बाबा मंदिर में पंडा समाज का बड़ा धरना, पिल पाया द्वार से अनधिकृत प्रवेश पर प्रशासन से टकराव

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

https://baba-mandir-dharna-panda-samaj-vs-administration-deoghar

देवघर बाबा मंदिर परिसर में पंडा समाज का बड़ा धरना, पिल पाया द्वार से अनधिकृत प्रवेश को लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप। जानिए पूरा मामला।

बाबा मंदिर धरना, देवघर मंदिर विवाद, पंडा धर्मरक्षणि सभा, पिल पाया द्वार, देवघर खबर, मंदिर प्रशासन विवाद

बाबा मंदिर में पंडा समाज का बड़ा धरना, पिल पाया द्वार से अनधिकृत प्रवेश पर प्रशासन से टकराव

मंदिर परिसर में घंटों चला विरोध, वीआईपी व्यवस्था के दुरुपयोग पर उठे गंभीर सवाल

देवघर | संवाददाता | गुरुवार

बाबा मंदिर परिसर में धरना देते पंडा समाज के सदस्य

देवघर के प्रसिद्ध बाबा मंदिर परिसर में गुरुवार को उस समय माहौल गरमा गया जब पंडा धर्मरक्षणि सभा के बैनर तले सैकड़ों तीर्थपुरोहितों ने मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन के खिलाफ जोरदार धरना प्रदर्शन किया। यह धरना सीधे मंदिर परिसर के अंदर आयोजित किया गया, जिससे पूरे दिन श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना रहा।

धरना का नेतृत्व पंडा धर्मरक्षणि सभा के महामंत्री निर्मल झा मंटू ने किया। प्रदर्शन के दौरान पुरोहित समाज के लोगों ने प्रशासन पर मनमानी, नियमों की अनदेखी और वीआईपी व्यवस्था के नाम पर अनधिकृत प्रवेश कराने का गंभीर आरोप लगाया।

पिल पाया द्वार बना विवाद की जड़

धरना का मुख्य मुद्दा मंदिर के पिल पाया द्वार से हो रहे कथित अनधिकृत प्रवेश को लेकर था। यह द्वार विशेष रूप से वीआईपी श्रद्धालुओं के लिए निर्धारित है, लेकिन पंडा समाज का आरोप है कि इसका दुरुपयोग किया जा रहा है।

महामंत्री निर्मल झा मंटू ने कहा कि पंडा समाज को वास्तविक वीआईपी श्रद्धालुओं के प्रवेश से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ड्यूटी पर तैनात कर्मी अपने परिचितों और परिजनों को वीआईपी बताकर इसी द्वार से प्रवेश करा रहे हैं। इससे मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था और आम श्रद्धालुओं के अधिकार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कर्मी होटल से अपने परिचितों को लाकर सीधे पिल पाया द्वार से मंदिर में प्रवेश दिलाते हैं, जो पूरी तरह गलत और नियमों के विरुद्ध है।

“मनमानी पर उतरा प्रशासन, विरोध पर मिलती है धमकी”

धरना को संबोधित करते हुए निर्मल मंटू झा ने कहा कि मंदिर प्रशासन पूरी तरह मनमानी पर उतर आया है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस तरह के गलत कार्यों का विरोध करती है, तो उसे झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती है।

उन्होंने कहा कि मंदिर में तैनात कई कर्मियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। “यह स्थिति नमक का दरोगा जैसी मानसिकता को दर्शाती है, जहां लोग अपने पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ उठाने में लगे हैं,” उन्होंने कहा।

मंदिर परिसर में दिखा आक्रोश, नारेबाजी से गूंजा वातावरण

धरना के दौरान सैकड़ों की संख्या में तीर्थपुरोहित मंदिर परिसर में जुटे और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। कुछ समय के लिए मंदिर परिसर में तनावपूर्ण स्थिति भी बनी रही, हालांकि प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखा और श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन की व्यवस्था सामान्य रूप से जारी रही।
पंडा समाज के लोगों ने कहा कि मंदिर की गरिमा और परंपराओं के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शिष्टमंडल देगा उपायुक्त को ज्ञापन

पंडा धर्मरक्षणि सभा की ओर से जानकारी दी गई कि शुक्रवार को एक शिष्टमंडल उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा से मुलाकात करेगा और इस पूरे मामले में ज्ञापन सौंपेगा।

सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि प्रशासन द्वारा इस मामले में कोई ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

“अब आंदोलन होगा और तेज”

धरना के दौरान पंडा समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि पिल पाया द्वार से हो रहे कथित अनधिकृत प्रवेश पर रोक नहीं लगाई गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सभा के उपाध्यक्ष चंद्रशेखर खवाड़े, पूर्व महामंत्री दुर्लभ चरण मिश्रा सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी धरना में शामिल हुए। सभी ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई और कार्रवाई की मांग की।

प्रशासन और पंडा समाज आमने-सामने

इस पूरे घटनाक्रम के बाद मंदिर प्रशासन और पंडा समाज के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।

मंदिर जैसे संवेदनशील और आस्था से जुड़े स्थल पर इस तरह का विवाद प्रशासन के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या पंडा समाज की मांगों पर कोई समाधान निकल पाता है।

निष्कर्ष:

बाबा मंदिर परिसर में हुआ यह धरना न केवल प्रशासन और पंडा समाज के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाता है, बल्कि मंदिर व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को भी उजागर करता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासन की कार्रवाई और पंडा समाज की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी

प्रश्न 1: बाबा मंदिर में धरना क्यों दिया गया?

उत्तर: पंडा समाज ने पिल पाया द्वार से कथित अनधिकृत प्रवेश और प्रशासन की मनमानी के विरोध में धरना दिया।

प्रश्न 2: पिल पाया द्वार क्या है?

उत्तर: यह मंदिर का एक विशेष प्रवेश द्वार है, जिसका उपयोग आमतौर पर वीआईपी श्रद्धालुओं के लिए किया जाता है।

प्रश्न 3: पंडा समाज की मुख्य मांग क्या है?

उत्तर: वीआईपी व्यवस्था के दुरुपयोग पर रोक और नियमों के अनुसार पारदर्शी प्रवेश व्यवस्था लागू करना।

प्रश्न 4: आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?

उत्तर: शिष्टमंडल उपायुक्त को ज्ञापन सौंपेगा और कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय जाने की चेतावनी दी गई है।

Baba Wani
Author: Baba Wani

Post view : 29

Leave a Comment

और पढ़ें