
✅ देवघर में अति रुद्र महायज्ञ: दिव्यता, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर तीसरा दिन | केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह सहित साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति
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✅ देवघर में अति रुद्र महायज्ञ के तीसरे दिन दिव्यता, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखा गया। श्री श्री 108 आचार्य महामंडलेश्वर विशेश्वरानंद भारती जी महाराज सहित अनेक संतों का आशीर्वचन, 108 हवन-कुंडों में आहुतियाँ और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की विशेष उपस्थिति ने वातावरण को पूर्णतः पावन बना दिया।
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देवघर में अति रुद्र महायज्ञ दिव्यता, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर — तीसरे दिन का अलौकिक दृश्य
देवघर।
देवी संपत मंडल के तत्वाधान में चल रहे अति रुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा का तीसरा दिन शुक्रवार को ऐसा रहा, जिसने पूरे देवघर को दिव्यता, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
सुबह से ही नगर में शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार और 108 हवन-कुंडों से उठती आहुतियों की सुगंध ने वातावरण को पूर्णतः पावन बना दिया।
हजारों श्रद्धालु—महिलाएँ, युवा, तपस्वी साधु-संत और बुजुर्ग—सभी पर भक्ति का अद्भुत प्रभाव देखा गया। बाबा बैद्यनाथ धाम की यह पावन धरती मानो आज वैदिक काल की भांति अलौकिक चमक से जगमगा उठी हो।
विशेष उपस्थिति जिसने आयोजन को भव्यता से भर दिया
आज के कार्यक्रम में अध्यात्म और वैदिक परंपरा के कई प्रतिष्ठित संत उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख हैं—
आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 108 विशेश्वरानंद भारती जी महाराज
महामंडलेश्वर स्वामी आनंद चैतन्य जी महाराज
महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद जी महाराज
स्वामी ज्योतिर्मयानंद
स्वामी विवेकानंद जी महाराज
सभी संतों ने अपने आशीर्वचन से वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरते हुए जीवन, धर्म, सत्य, भक्ति एवं मानवता के भावों पर प्रकाश डाला।
मंच संचालन — स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती एवं आचार्य शुभेष शर्मन द्वारा किया गया।
कथा-वाचन : आचार्य महामंडलेश्वर विशेश्वरानंद भारती जी महाराज की दिव्य वाणी
तीसरे दिन की कथा में जब महाराज श्री श्री 108 विशेश्वरानंद भारती जी महाराज व्यास पीठ पर विराजे, तब वातावरण में ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा प्रसारित हुई कि श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे।
उन्होंने श्रीकृष्ण की लीलाओं को अत्यंत सरल, भावपूर्ण और प्रेरक ढंग से प्रस्तुत करते हुए कहा—
> “जैसे गोकुल का एक साधारण ग्वाला भी कृष्ण के दर्शन मात्र से धन्य हो जाता था, वैसे ही भक्तिभाव से भरे मन का एक क्षण भी प्रभु को प्राप्त करा देता है। आस्था का मार्ग कठिन नहीं—निर्मल हृदय और सच्ची भावना ही भगवान तक ले जाती है।”
उन्होंने कहा कि अति रुद्र महायज्ञ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व-शांति, कल्याण और मानवता के उत्थान का एक विराट संदेश है।
यही वैदिक परंपरा भारत की आत्मा है—जो पूरे संसार को मार्गदर्शन देती है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का आगमन — श्रद्धालुओं में उत्साह
आज के आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण रहा केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह का देवघर आगमन।
उन्होंने—
यज्ञ मंडप की परिक्रमा की
108 कुंडों में चल रहे अनुष्ठानों का दर्शन किया
स्वामी हरिहरानंद सरस्वती एवं अन्य संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया
भागवत कथा में बैठकर श्रीकृष्ण महिमा का श्रवण किया
केंद्रीय मंत्री ने मंच से कहा—
> “देवघर धर्म और अध्यात्म की नगरी है। यह अति रुद्र महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्व-कल्याण, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का विराट प्रतीक है। बाबा बैद्यनाथ की पावन भूमि से उठने वाली प्रत्येक आहुति मानवता के हित में है।”
उन्होंने आगे लोगों से भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण रखने की अपील करते हुए संदेश दिया कि—
> “अपने तथा अपने बच्चों के जन्मदिन पर पाश्चात्य सभ्यता की नकल छोड़कर घर में हलुआ-पूरी, मिठाई बनाकर दीपोत्सव मनाएँ।
इससे संस्कृति भी बचेगी और घर का वातावरण भी पवित्र होगा।”
उनके संदेश को श्रद्धालुओं ने तालियों से स्वागत किया।
यज्ञ स्थल : 108 कुंडों में आहुतियों ने रचा दिव्य दृश्य
आज यज्ञ मंडप का दृश्य अवर्णनीय था। 108 हवन-कुंडों में—
घृत-आहुति की सुगंध
वैदिक ऋचाओं की गूंज
मंत्रोच्चार की उर्जा
अग्नि की ज्योति
साधु-संतों की तपस्या
ने पूरे परिसर को एक अद्भुत और अलौकिक आध्यात्मिक शक्ति से भर दिया।
परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा—हर दिशा से भक्ति-भाव से भरे जयघोष सुनाई देते रहे—
“हर हर महादेव!”
“जय श्रीराम!”
“राधे-राधे!”
“जय श्रीकृष्ण!”
देवघर की गलियां, मंदिर परिसर और यज्ञ स्थल—सब कुछ मानो एक साथ आध्यात्मिक स्पंदनों से आलोकित हो उठे थे।

महिलाओं की भारी उपस्थिति — आज की विशेषता
आज के अनुष्ठान की सबसे बड़ी विशेषता रही महिलाओं की अत्यधिक उपस्थिति।
माथे पर सिंदूर
हाथों में पूजा की थालियाँ
मन में भक्ति
भजन-कीर्तन की धुन पर झूमते कदम
ने एक ऐसा भावपूर्ण वातावरण रचा, जिसे सभी भक्तों ने अनूठा अनुभव बताया।
उनकी श्रद्धा और आस्था ने आयोजन में एक सजीव ऊर्जा का संचार किया।
अगले दिनों में और भी विशेष संतों के आगमन की संभावना
आयोजन समिति के अनुसार—
अगले दिनों में देशभर से अधिक प्रतिष्ठित संत, महामंडलेश्वर और वैदिक विद्वान देवघर पधारेंगे।
हर दिन अलग-अलग कथा प्रसंग, विशेष अनुष्ठान और यज्ञ की महत्वपूर्ण कड़ियाँ सम्पन्न होंगी।
श्रद्धालु इन अद्भुत आध्यात्मिक क्षणों के लिए अत्यंत उत्साहित हैं।
देवघर इन दिनों साक्षात धर्म, भक्ति और वैदिक परंपरा का केंद्र बना हुआ है।
देवघर—भक्ति, वैदिक परंपरा और आध्यात्मिक महोत्सव का केंद्र
इन दिनों देवघर का हर कोना ऐसा लगता है मानो—
भगवान शिव
भगवान श्रीकृष्ण
और वैदिक परंपरा
की कृपा से पूर्णतः आच्छादित है।
तीसरे दिन का यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि—
जब आस्था, अध्यात्म और वैदिक संस्कृति एक साथ समाहित होते हैं,
तो धरती दिव्यता से भर उठती है।
अति रुद्र महायज्ञ ने देवघर को एक बार फिर यह अनुभव कराया।
निष्कर्ष : देवघर में अध्यात्म का पर्व — स्मरणीय और अद्वितीय
देवघर के अति रुद्र महायज्ञ का आज का दिन—
दिव्यता
शांति
भक्ति
वैदिक ऊर्जा
और अलौकिक कंपन
का अद्वितीय संगम रहा।
साधु-संतों की उपस्थिति, मंत्रों की गूंज, 108 कुंडों की पवित्र अग्नि और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की श्रद्धा ने इस आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया।
आने वाले दिनों में देवघर फिर नए अध्यात्मिक अनुभवों का साक्षी बनने वाला है।








