जिला स्तरीय मुखिया सम्मेलन में मधुपुर प्रखंड के साप्तर पंचायत के मुखिया मजदूर ललन मिश्रा को शिक्षा व ड्रॉपआउट रोकथाम में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

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मजदूर ललन मिश्रा को उत्कृष्ट मुखिया सम्मान | देवघर समाचार

 

 

 

 

 

जिला स्तरीय मुखिया सम्मेलन में मधुपुर प्रखंड के साप्तर पंचायत के मुखिया मजदूर ललन मिश्रा को शिक्षा व ड्रॉपआउट रोकथाम में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

 

 

 

 

 

मजदूर ललन मिश्रा

 

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देवघर। जिला प्रशासन द्वारा शनिवार को आयोजित जिला स्तरीय मुखिया सम्मेलन में मधुपुर प्रखंड अंतर्गत साप्तर पंचायत के मुखिया मजदूर ललन मिश्रा को शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जिला का उत्कृष्ट मुखिया सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) द्वारा उन्हें भव्य समारोह में सौंपा गया। सम्मान पाकर न केवल मुखिया मिश्रा गौरवान्वित हुए, बल्कि साप्तर पंचायत के लोगों, समर्थकों और शुभचिंतकों में भी उत्साह और खुशी की लहर दौड़ गई।

 

इस अवसर पर जिला शिक्षा विभाग, विभिन्न प्रखंडों से आए प्रतिनिधियों, शिक्षकों, विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और पंचायत जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में पंचायत स्तर पर शिक्षा सुधार की दिशा में किए गए कार्यों की समीक्षा की गई। इसी क्रम में साप्तर पंचायत के मुखिया मजदूर ललन मिश्रा के प्रयासों को सबसे प्रभावी और प्रेरणादायक मानते हुए उन्हें उत्कृष्ट मुखिया के रूप में चयनित किया गया।

 

शिक्षा सुधार को पंचायत की पहली प्राथमिकता बनाया

 

मुखिया ललन मिश्रा ने अपने कार्यकाल में साप्तर पंचायत के सभी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, बच्चों की उपस्थिति को नियमित करने और ड्रॉप-आउट दर को कम करने के लिए विशेष अभियान चलाया। पंचायत स्तर पर विद्यालय प्रशासन और शिक्षकों के साथ लगातार बैठकें कर उन्होंने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया।

 

उन्होंने शिक्षकों के सहयोग से उन घरों में जाकर अभिभावकों को जागरूक किया जहां बच्चे नियमित रूप से विद्यालय नहीं जाते थे। इस पहल का परिणाम यह हुआ कि पिछले वर्षों की तुलना में पंचायत के विद्यालयों में उपस्थिति दर में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है।

 

ड्रॉप आउट रोकने के लिए सफल अभियान

 

साप्तर पंचायत में पहले बच्चों के बीच स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति गंभीर समस्या थी। लेकिन मुखिया मिश्रा ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए पंचायत स्तर पर टीम बनाकर घर-घर सर्वे कराया। जिन बच्चों ने किसी कारणवश विद्यालय छोड़ दिया था, उन्हें पुनः नामांकित कराने की पहल की गई।

 

इसके साथ ही पंचायत में “स्कूल चलें हम” विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें शिक्षकों, वार्ड सदस्यों, आशा कार्यकर्ताओं और सक्रिय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। इन प्रयासों का सीधा असर यह हुआ कि ड्रॉप-आउट दर लगभग नगण्य स्तर पर आ गई।

 

बाल संसद की नवाचारी पहल

 

मुखिया मिश्रा द्वारा शुरू किए गए सबसे प्रभावी और चर्चित कार्यक्रमों में बाल संसद की भूमिका विशेष रही। पंचायत के सभी स्कूलों में बाल संसद का गठन करके बच्चों को नेतृत्व, जिम्मेदारी और सामाजिक जागरूकता का अवसर दिया गया। बाल संसद के सदस्य घर-घर जाकर अभिभावकों से आग्रह करते हैं कि वे अपने बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय भेजें।

 

इस अनोखी पहल ने न सिर्फ बच्चों के व्यक्तित्व विकास में मदद की, बल्कि शिक्षा के प्रति ग्रामीण समाज में जागरूकता भी बढ़ाई। इस मॉडल को जिला प्रशासन ने भी सराहा और अन्य पंचायतों को भी इससे प्रेरणा लेने की सलाह दी।

 

सम्मान मिलने पर खुशी की लहर

 

सम्मान प्रदान किए जाने के बाद साप्तर पंचायत में खुशी का माहौल देखा गया। पंचायत के ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवा साथियों ने मुखिया मजदूर ललन मिश्रा को बधाई दी। ग्रामीणों का कहना है कि उनके नेतृत्व में पंचायत में शिक्षा का माहौल पूरी तरह बदल गया है और स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

 

खुद मुखिया मिश्रा ने कहा कि यह सम्मान पंचायत के सभी शिक्षकों, बच्चों, अभिभावकों और ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वे आगे भी शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पंचायत विकास के प्रति समर्पित रहेंगे।

 

जिला प्रशासन ने की पहल की सराहना

 

सम्मेलन में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि साप्तर पंचायत में जिस मॉडल पर कार्य किया गया है, वह पूरे जिले के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। पंचायत स्तर पर यदि जनप्रतिनिधि शिक्षा को प्राथमिकता दें तो सरकारी स्कूलों में भी बेहतर परिणाम आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं।

 

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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