रिखिया केस 80/2019 में सभी 19 अभियुक्त बरी, कोर्ट ने कहा—साक्ष्य के अभाव में नहीं बनता मामला

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रिखिया केस संख्या 80/2019 में देवघर न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव और गवाह के बयान के आधार पर सभी 19 अभियुक्तों को बरी कर दिया। यह मामला 2019 लोकसभा चुनाव के बाद ईवीएम ट्रक विवाद से जुड़ा था।

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रिखिया केस 80/2019 में सभी 19 अभियुक्त बरी, कोर्ट ने कहा—साक्ष्य के अभाव में नहीं बनता मामला

2019 लोकसभा चुनाव के बाद ईवीएम ट्रक विवाद से जुड़ा था मामला, गवाह के बयान ने बदली पूरी दिशा

न्यूज़ डेस्क | देवघर | 24 अप्रैल 2026

रिखिया केस 80/2019 में बरी हुए अभियुक्त |

देवघर कोर्ट ने सभी अभियुक्तों को किया बरी

कोर्ट का बड़ा फैसला, सभी अभियुक्तों को मिली राहत

देवघर के बहुचर्चित रिखिया केस संख्या 80/2019 में माननीय न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 19 अभियुक्तों को बरी (निर्दोष) कर दिया। अदालत ने यह निर्णय साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के बयान के आधार पर दिया। लंबे समय से चल रहे इस मामले में अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असफल रहा, जिसके चलते कोर्ट ने सभी आरोपियों को राहत प्रदान की।

यह फैसला न केवल अभियुक्तों के लिए राहत भरा रहा, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इसने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है।

क्या था पूरा मामला: ईवीएम ट्रक को लेकर बना था विवाद

यह मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद का है। चुनाव संपन्न होने के उपरांत देवघर के बैद्यनाथपुर चौक की ओर से जिला प्रशासन द्वारा ईवीएम मशीनों से भरे ट्रक के परिवहन को लेकर संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई थी।

इस संदेह के चलते कुछ स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय प्रशासनिक कार्यवाही और भीड़ के बीच तनाव की स्थिति बन गई थी, जिसके बाद यह मामला दर्ज किया गया।

हालांकि, समय के साथ जैसे-जैसे मामले की सुनवाई आगे बढ़ी, आरोपों की गंभीरता पर सवाल उठने लगे।

गवाह के बयान ने बदला केस का रुख

मामले के गवाह ने अदालत में स्पष्ट रूप से बताया कि:
न तो किसी वाहन की लूट हुई थी
न ही किसी प्रकार की क्षति पहुंचाई गई थी
इस बयान ने पूरे केस की दिशा बदल दी। गवाह के इस स्पष्ट कथन के बाद अभियोजन पक्ष की स्थिति कमजोर पड़ गई और आरोप साबित नहीं हो सके।

बचाव पक्ष की मजबूत दलीलें आईं काम

अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता प्रीतम सिंह और राजेश कुमार शाही ने मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि मामला तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर टिकता ही नहीं है।

अधिवक्ताओं ने गवाह के बयानों और घटनाक्रम की वास्तविकता को विस्तार से रखते हुए यह साबित किया कि आरोप निराधार हैं।

माननीय न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद यह निर्णय सुनाया।

राजनीतिक हस्तियों को भी मिली राहत

इस मामले में कई प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां अभियुक्त के रूप में शामिल थीं। जिन लोगों को बरी किया गया, उनमें प्रमुख नाम शामिल हैं: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता, सुरेश पासवान, मुन्नम संजय, सुरेश शाह, बिनोद वर्मा, भूतनाथ यादव, देवनन्दन झा उर्फ नुनु झा, दीपक सिंह राजपूत, मणिकांत यादव, बेनी चौबे, रंजीत यादव, दिनेशानंद झा, आदित्य सरोलिया, कुणाल सिंह, राहुल सिंह, सुधीर दास, सुनील यादव, दिलीप यादव और राजेश यादव

फैसले के बाद क्या बोले प्रमुख आरोपी

फैसले के बाद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता ने कहा:
“सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। आज न्यायालय ने इसे फिर साबित कर दिया।”

वहीं देवघर विधायक सुरेश पासवान ने कहा:
“पूरे मुकदमे के दौरान कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। गवाह भी अपने बयान पर टिक नहीं पाए। हमें शुरू से ही न्यायालय पर पूरा विश्वास था और आज सत्य की जीत हुई है।”

कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण फैसला

यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्य और गवाह की भूमिका को एक बार फिर रेखांकित करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि ठोस प्रमाण और विश्वसनीय गवाही आवश्यक होती है।

यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल के रूप में देखा जा सकता है, जहां केवल संदेह के आधार पर कार्रवाई की जाती है।

समाज और राजनीति पर प्रभाव

इस फैसले का प्रभाव केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।

अभियुक्तों की राजनीतिक छवि को मजबूती मिलेगी
समर्थकों में उत्साह का माहौल बनेगा
विपक्ष के आरोपों पर सवाल खड़े होंगे

साथ ही, यह मामला यह भी दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया में धैर्य और विश्वास कितना महत्वपूर्ण होता है।

निष्कर्ष

रिखिया केस 80/2019 का यह फैसला न्यायपालिका की निष्पक्षता और साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रणाली का मजबूत उदाहरण है। वर्षों तक चले इस मामले में अंततः अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि बिना ठोस प्रमाण के किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
यह निर्णय न केवल अभियुक्तों के लिए राहत लेकर आया, बल्कि न्याय व्यवस्था पर लोगों के विश्वास को भी मजबूत करता है।

Q1. रिखिया केस 80/2019 क्या था?

A. यह मामला 2019 लोकसभा चुनाव के बाद ईवीएम से भरे ट्रक को लेकर उत्पन्न विवाद से जुड़ा था।

Q2. कोर्ट ने सभी अभियुक्तों को क्यों बरी किया?

A. साक्ष्य के अभाव और गवाह के स्पष्ट बयान के कारण आरोप साबित नहीं हो सके।

Q3. इस मामले में कितने लोग अभियुक्त थे?

A. कुल 19 अभियुक्त इस मामले में शामिल थे।

Q4. क्या इस फैसले का राजनीतिक प्रभाव पड़ेगा?

A. हाँ, इससे संबंधित नेताओं की छवि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

Q5. क्या यह फैसला किसी बड़ी मिसाल के रूप में देखा जा सकता है?

A. हाँ, यह फैसला साक्ष्य और गवाह की अहमियत को दर्शाने वाली महत्वपूर्ण मिसाल है।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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