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देवघर के व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने डीईओ को सौंपा ज्ञापन | छह माह का वेतन बकाया और वेतन वृद्धि लागू करने की मांग
देवघर के व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने छह माह से बकाया वेतन और 2021 के बाद से अनुमोदित वेतन वृद्धि लागू न होने को लेकर डीईओ विनोद कुमार को ज्ञापन सौंपा। प्रशिक्षकों ने आर्थिक संकट का हवाला देते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की।
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देवघर। जिले के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों की समस्याएँ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। शनिवार को प्रशिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) विनोद कुमार से मुलाकात की और वेतन भुगतान में हो रही देरी तथा केंद्र द्वारा अनुमोदित वेतन वृद्धि को लागू न किए जाने को लेकर विस्तार से अपनी समस्याएँ उनके समक्ष रखीं। प्रशिक्षकों ने डीईओ को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि आर्थिक संकट के चलते उनकी स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।
छह माह से वेतन बकाया, परिवारों पर संकट
ज्ञापन में प्रशिक्षकों ने स्पष्ट किया कि पिछले 3 से 6 महीने से उन्हें नियमित वेतन प्राप्त नहीं हुआ है। इस कारण उनके परिवारों के सामने दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना कठिन हो गया है।
प्रशिक्षकों के अनुसार—
कई महीनों से वेतन न मिलने से आर्थिक संकट गहरा गया है।
घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई तथा अन्य जरूरी भुगतान प्रभावित हो रहे हैं।
वे शिक्षा विभाग की एक महत्वपूर्ण इकाई होने के बाद भी उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
प्रशिक्षकों ने कहा कि वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ विद्यालयों में वोकशनल एजुकेशन से जुड़ा प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन न मिलने से उनका मनोबल टूट रहा है।
2021 के बाद स्वीकृत वेतन वृद्धि अभी तक लागू नहीं
ज्ञापन में प्रशिक्षकों ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2021 के बाद से व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए वेतन वृद्धि को अनुमोदित कर दिया गया है।
लेकिन जिलों में नियुक्त प्रशिक्षकों को इसका लाभ अब तक नहीं दिया गया है।
प्रशिक्षकों के अनुसार—
केंद्र से वेतन वृद्धि को मंजूरी मिल चुकी है।
राज्य स्तर या जिला स्तर पर इसे लागू करने में लापरवाही बरती जा रही है।
समय पर वेतन वृद्धि मिलने से उनका वित्तीय बोझ काफी कम हो सकता था।
उन्होंने कहा कि कई प्रशिक्षक निजी ऋण लेकर अपना जीवन यापन चला रहे हैं और ऐसे हालात में वेतन वृद्धि लागू न होना उनके लिए अतिरिक्त मानसिक तनाव का कारण है।
व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने डीईओ से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग
डीईओ विनोद कुमार से मुलाकात के दौरान प्रशिक्षकों ने आग्रह किया कि—
बकाया वेतन के भुगतान के लिए तत्काल विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए।
लंबित वेतन वृद्धि को तुरंत लागू करवाया जाए।
जिला स्तर पर इस समस्या को उच्च अधिकारियों तक प्राथमिकता के साथ पहुँचाया जाए।
प्रशिक्षकों ने कहा कि वे अपने क्षेत्र के छात्रों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण तथा तकनीकी ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। ऐसे में उनका समय पर वेतन प्राप्त करना न सिर्फ उनका अधिकार है बल्कि शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी है।
डीईओ ने समस्याओं को गंभीरता से सुना, कार्रवाई का भरोसा दिया
जिला शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार ने प्रशिक्षकों की बात ध्यानपूर्वक सुनी और उन्हें आश्वासन दिया कि—
इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा।
बकाया वेतन का भुगतान शीघ्र कराने के लिए विभागीय प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी।
केंद्र से अनुमोदित वेतन वृद्धि को जल्द लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षकों की समस्याएँ वास्तविक हैं और विभाग उनकी मांगों को गंभीरता से देख रहा है।
डीईओ के सकारात्मक रुख से प्रशिक्षकों में उम्मीद जगी है कि लंबित वेतन और वेतन वृद्धि से जुड़ी उनकी समस्याओं का जल्द समाधान संभव हो सकेगा।
प्रशिक्षकों में उम्मीद — जल्द मिलेगी राहत
डीईओ से मुलाकात के बाद प्रशिक्षकों ने आशा जताई कि—
शिक्षा विभाग अब सक्रिय रूप से उनकी समस्याओं पर ध्यान देगा।
लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे प्रशिक्षकों को जल्द राहत मिलेगी।
भविष्य में समय पर वेतन भुगतान की प्रक्रिया को सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि विभाग भी उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करेगा।
व्यावसायिक शिक्षा की भूमिका पर भी दिया जोर
शिष्टमंडल ने यह भी कहा कि आज के समय में वोकशनल एजुकेशन छात्रों के भविष्य निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
छात्रों को रोजगारपरक कौशल मिल रहे हैं
डिजिटल, तकनीकी और व्यवसायिक ज्ञान बढ़ रहा है
ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को नए अवसर मिल रहे हैं
प्रशिक्षकों ने कहा कि वे राज्य सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं को सफल बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं। ऐसे में उनका समय पर वेतन मिलना अत्यंत आवश्यक है।
अंत में, प्रशिक्षकों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा दी गई आश्वासनात्मक प्रतिक्रिया पर संतोष जताया और उम्मीद लगाई कि विभाग जल्द से जल्द उनके वेतन से संबंधित सभी मुद्दों का समाधान करेगा।









