केंद्र पर शबाना खातून का बड़ा हमला, बोलीं— नारी शक्ति वंदन बिल पर भाजपा की नीयत साफ नहीं

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मधुपुर में कांग्रेस नेत्री शबाना खातून ने नारी शक्ति वंदन बिल पर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। ओबीसी जनगणना के आधार पर महिला आरक्षण लागू करने की मांग।

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केंद्र पर शबाना खातून का बड़ा हमला, बोलीं— नारी शक्ति वंदन बिल पर भाजपा की नीयत साफ नहीं

महिला आरक्षण को जनगणना व परिसीमन से जोड़ने पर उठाए सवाल, ओबीसी व अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग प्रावधान की मांग

संवाददाता | देवघर/मधुपुर | 21 अप्रैल 2026

कांग्रेस नेत्री शबाना खातून

क्या है पूरा मामला? बयान से बढ़ी सियासी हलचल

मधुपुर में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की वरिष्ठ महिला नेत्री एवं प्रदेश सचिव शबाना खातून ने नारी शक्ति वंदन बिल को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर भाजपा की मंशा स्पष्ट नहीं दिखती और सरकार की कथनी व करनी में बड़ा अंतर नजर आता है।

उन्होंने कहा कि “केंद्र सरकार के मुंह से नारी शक्ति वंदन बिल की बात शोभा नहीं देती,” क्योंकि जमीनी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं। उनके इस बयान के बाद क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

महिला सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार घिरी

शबाना खातून ने अपने बयान में उन्नाव, हाथरस, मणिपुर और महिला खिलाड़ियों से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने देश की छवि को वैश्विक स्तर पर प्रभावित किया।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई के बजाय केवल बयानबाजी देखने को मिलती है। “महिला सशक्तिकरण केवल कानून बनाने से नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से लागू करने से संभव है,” उन्होंने जोड़ा।

कांग्रेस का रुख: शुरू से समर्थन, अब भी स्पष्ट

कांग्रेस के रुख को स्पष्ट करते हुए शबाना खातून ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण की समर्थक रही है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में राहुल गांधी ने संसद में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था और जल्द लागू करने की मांग की थी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सोच स्पष्ट है—महिलाओं को राजनीति में समान भागीदारी मिलनी चाहिए और इसके लिए पारदर्शी व समावेशी नीति जरूरी है।
जनगणना और परिसीमन से जोड़ना क्यों बना विवाद?
शबाना खातून ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि महिला आरक्षण बिल को जनगणना और परिसीमन से जोड़ना एक रणनीतिक देरी है।

उनके अनुसार, इस प्रक्रिया से बिल का क्रियान्वयन लंबित हो सकता है और कई राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इससे छोटे राज्यों और कुछ क्षेत्रों को नुकसान होने की आशंका है, जो लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

ओबीसी और अल्पसंख्यक महिलाओं का मुद्दा केंद्र में

उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा प्रस्ताव में ओबीसी और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

शबाना खातून ने मांग की कि महिला आरक्षण को लागू करने से पहले ओबीसी जनगणना कराई जाए और उसी आधार पर सीटों का निर्धारण किया जाए। उन्होंने कहा कि “अगर सभी वर्गों को समान प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तो यह अधूरा न्याय होगा।”

2011 बनाम नई जनगणना: क्या है बहस?

उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेना वर्तमान सामाजिक वास्तविकताओं के साथ न्याय नहीं करता।

उनका मानना है कि नई जनगणना कराना आवश्यक है, जिससे सभी वर्गों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके और उसी के अनुरूप महिला आरक्षण की नीति बनाई जा सके।

कांग्रेस का ऐतिहासिक दावा: पंचायतों में 33% आरक्षण

शबाना खातून ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कांग्रेस ने पहले भी ठोस कदम उठाए हैं।

उन्होंने 73वें और 74वें संविधान संशोधन (1992-93) का जिक्र करते हुए बताया कि पंचायत स्तर पर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण कांग्रेस सरकार की देन है। यह फैसला तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल में लिया गया था, जिसने देशभर में लाखों महिलाओं को नेतृत्व का अवसर दिया।

भाजपा पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप

शबाना खातून ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण बिल को राजनीतिक मुद्दा बनाकर लाभ उठाना चाहती है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को महिला विरोधी बताना पूरी तरह गलत और भ्रामक है, जबकि हकीकत यह है कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के अधिकारों को प्राथमिकता दी है।

आगे क्या? बढ़ सकती है सियासी बहस

विशेषज्ञों का मानना है कि महिला आरक्षण बिल आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

शबाना खातून के इस बयान के बाद यह स्पष्ट है कि इस विषय पर राजनीतिक दलों के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है।

निष्कर्ष

नारी शक्ति वंदन बिल को लेकर देशभर में बहस जारी है। शबाना खातून के बयान ने इस चर्चा को और धार दी है। जहां कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय और समान प्रतिनिधित्व का सवाल मान रही है, वहीं केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है।

प्रश्न 1: नारी शक्ति वंदन बिल क्या है?

उत्तर: यह महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक है, जिसका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।

प्रश्न 2: शबाना खातून ने क्या आरोप लगाए?

उत्तर: उन्होंने भाजपा पर महिला आरक्षण को लेकर अस्पष्ट नीति, देरी और ओबीसी व अल्पसंख्यक महिलाओं की अनदेखी का आरोप लगाया।

प्रश्न 3: कांग्रेस का इस मुद्दे पर क्या रुख है?

उत्तर: कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन करती है और ओबीसी जनगणना के आधार पर इसे लागू करने की मांग कर रही है।

प्रश्न 4: पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण कब मिला?

उत्तर: 73वें और 74वें संविधान संशोधन (1992-93) के माध्यम से पंचायतों में 33% आरक्षण लागू किया गया।

प्रश्न 5: विवाद का मुख्य कारण क्या है?

उत्तर: महिला आरक्षण बिल को जनगणना और परिसीमन से जोड़ना, तथा ओबीसी/अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए स्पष्ट प्रावधान न होना।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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