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देवघर अति रुद्र महायज्ञ: पंचम दिवस पर कृष्ण जन्म कथा व भक्ति का सैलाब
देवघर में आयोजित नौ दिवसीय अति रुद्र महायज्ञ के पंचम दिवस पर कृष्ण जन्म कथा, 108 कुंडों का हवन, संतों का सान्निध्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भक्तों को भाव-विभोर किया।
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📰 नौ दिवसीय अति रुद्र महायज्ञ से दिव्यता, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार
पंचम दिवस पर उमड़ा आस्था का सैलाब, ‘कृष्ण जन्म’ कथा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा वातावरण
देवघर। देवी संपत मंडल के तत्वावधान में बाबा बैद्यनाथ धाम में आयोजित नौ दिवसीय अति रुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा रविवार को अपने पंचम दिवस पर दिव्यता, आस्था और अध्यात्मिक ऊर्जा के चरम पर दिखाई दिया। अलहे सुबह से ही शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और 108 कुंडों के हवन की सुगंध ने पूरे देवघर नगर को अध्यात्ममय कर दिया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने यज्ञ मंडप से लेकर शहर की गलियों तक भक्ति का ऐसा वातावरण बनाया जिसे लोग साक्षात दिव्य अनुभूति बता रहे हैं। ‘हर हर महादेव, राधे-राधे, जय श्रीकृष्ण’ के उद्घोष पूरे शहर में गूंजते रहे।
वैदिक अनुष्ठानों के साथ पंचम दिवस की शुरुआत
सुबह पारंपरिक वैदिक विधि-विधान के साथ हवन-अनुष्ठान प्रारंभ हुआ। 108 हवन-कुंडों के समक्ष बैठे वैदिक ब्राह्मणों ने ऋचाओं और आहुतियों के माध्यम से वातावरण को अलौकिक बना दिया।
कार्यक्रम में देशभर से आए संतों और महामंडलेश्वरों ने उपस्थिति दर्ज कराई। प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—
महामंडलेश्वर श्री श्री 108 विशेश्वरानंद भारती जी महाराज
महंत स्वामी राम भूषण दास जी महाराज
महामंडलेश्वर स्वामी आनंद चैतन्य जी महाराज
महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद जी महाराज
स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज
स्वामी विवेकानंद जी महाराज
संतों ने अपने आशीर्वचनों में धर्म, सत्य, सेवा, समर्पण और मानवता के संदेश पर प्रकाश डाला। मंच संचालन स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती एवं आचार्य शुभेष शर्मा ने किया।

भागवत कथा में ‘कृष्ण जन्म’ प्रसंग बना आकर्षण
दिल्ली से पधारे प्रसिद्ध भागवत कथावाचक पंडित रामाकांत मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण जन्म की दिव्य कथा सुनाई।
कथा के दौरान—
कंस का अत्याचार
देवकी-वसुदेव की पीड़ा
वसुदेव द्वारा शिशु कृष्ण को सुरक्षित ले जाने का प्रसंग
दिव्य अवतार-लीला
का वर्णन सुनकर पूरा पंडाल भाव-विभोर हो उठा।
श्रीकृष्ण जन्म की भव्य झांकी दर्शन का केंद्र बनी रही।
पंडित मिश्र ने कहा कि
“कृष्ण केवल देवता नहीं, बल्कि प्रेम, सत्य और धर्म के रक्षक हैं।”
सांध्यकालीन प्रस्तुतियों ने बांधा माहौल
रात्रि 7 बजे आयोजित सांस्कृतिक संध्या में बिलासपुर की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना बसंती वैष्णव व ज्योती ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुख्य आकर्षण रहे—
कृष्ण रास
वसुदेव-कंसा संवाद
पारंपरिक कथक
भक्तिमय नृत्याभिनय
तालियों की गूंज ने पूरे परिसर को जीवंत कर दिया।

महिलाओं की विशाल उपस्थिति बनी विशेष आकर्षण
पारंपरिक परिधानों, पूजा की थालियों और भजन-कीर्तन में लीन महिलाओं की बड़ी संख्या आज के आयोजन की मुख्य विशेषता रही। कई महिलाओं ने समूह में भजन व सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दीं, जिससे पूरे परिसर में उत्साह और भक्ति का वातावरण और प्रखर हो उठा।
अति रुद्र महायज्ञ बना देवघर का आध्यात्मिक केंद्र
देवघर इन दिनों धार्मिक ऊर्जा से आलोकित है।
मंदिरों में घंटों की ध्वनि
गलियों में भजन-कीर्तन
हर ओर श्रद्धालुओं का सैलाब
पूजन-अभिषेक की निरंतरता
ने इसे आध्यात्मिक राजधानी जैसा रूप दे दिया है।
आयोजन की सफलता में सक्रिय रही टीम
महायज्ञ को सफल बनाने में समिति के प्रमुख सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई—
मुख्य सलाहकार: डॉ. गिरधारी अग्रवाल
संयोजक: प्रेम कुमार सिंघानिया
मुख्य यजमान: राजेश सतनालीवाला
अध्यक्ष: विनोद कुमार सुल्तानिया
महामंत्री: रमेश कुमार बाजला
कोषाध्यक्ष: CA गोपाल चौधरी
प्रचार-प्रसार प्रमुख: पंकज पचेरीवाला
रोहित सुल्तानिया, संजीव चोपड़ा, गज्जू भैया गजानंद, संजय कुमार बंका, बजरंग बथवाल, संजय बाजला, हरीश तोलासरिया, अक्षत सिंघानिया, प्रत्यूष सुल्तानिया, कृष्ण सुल्तानिया, अनिल टेकरीवाल, दिलीप सिंघानिया, आनंद मोदी, महेश डालमिया, सुनील अग्रवाल, सुनील भोपालपुरिया, संतोष भुवानियां, प्रमोद बाजला, अमित केसरी, शुभकरण सुल्तानिया, रेनू सिंघानिया, सागरिका सहित अन्य महिला–पुरुषों का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा।
डॉ. गिरधारी अग्रवाल ने कहा—
“अति रुद्र महायज्ञ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व-शांति, मानवता और कल्याण का संदेश है।”
संत–महात्माओं की दिव्य उपस्थिति से पवित्र हुआ वातावरण
आज के कार्यक्रम में अनेक महान संतों का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ
आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 108 विशेश्वरानंद भारती जी महाराज
महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद जी महाराज
महामंडलेश्वर स्वामी आनंद चैतन्य जी महाराज
महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद जी महाराज
स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज
स्वामी विवेकानंद जी महाराज
मंच संचालन स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती एवं आचार्य शुभेष शर्मन ने किया।
‘कृष्ण जन्मोत्सव’ पर स्वामी जी का दिव्य उपदेश
आदर्श, कृष्ण की माधुर्य लीला और सनातन संस्कृति का तेज
आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 108 विशेश्वरानंद भारती जी महाराज ने आज के कृष्ण जन्मोत्सव पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि
“कृष्ण जन्म केवल उत्सव नहीं— यह करुणा, सत्य, नीति और आदर्श जीवन का उज्ज्वल दीपस्तंभ है।
भगवान श्रीराम ने वनवास में जो धैर्य धारण किया— वही धैर्य मनुष्य के जीवन में चमत्कार कर देता है।”
उन्होंने कहा कि कृष्ण की आलौकिक लीलाएँ मानव जीवन को प्रेम, मधुरता, नीति और कर्तव्यबोध का संदेश देती हैं।
कृष्ण और राम— दोनों मिलकर भारतीय आस्था और संस्कृति की आधारशिला हैं।
कथा पंडाल में धूमधाम से मनाया गया ‘कृष्ण जन्मोत्सव’
मध्यांतर के बाद कथा का सर्वाधिक प्रतीक्षित क्षण—
कृष्ण जन्मोत्सव— अनुपम हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
नंदोत्सव और कृष्ण जन्म की रसमयी लीलाओं का मधुर वर्ण
पंडित रमाकांत जी मिश्रा (राम जी भाई)
ने अपनी सुरभित, भक्तिमय वाणी में किया।
कथा–पंडाल में
“नंद घर आनंद भयो…”
की गूंज से वातावरण झूम उठा।
संध्या प्रवचन—स्वामी विशोकानंद जी महाराज का दिव्य आशीर्वचन
संध्या सत्र में महानिर्वाण पीठाधीश्वर स्वामी विशोकानंद जी महाराज ने सनातन संस्कृति, राष्ट्र–धर्म और समाज–निर्माण के महत्व पर दिव्य प्रवचन दिया।
उन्होंने कहा कि यह महायज्ञ परमहंस स्वामी शारदानंद जी महाराज के शुभ संकल्प की पूर्ति हेतु निरंतर जारी है, जिससे संपूर्ण समाज को आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त हो।
आयोजन की सफलता में सेवाभाव का अद्भुत संगम
देवघर की पावन धरा आज भक्ति, शक्ति और संस्कृति की त्रिवेणी बनकर प्रकट हुई।
कृष्ण जन्मोत्सव की अलौकिक छटा और रामायण की मर्यादा ने इस महायज्ञ को और अधिक तेजस्वी व यादगार बना दिया।
बैद्यनाथधाम आज सचमुच कह उठा“ जहाँ भगवान हों… वहाँ भव्यता अपने आप प्रकट होती है।”
अति रुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ आरएल सर्राफ स्कूल मैदान चल रहे दिव्य आयोजन में एक तरफ जहां भगवान शिव को आहुतियां अर्पित की जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ भगवत कथा के माध्यम से भगवान की रसमयी कथा में अमृत वर्षा । इसके साथ ही राष्ट्र भावना को सशक्त करता हुआ सांस्कृतिक आयोजन। इस तरह देवों के घर देवघर में त्रिवेणी संगम का अद्भुत दृश्य और आनंद से जनमानस आल्हादित है। ये मनोरम सुअवसर सहज ही कुंभ की याद करा रहा है।

महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा
की पूज्य गुरुदेव परमहंस स्वामी शारदानंद सरस्वती जी महाराज की पावन स्मृति में किया जाने वाला यह दिव्य आयोजन राष्ट्रीय एकता और अखंडता प्रतीक बन गया है। अतिरुद्र महायज्ञ के मंत्रोच्चार और उसके धूम से पूरा वातावरण भक्ति मय हो गया है। गुरुदेव की कृपा और बाबा बैद्यनाथ के सान्निध्य में हो रहा यह दिव्य आयोजन निश्चित ही सर्वभूत हितरतः की प्रेरणा प्रदान करता है और राष्ट्र प्रेम की भावना भी।
संध्याकालीन सत्र में प्रमुख रूप से महानिर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी विशोकानंद जी महाराज का दिव्य प्रवचन, आशीर्वचन हुआ। समस्त कार्यक्रमों के रूप में पूर्व संकल्प परमहंस श्री स्वामी शारदानंद जी महाराज के शुभ संकल्प की पूर्ति हेतु महायज्ञ में भगवान रुद्र के प्रसन्नार्थ यज्ञ का आयोजन किया गया । शुभ संकल्प की पूर्ति में परम श्रद्धेय महामंडलेश्वर श्री स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में पूज्य महाराज के सभी शिष्य इस महत्वपूर्ण अनुष्ठान में अपने-अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं । सबका एक ही भाव है, एक ही संकल्प है कि हमारा राष्ट्र, हमारा राज्य, हमारा ग्रामीण, हमारी नगरी, सभी, प्रत्येक नागरिक सुखी रहे, प्रसन्न रहें और राष्ट्र समृद्धि को प्राप्त करें, यही मंगल कामना वैदिक अनुष्ठान की है।
अनवरत सेवा जारी
कार्यक्रम में विशेष रूप से गोपाल कृष्ण अग्रवाल जी, राज चोपड़ा जी, प्रवीण गर्ग जी, पवन गर्ग जी, केशव गर्ग, गिरधारी अग्रवाल जी, शुभेश शर्मण जी अनवरत अपनी सेवा दे रहे है।
निष्कर्ष — आस्था, अध्यात्म और वैदिक परंपरा का विराट संगम
देवघर में चल रहा अति रुद्र महायज्ञ भक्ति, अध्यात्म, संस्कृति और वैदिक परंपरा का ऐसा अद्भुत संगम बन चुका है जिसे श्रद्धालु वर्षों तक याद रखेंगे। आने वाले दिनों में भी देवघर कई दिव्य अनुभूतियों का साक्षी बनने वाला है।








