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नवजात बेटी को डोली में बैठाकर दंड यात्रा
बेटी की मन्नत पूरी होने पर तीन माह की नवजात को डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा निकला
मुजफ्फरपुर के मिथिलेश कुमार बेटी की मन्नत पूरी होने पर तीन माह की नवजात पुत्री राधा रानी को विशेष डोली में बैठाकर सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक दंडवत यात्रा कर रहे हैं
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बेटी की मन्नत पूरी होने पर तीन माह की नवजात को डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा पर निकले श्रद्धालु
मुजफ्फरपुर के मिथिलेश कुमार बोले— सब पुत्र मांगते हैं, मैंने बाबा से पुत्री मांगी थी; उत्तरवाहिनी गंगा सुल्तानगंज से बाबाधाम तक कर रहे दंडवत यात्रा
संवाददाता : देवघर : 07 अगस्त 2026
पवित्र सावन में बाबा बैद्यनाथ के प्रति आस्था के अनेक रंग कांवरिया पथ पर देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार एक पिता की मन्नत और तीन माह की नवजात बेटी से जुड़ी कहानी श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के महैगए थाना क्षेत्र निवासी मिथिलेश कुमार अपनी तीन माह की पुत्री राधा रानी को विशेष डोली में बैठाकर उत्तरवाहिनी गंगा सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक दंडवत यात्रा कर रहे हैं। बेटी की मन्नत पूरी होने पर शुरू की गई उनकी यह कठिन यात्रा आस्था के साथ बेटियों के सम्मान का संदेश भी दे रही है।
सावन के नौवें दिन करीब 105 किलोमीटर लंबे कांवरिया पथ पर बोल बम के जयघोष के बीच हजारों श्रद्धालु बाबाधाम की ओर बढ़ते दिखाई दिए। इसी भीड़ में नवजात बच्ची को लेकर चल रही विशेष डोली और दंडवत करते उसके पिता लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। राह चलते श्रद्धालु इस अनोखी यात्रा को देखकर ठहर रहे हैं और बच्ची को आशीर्वाद दे रहे हैं।
सब पुत्र मांगते हैं, मैंने बाबा से बेटी मांगी थी
मिथिलेश कुमार ने अपनी मन्नत की कहानी बताते हुए कहा कि उनके परिवार में वर्ष 2023 में पुत्र का जन्म हुआ था। इसके बाद उन्होंने बाबा बैद्यनाथ से पुत्री प्राप्ति की कामना की।
मिथिलेश कुमार के अनुसार, सामान्यतः लोग भगवान से पुत्र की कामना करते हैं, लेकिन उनकी इच्छा एक बेटी की थी। उन्होंने बाबा बैद्यनाथ से पुत्री का आशीर्वाद मांगा और मनोकामना पूरी होने पर बाबा के दरबार तक दंडवत यात्रा करने का संकल्प लिया।
बाबा की कृपा से घर में बेटी का जन्म हुआ तो परिवार की खुशी बढ़ गई। पुत्री का नाम राधा रानी रखा गया। अब वह मात्र तीन माह की है और पिता उसे साथ लेकर अपनी मन्नत पूरी करने बाबाधाम की ओर बढ़ रहे हैं।
बेटी को डोली में लेकर बाबा के दरबार तक पहुंचने का संकल्प
मन्नत पूरी होने के बाद मिथिलेश कुमार ने तय किया कि वह नवजात पुत्री को विशेष डोली में बैठाकर सुल्तानगंज से बाबाधाम तक दंडवत यात्रा करेंगे। इसी संकल्प के साथ उन्होंने 30 जुलाई को उत्तरवाहिनी गंगा सुल्तानगंज से गंगाजल उठाया और बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए यात्रा शुरू की।
दंडवत यात्रा सामान्य पैदल कांवर यात्रा से कहीं अधिक कठिन होती है। इसमें श्रद्धालु जमीन पर लेटकर दंडवत करते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं। यही कारण है कि 105 किलोमीटर की दूरी तय करने में काफी समय लगता है। इसके बावजूद मिथिलेश कुमार का उत्साह बना हुआ है।
उनका कहना है कि उन्हें बाबा के दरबार तक पहुंचने की कोई जल्दबाजी नहीं है। “बाबा जब चाहेंगे, तभी उनके दरबार तक पहुंचकर जलार्पण करने का सौभाग्य मिलेगा।” इसी विश्वास के साथ वह लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
10 हजार रुपये में तैयार कराई विशेष डोली
तीन माह की बच्ची को इतनी लंबी यात्रा पर साथ ले जाने के कारण उसकी सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। मिथिलेश कुमार ने इसके लिए करीब 10 हजार रुपये की लागत से विशेष डोली तैयार कराई है।
डोली में पंखे और बिजली की व्यवस्था के साथ सोलर प्लेट भी लगाई गई है। इसका उद्देश्य यात्रा के दौरान बच्ची को यथासंभव आराम देना है। परिवार के सदस्य भी उसके साथ मौजूद रहते हैं और लगातार उसकी देखभाल कर रहे हैं।
मिथिलेश कुमार की पत्नी और पुत्र भी इस यात्रा में साथ चल रहे हैं। इस तरह पूरी यात्रा एक व्यक्ति के संकल्प के साथ-साथ परिवार की सामूहिक आस्था की तस्वीर भी पेश कर रही है।
कांवरिया पथ पर रुककर देख रहे श्रद्धालु
कांवरिया पथ पर जब विशेष डोली में बैठी तीन माह की राधा रानी आगे बढ़ती है और उसके पिता दंडवत करते दिखाई देते हैं तो आसपास से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की नजर स्वतः इस परिवार पर टिक जाती है।
कई श्रद्धालु रुककर इस यात्रा के बारे में जानकारी लेते हैं। वहीं, कुछ लोग बच्ची को आशीर्वाद देते हैं। बोल बम के जयघोष के बीच पिता का संकल्प और बेटी के प्रति उनका स्नेह कांवरिया पथ पर आस्था की अलग तस्वीर पेश कर रहा है।
कठिन सफर, लेकिन बाबा पर अटूट भरोसा
सुल्तानगंज से बाबाधाम तक की करीब 105 किलोमीटर की यात्रा सामान्य कांवरियों के लिए भी कठिन मानी जाती है। वहीं, दंडवत करते हुए इतनी लंबी दूरी तय करना और भी कठिन है। इसके बावजूद मिथिलेश कुमार अपनी गति से आगे बढ़ रहे हैं।
30 जुलाई को यात्रा शुरू करने के बाद कई दिन बीत चुके हैं। हालांकि, उन्हें इस बात की चिंता नहीं कि बाबा मंदिर तक पहुंचने में और कितना समय लगेगा। उनके लिए मंजिल से ज्यादा महत्वपूर्ण वह संकल्प है, जो उन्होंने बेटी की मन्नत पूरी होने पर बाबा बैद्यनाथ से किया था।
बेटी के जन्म को उत्सव मानने का संदेश
इस यात्रा का सबसे खास पहलू बेटी के प्रति पिता का भाव है। मिथिलेश कुमार की बात—“सब पुत्र मांगते हैं, मैंने बाबा से पुत्री मांगी थी”—कांवरिया पथ पर लोगों को सोचने के लिए भी प्रेरित कर रही है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा आस्था के साथ बेटियों के सम्मान का सकारात्मक संदेश देती है। बेटी के जन्म को बाबा का आशीर्वाद मानकर पिता जिस कठिन संकल्प को पूरा करने निकले हैं, उसने इस यात्रा को और खास बना दिया है।
सावन के नौवें दिन कांवरिया पथ पर जहां एक ओर बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे, वहीं दूसरी ओर तीन माह की राधा रानी की डोली श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रही। बाबा बैद्यनाथ के प्रति पिता की अटूट श्रद्धा और बेटी के प्रति प्रेम का यह संगम श्रावणी मेले में आस्था की प्रेरणादायी तस्वीर बनकर सामने आया है।

बेटी की मन्नत पूरी होने पर तीन माह की नवजात राधा रानी को डोली में बैठाकर दंडवत यात्रा करते मिथिलेश कुमार
नवजात बेटी को डोली में लेकर बाबाधाम की दंडवत यात्रा
तीन माह की नवजात पुत्री राधा रानी को विशेष डोली में बैठाकर सुल्तानगंज से बाबा बैद्यनाथ धाम तक दंडवत यात्रा करते मुजफ्फरपुर के श्रद्धालु मिथिलेश कुमार









