर्तमान राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। भारतीय संस्कृति, परंपरा, विचार और सामाजिक संबंधों की अपनी व्यापक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि रही है। विभाजन की पीड़ा को स्मरण करने के साथ-साथ वर्तमान पीढ़ी को सामाजिक एकता, सद्भाव और परस्पर सहयोग का संदेश देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इतिहास को याद करने का उद्देश्य समाज में वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि अतीत की घटनाओं से सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होना चाहिए। विभाजन के दौरान आम लोगों ने जिन परिस्थितियों का सामना किया, उनसे समाज को एकता और शांति के महत्व को समझने की प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने विभाजन की त्रासदी को स्मरण करते हुए सामाजिक सौहार्द बनाए रखने तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के माध्यम से इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता से जुड़े विषयों को समाज के बीच चर्चा का विषय बनाने का प्रयास किया गया।

बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और मातृशक्ति की रही सहभागिता
कार्यक्रम में पूर्व विधायक नारायण दास, डॉ. गोपाल बरनवाल, राजेश कुमार, विनय बरनवाल, अमित राव, मुकुल कुमार, अमर बरनवाल, पंकज बरनवाल, मदन राव, गौरी शंकर शर्मा, नंदकिशोर राव, राजेश कसेरा, मीना देवी, लक्ष्मी देवी, प्रशांत बरनवाल, रूबी द्वारी झा, संजय बाजपेयी, अमरनाथ सिंह, मोहन बरनवाल, राजेश सिंह और कमलेश रस्तोगी सहित बड़ी संख्या में संघ स्वयंसेवक एवं मातृशक्ति उपस्थित थीं।
कार्यक्रम के अंत में विभाजन विभीषिका के दौरान प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सामाजिक एकता और सद्भाव को मजबूत करने का संदेश दिया गया। साथ ही अखंड भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।










